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क्या सुनीता विलियम्स का स्पेसक्राफ्ट जल सकता है:सिर्फ 96 घंटे का ऑक्सीजन; वापसी के प्लान में क्या खतरे हैं

भास्कर एक्सप्लेनर- क्या सुनीता विलियम्स का स्पेसक्राफ्ट जल सकता है:सिर्फ 96 घंटे का ऑक्सीजन; वापसी के प्लान में क्या खतरे हैं

6 घंटे पहलेलेखक: शिवेंद्र गौरव

भारतीय मूल की अमेरिकी एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स और उनके साथी बुश विलमोर स्पेसक्राफ्ट में खराबी के चलते 80 दिनों से स्पेस स्टेशन में फंसे हुए हैं। उनकी वापसी के दबाव के बीच NASA ने कहा है कि स्टारलाइनर से एस्ट्रोनॉट्स वापस आ सकेंगे या नहीं, यह 24 सितंबर के बाद ही तय किया जा सकेगा। एक्सपर्ट्स का मानना है कि स्टारलाइनर से एस्ट्रोनॉट्स को वापस लाने में 3 बड़े खतरे हैं।

क्या सुनीता विलियम्स को स्पेस स्टेशन में खाने-पीने और ऑक्सीजन की कमी हो रही, वापसी का प्लान क्या है और उसके क्या खतरे हैं; भास्कर एक्सप्लेनर में 9 जरूरी सवालों के जवाब…

सवाल 1: क्या स्पेस स्टेशन पर ऑक्सीजन या दूसरी जरूरी चीजों की कमी हो गई है?
जवाब:
 नहीं, इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर खाने, कपड़े और दूसरी जरूरी चीजों की कोई कमी नहीं है। 14 अगस्त 2024 को प्रोग्रेस एमएस-28 नाम के कार्गो रीसप्लाई स्पेसशिप से ISS पर लगभग तीन टन खाना, कपड़े, ईंधन, मेडिकल और साफ-सफाई की चीजें भेजी गई हैं।

इसमें स्टेशन के वायुमंडल को फिर से रीफिल करने के लिए 950 किलो प्रोपेलेंट, 420 किलो पानी और 50 किलो नाइट्रोजन भी शामिल है। इससे पहले 4 अगस्त को भी सिग्नस एनजी-21 नाम के अमेरिकी कार्गो स्पेशशिप से ISS पर 3.8 टन सामान भेजा गया था। इसमें करीब 1 टन खाना और कपड़े थे, 1 टन रिसर्च के उपकरण, कुल हार्डवेयर और कुछ कंप्यूटर के सामान थे।

एस्ट्रोनॉट्स सांस के जरिए जो कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं, उसका इस्तेमाल करके करीब 50% ऑक्सीजन रिसाइकिल हो जाती है। सोलर पैनल से बनी बिजली के इस्तेमाल से पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में तोड़ा जाता है, ताकि एस्ट्रोनॉट्स को ऑक्सीजन की कमी न हो।

हालांकि, एक बड़ी दिक्कत एस्ट्रोनॉट्स के शरीर की गंध की है। ये ISS की हवा को सांस लेने लायक नहीं रखती। इससे निपटने के लिए नाइट्रोजन को पानी से बनी ऑक्सीजन में मिलाया जाता है, ताकि ताजी हवा बनाई जा सके।

सवाल 2: क्या सामान लाने-ले जाने वाले कार्गो से सुनीता की वापसी नहीं हो सकती?
जवाब:
 नहीं। सामान पहुंचाने वाले ये स्पेसशिप आमतौर पर पृथ्वी पर नहीं लौटते। दरअसल, ISS पर कपड़े धोने की सुविधा नहीं है। कपड़े और बाकी इस्तेमाल की जा चुकी चीजों का कचरा इकठ्ठा होता रहता है।

जब ISS पर एक नया कार्गो शिप आता है तो पुराने कार्गो शिप को ISS से अलग कर दिया जाता है। इसके बाद ये पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है। यहां उसे सुरक्षित तरीके से वायुमंडल में ही जला दिया जाता है।

हालांकि, स्पेसएक्स का ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट कार्गो ले जाने के बाद वापस पृथ्वी पर भी उतर सकता है, लेकिन अभी एस्ट्रोनॉट्स को वापस लाने के लिए नासा ने ड्रैगन भेजने की कोई योजना नहीं बनाई है।

