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PM मोदी से मिली जालंधर की पैरालिंपिक बैडमिंटन प्लेयर:प्रधानमंत्री बोले-पलक तुम्हारी कहानी प्रेरणादायक; खिलाड़ी ने कहा- आपके आशीर्वाद से खुश

पंजाब के जालंधर की रहने वाली पलक कोहली ने पेरिस पैरालिंपिक में बैडमिंटन गेम हिस्सा लिया था, मगर वह मेडल नहीं जीत पाई। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में पलक से मुलाकात की और उसे प्रोत्साहित किया। इस दौरान पलक ने अपने संघर्ष की सारी कहानी प्रधानमंत्री को सुनाई और पीएम मोदी ने पलक को आगे के खेल के लिए शुभकामनाएं दी।

टोक्यो पैरालिंपिक के बाद पलक कोहली को कैंसर का पता चला था। उन्होंने हाल ही में कैंसर को हराकर पेरिस पैरालिंपिक में जगह बनाई। फिर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। बता दें कि पलक की कोचिंग लखनऊ में हुई है।

पलक ने अपने कोच और पीएम मोदी और केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू का धन्यवाद किया।

पीएम बोले- पलक आप लोगों के लिए एक प्रेरणा हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पलक से मुलाकात के दौरान जमकर उनकी तारीफ की और कहा कि पलक आपका मामला ऐसा है कि आप कई लोगों को प्रेरणा दे सकती हैं। क्योंकि इतनी कठिनाइयों के बावजूद भी ट्रेन पटरी पर आई, आपकी जिंदगी बनाई।

बीच में एक नई बाधा खड़ी हो गई। फिर भी आपने अपना उद्देश्य नहीं छोड़ा है। यह बड़ा सौदा है। आप के लिए बधाई पलक ने कहा कि पैरालिंपिक में जगह बनाने के लिए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग ली और फिर अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग हासिल करने के लिए कड़ा संघर्ष किया।

पीएम मोदी से बातचीत करती हुई पलक।

पलक ने पीएम को सुनाई बाधाओं भरी कहानी

पीएम की तारीफ के दौरान पलक ने जिंदगी में आई बाधाओं के बारे में पीएम मोदी से बताया। पलक ने कहा कि मैं टोक्यो पैरालिंपिक में चौथे स्थान पर रही। इस बार मैं 5वें स्थान पर रहा। इस पैरालिंपिक में मेरी यात्रा बिल्कुल अलग थी। टोक्यो पैरालिंपिक के बाद मुझे बोन ट्यूमर कैंसर का पता चला। यह स्टेज-1 कैंसर था। मैंने ढाई साल तक किसी प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लिया।

मैंने पिछले साल वापसी की और मैं बहुत खुश हूं। मैं अपने गौरव सर (पलक के कोच) की मदद से आगे बढ़ी। मेरे कई टूर्नामेंट छूट गए। एशियाई खेलों के दौरान मुझे कोविड हो गया। फिर मैंने विश्व चैम्पियनशिप के लिए क्वालीफाई किया और कांस्य पदक जीता। फिर बैक टू बैक पेरिस पैरालिंपिक के लिए क्वालीफाई किया।

ज्यादा टूर्नामेंट न खेलने के बाद मेरी रैंक घटकर 38 हो गई, लेकिन फिर मैंने दुनिया में अपनी रैंक चौथी बना ली। मैं पदक तो नहीं जीत सकी लेकिन आपने जो आशीर्वाद दिया उससे मैं बहुत खुश हूं।’ अब मैं 2028 की तैयारी कर रही हूं। बता दें कि पलक का एक हाथ नहीं है और वह शारीरिक रूप से दूसरों के अलग होने के बाद भी कभी हार नहीं मानती।

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