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हरियाणा का गांव,जिसके 55 युवा एक साथ सरकारी नौकरी लगे:सैनी की शपथ के बाद आया रिजल्ट; सरपंच प्रतिनिधि बोले- 350 बच्चे गवर्नमेंट जॉब लग चुके

हरियाणा में कैथल जिले के डीग गांव के एक साथ 55 युवाओं की सरकारी नौकरी लगी है। एक दिन पहले नायब सिंह सैनी के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद हरियाणा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (HSSC) ने ग्रुप C-D का रिजल्ट जारी किया था। एक साथ 55 युवाओं का सिलेक्शन होने पर HSSC के चेयरमैन हिम्मत सिंह ने शुक्रवार को डीग गांव के सरपंच प्रतिनिधि रोहताश नैन से फोन पर बात की।

हिम्मत सिंह ने सरपंच प्रतिनिधि को बधाई दी और सिलेक्ट हुए बच्चों से भी बात की। साथ ही सरपंच को गांव के अन्य बच्चों को भी प्रेरित करने को कहा।

रोहताश नैन ने कहा- हमारे गांव के 55 बच्चे सरकारी नौकरी पर लगे हैं। हमारे यहां बहुत खुशी का माहौल है। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने वादा किया था कि मैं शपथ के साथ ही रिजल्ट जारी करूंगा। इससे पहले भी इस गांव से करीब 350 बच्चे सरकारी नौकरी पर लगे थे। जो बच्चे नौकरी से रह गए हैं, वह आने वाले समय में जरूर लगेंगे।

सरपंच प्रतिनिधि बोले- गांव में लाइब्रेरी बनाएंगे सरपंच प्रतिनिधि रोहताश ने कहा कि इस गांव की करीब साढ़े 8 हजार की आबादी है। यहां साढ़े 4 हजार वोटर हैं। यहां के युवा बहुत मेहनती है। यहां लाइब्रेरी की कमी है। युवाओं के लिए जल्द लाइब्रेरी बनाई जाएगी। पहले पैसे देकर भी नौकरी नहीं लगती थी। इस सरकार में बिना पर्ची-खर्ची के नौकरी लग रही है।

HSSC के चेयरमैन से फोन पर बात करते डीग गांव के सरपंच प्रतिनिधि रोहताश नैन।

अंकित बोले- गांव की युवतियां HCS-DSP लग चुकीं पुलिस में कॉन्स्टेबल सिलेक्ट हुए अंकित नैन ने बताया कि भाजपा की सरकार में नौकरी का सिलसिला शुरू हुआ। 2014 में 4-5 बच्चे लगे थे। इसके बाद बच्चों में हौसला आ गया और नौकरी की तरफ प्रभावित हुए। इसके बाद ये आंकड़ा बढ़ता चला गया। हमारे गांव में कुछ दिन पहले 2 युवती HCS और DSP लगी थी। आज के टाइम पर गरीब घर का बच्चा भी पढ़कर नौकरी लग रहा है। यहां से बच्चे पढ़ने के लिए पुंडरी की तरफ जाते हैं।

डीग गांव की ममता का बेटा D ग्रुप और बेटी ग्राम सचिव के पद पर सिलेक्ट हुई है।

अमित ने कहा- ग्रेजुएशन के साथ नौकरी की तैयारी की कॉन्स्टेबल में सिलेक्ट होने वाले अमित ने बताया कि मैं डिस्टेंस से BA कर रहा था। साइड में मैं कोचिंग भी ले रहा था। बच्चों का मेन सोर्स यही है। ग्रेजुएशन के साथ-साथ नौकरी की तैयारी करते हैं। गांव में सीनियर सेकेंडरी स्कूल है। ग्रेजुएशन के लिए बाहर जाना पड़ता है। हमारे गांव में कुछ ही घर बाकी हैं, जिनकी बच्चे सरकारी नौकरी पर नहीं है। आने वाले टाइम पर उनके बच्चे भी लग जाएंगे। यहां हर बच्चा लाइब्रेरी में पढ़ने के लिए जाता है। मैंने नौकरी के लिए पहले भी ट्राई किया था, लेकिन चयन नहीं हुआ। मुझे आस थी, इस बार मेरा चयन हो गया।

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