भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अल्पसंख्यक मोर्चा ने वक्फ बोर्ड संशोधन अधिनियम 2024 को लेकर 7 सदस्यों की टीम बनाई है। यह टीम मुस्लिम समुदाय से बातचीत करेगी और उनके सुझाव इकट्ठा करेगी।
31 अगस्त को बनाई गई टीम में उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, हरियाणा, गुजरात और हिमाचल प्रदेश के वक्फ बोर्ड्स के अध्यक्ष समेत भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के 2 राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य शामिल हैं।
ये सदस्यअलग-अलग राज्यों में जाकर मुस्लिम विद्वानों से चर्चा करेंगे। उनकी चिंताओं को समझेंगे और विधेयक पर सुझाव जुटाएंगे। साथ ही, वे संशोधन की जरूरत और उसके फायदे बताएंगे।
साथ ही अल्पसंख्यक समुदाय के भीतर मौजूद किसी भी गलत धारणा और संदेह का भी समाधान करेंगे। इस समिति से पहले लोकसभा सचिवालय ने 31 सदस्यों की JPC बनाई है। जिसकी तीसरी बैठक 5 सितंबर को है।
- BJP की टीम के सदस्य
- उत्तराखंड वक्फ बोर्ड अध्यक्ष शादाब शम्स
- मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड अध्यक्ष सनावर पटेल
- हरियाणा वक्फ बोर्ड के प्रशासक चौधरी जाकिर हुसैन
- गुजरात वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष मोहसिन लोखंडवाला
- हिमाचल प्रदेश वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष राजबली
- भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य मौलाना हबीब हैदर
- भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य नासिर हुसैन
JPC ने जनता से भी मांगे सुझाव
लोकसभा सांसद जगदंबिका पाल की अध्यक्षता में जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी बनाई गई है। 31 सदस्यीय समिति में लोकसभा से 21 और राज्यसभा से 10 सदस्य हैं। समिति की पहली बैठक 22 अगस्त को हुई थी। दूसरी बैठक 30 अगस्त को नई दिल्ली में हुई। बैठक के बाद समिति ने जनता विचार और सुझाव मांगे हैं। इसके लिए 15 दिन का समय दिया है। वक्फ संशोधन विधेयक पर अगली जेपीसी बैठक 5 और 6 सितंबर को होनी है।
दूसरी बैठक में हुआ हंगामा, मुस्लिम सदस्य बोले
JPC की दूसरी बैठक 30 अगस्त को हुई। जिसमें जमकर हंगामा हुआ। विपक्षी सदस्यों ने कुछ देर के लिए बैठक से वॉक आउट भी किया। समिति ने करीब 8 घंटे तक चली बैठक में ऑल इंडिया सुन्नी जमीयतुल उलेमा और इंडियन मुस्लिम्स फॉर सिविल राइट्स, राजस्थान मुस्लिम वक्फ, दिल्ली और यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड के विचारों को सुना।
सूत्रों के अनुसार, मुस्लिम संगठनों ने बिल के कई प्रावधानों पर कहा कि यह मुसलमानों के लिए चिंता का विषय हैं। बैठक में ‘वक्फ बाय यूजर्स’ पर सबसे ज्यादा चर्चा हुई। मुस्लिम पक्ष ने कहा कि यह धार्मिक आस्था और व्यवहार का मामला है। इसलिए सरकार को इसमें दखल नहीं देना चाहिए। पढ़ें पूरी खबर…
