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डोनाल्ड ट्रम्प का किसी भारतीय मीडिया को पहला इंटरव्यू:भास्कर से कहा- मेरी गारंटी है, भारत के लिए मुझसे बेहतर दोस्त कोई नहीं

अमेरिका में 5 नवंबर को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रम्प दूसरी बार उम्मीदवार हैं। बेबाकी के लिए मशहूर ट्रम्प जीत को लेकर आश्वस्त हैं। उन्होंने अपने बिजी शेड्यूल के बीच दैनिक भास्कर के सवालों के जवाब दिए।

पहली बार भारतीय मीडिया को दिए इंटरव्यू में ट्रम्प ने दावा किया कि भारत के लिए व्हाइट हाउस में उनसे बेहतर और कोई राष्ट्रपति नहीं होगा। वे भारत-अमेरिका के संबंध नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।

ट्रम्प कहते हैं-

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अमेरिकी जनता जान चुकी है कि कमला हैरिस बेहद खराब राष्ट्रपति साबित होंगी। कॉमरेड कमला हैरिस अमेरिकी जनता की जेब से पैसे खींच लेगी, जबकि मैं उनकी जेब में हजारों डॉलर भरने वाला हूं।

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भारतीय प्रवासियों से लेकर कमला पर पूछे गए 5 सवाल और ट्रम्प के जवाब…

सवाल 1: दूसरी पारी मिली तो भारत के लिए क्या प्लान हैं? ट्रम्प: भारतीय अमेरिकी मेरे समर्थक हैं। पिछले चुनाव में भी मुझे उनका भरपूर समर्थन मिला। अमेरिका में भारतीयों की मजबूत उपस्थिति देखी जा सकती है। इसका कारण उनका बेजोड़ टैलेंट है। मेरे चुनाव कैंपेन में शामिल भारतवंशी मेहनत कर रहे हैं। भारत यात्रा के दौरान मेरा गर्मजोशी से स्वागत हुआ, ये मुझे आज भी याद है।

मैं गारंटी देता हूं कि भारतीय व्हाइट हाउस में बतौर राष्ट्रपति मुझसे बेहतर दोस्त नहीं पा सकते हैं। मैं भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी को काफी समय से जानता हूं, उनके नेतृत्व में भारत आगे बढ़ रहा है। मैं अपनी दूसरी पारी में पीएम मोदी के साथ काम करने के लिए बेहद उत्सुक हूं।

ट्रम्प और प्रधानमंत्री मोदी की आखिरी मुलाकात 2019 में हुई थी। ट्रम्प 2020 में हुए अमेरिकी चुनाव से पहले भारत आए थे, इस दौरान मोदी ने कहा था- अगली बार ट्रम्प सरकार

सवाल 2. इमिग्रेशन को लेकर आपका रवैया काफी कड़ा है, भारतीयों को कैसे आश्वस्त करेंगे? ट्रम्प: अवैध इमिग्रेशन (प्रवासन) को लेकर मेरा कड़ा रवैया है। बतौर राष्ट्रपति मैंने अवैध प्रवासियों के खिलाफ कड़ाई की थी। लेकिन मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि वैध प्रवासियों विशेषकर भारतीयों का मैं स्वागत करता हूं। मैंने हाल में कहा है कि अमेरिका में ग्रेजुएशन करने वाले भारतीयों और अन्य विदेशी छात्रों को ऑटोमेटिक रूट से ग्रीन कार्ड मिलना चाहिए। यानी पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्हें अमेरिका में स्थायी रूप से बसने के लिए सभी सुविधाएं मिलनी चाहिए।

हार्वर्ड और एमआईटी के भारतीय छात्र पढ़ाई पूरी होने के बाद अपने देश लौट जाते हैं। ये अमेरिका के लिए बड़ा नुकसान है। इसलिए मैंने ग्रेजुएशन करने वालों को ग्रीन कार्ड देने की स्कीम शुरू करने का ऐलान किया है। मेरी स्कीम डिग्रीधारी और स्किल्ड वर्करों के लिए ओपन डोर पॉलिसी रहेगी। इससे अमेरिका के अन्य वर्करों के जॉब भी नहीं छिनेंगे।

सवाल 3. इमिग्रेशन पर आप कमला हैरिस से कैसे अलग हैं? ट्रम्प: ‘कॉमरेड’ कमला हैरिस की इमिग्रेशन पॉलिसी के कारण दुनिया भर की जेलों से अपराधी-आतंकी बॉर्डर पार कर अमेरिका आ रहे हैं। घुसपैठियों को निकालने की कोई कार्रवाई नहीं की गई है। ये घुसपैठिए अमेरिका में जंगल राज बना रहे हैं। मैं राष्ट्रपति बनते ही दो करोड़ घुसपैठियों को निकाल बाहर करने वाला हूं। कमला न तो ऐसा कर पाई हैं और न ऐसा कर सकती हैं।

ट्रम्प ने कहा कि मैं राष्ट्रपति बनते ही दो करोड़ घुसपैठियों को निकाल बाहर करने वाला हूं।

सवाल 4: कमला हैरिस राष्ट्रपति के रूप में आपके कार्यकाल पर सवाल उठा रही हैं, क्या कहेंगे? ट्रम्प: कमला और उनके ‘हैंडलर्स’ मुझ पर ऐसे आरोप लगा रहे हैं जैसे मैं निवर्तमान राष्ट्रपति हूं। जबकि पिछले चार साल से तो ये लोग (डेमोक्रेट्स) सत्ता में हैं। जवाबदेही इनकी ​है। मैं सत्ता से बाहर हूं, लेकिन मुझ पर ऐसे दोष जड़े जा रहे हैं, जिससे मेरा कोई वास्ता नहीं है। कमला को गलतफहमी है कि जनता उनके झूठ को पकड़ नहीं पाएगी। बाइडेन-कमला प्रशासन ने सच को दबाने और झूठ को बढ़ावा देने का ही काम किया है।

सवाल 5: इजराइल-हमास युद्ध को एक साल होने वाला है, आपके पास युद्ध रोकने का क्या प्लान है? ट्रम्प: कमला हैरिस यहूदियों से नफरत करती हैं। कमला चुनाव जीतती हैं तो इजराइल का खात्मा होना तय है। असल में डेमोक्रेट्स हमास के समर्थक हैं। इनके बड़े नेता फिलिस्तीन के नाम पर हमास को बढ़ावा देते हैं। वर्तमान में अमेरिकी नेतृत्व की कमजोरी के कारण हमास द्वारा बनाए गए बंधकों की एक साल बाद भी रिहाई नहीं हो पाई है। इन बंधकों में कई अमेरिकी नागरिक भी हैं।

अंतरराष्ट्रीय नीति में डेमोक्रेट्स विफल साबित हुए हैं। इजराइल-हमास युद्ध को रोकने के लिए अमेरिका को अपनी ताकत का सही इस्तेमाल करना चाहिए। राष्ट्रपति जो बाइडेन ने बिना सोचे-समझे अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना बुलाने का फैसला किया था। किसी भी अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर अमेरिकी हितों को सर्वोपरि रखकर फैसले किए जाने चाहिए।

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