सवाल 3: स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट बनाने वाली कंपनी बोइंग और नासा के बीच सुनीता को वापस लाने पर सहमति क्यों नहीं बन पा रही?
जवाब:
 अमेरिकी एयरक्राफ्ट कंपनी बोइंग के स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट में खराबी के बाद कई टेस्ट किए गए थे। बीते दिनों जानकारी आई कि बोइंग ने अपने स्टारलाइनर को एस्ट्रोनॉट्स को वापस लाने के लिए फिट बताया है। हालांकि, नासा इसे लेकर आश्वस्त नहीं है। सुनीता और विलमोर की वापसी के लिए अभी भी नासा स्टारलाइनर को फिट नहीं मान रहा है।

ये मिशन नासा के एक लंबे प्रोग्राम का हिस्सा है। साल 2030 में ISS को बंद कर दिया जाएगा। तब तक नासा हर साल दो बार बोइंग के स्टारलाइनर और इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट के जरिए एस्ट्रोनॉट्स को ISS पर भेजना चाहता है। नासा, सभी तरह की जांचें कर लेने के बाद ही स्टारलाइनर को एस्ट्रोनॉट्स को वापस लाने की अनुमति देगा।

सवाल 4: सुनीता और बुश की वापसी के लिए NASA ने लेटेस्ट प्लान क्या बनाया है?
जवाब:
 नासा ने 22 अगस्त को अपनी वेबसाइट पर एक अपडेट जारी करके बताया है कि उसके और बोइंग के एक्सपर्ट्स, ISS से एस्ट्रोनॉट्स की वापसी को लेकर डाटा का एनालिसिस कर रहे हैं। नासा के मुताबिक, ‘24 अगस्त को ये रिव्यू पूरा होने से पहले तक यह नहीं बताया जा सकता कि सुनीता और विलमोर को स्टारलाइनर से वापस लाया जाएगा या नहीं।’

नासा के स्पेस ऑपरेशंस मिशन डायरेक्टरेट के एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर केन बोवर्सॉक्स की अध्यक्षता में रिव्यू किया जा रहा है। रिव्यू पूरा होने के बाद नासा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगी। अगर रिव्यू में फैसला लिया गया तो ही स्टारलाइनर से एस्ट्रोनॉट्स की वापसी की तैयारी शुरू की जाएगी।

सवाल 5: स्टारलाइनर से वापसी में सुनीता और विलमोर की जान को क्या खतरे हैं?
जवाब:
 अमेरिका के मिलिट्री स्पेस सिस्टम्स के कमांडर रहे रूडी रिडोल्फी ने स्टारलाइनर से एस्ट्रोनॉट्स की वापसी में खतरे के तीन सिनैरियो बताए हैं-

  • सिर्फ 96 घंटे की ऑक्सीजन के साथ स्पेस में फंसना: ISS पर जितनी जरूरत हो उतनी ऑक्सीजन बनाई जा सकती है, लेकिन वापसी करते समय स्पेसक्राफ्ट के जिस कैप्सूल में एस्ट्रोनॉट्स होंगे, उसमें सिर्फ 96 घंटे की ऑक्सीजन होगी। स्पेसक्राफ्ट अगर गलत एंगल से पृथ्वी के वायुमंडल में घुसा तो समस्या हो सकती है। गलत एंगल के चलते स्पेसक्राफ्ट वायुमंडल से टकराकर वापस स्पेस में ऑर्बिट में चला जाएगा। ऐसे में ऑक्सीजन की कमी से एस्ट्रोनॉट्स की मौत होने का खतरा है।
  • पृथ्वी के वायुमंडल में न घुस पाना: अगर स्पेसक्राफ्ट का एंगल गलत हुआ तो यह पृथ्वी के वायुमंडल में नहीं घुस पाएगा। ऐसे में कैप्सूल अनिश्चित समय के लिए स्पेस में ही रह जाएगा।
  • स्पेसक्राफ्ट का जल कर भाप बन जाना: अगर स्पेसक्राफ्ट बहुत खड़े कोण (स्टीप एंगल) से पृथ्वी के वायुमंडल में घुसा तो हवा के घर्षण और उससे उपजी गर्मी के आगे स्टारलाइनर की हीट शील्ड फेल हो सकती है। इससे स्पेसक्राफ्ट पृथ्वी की सतह पर पहुंचने से पहले ही जलकर भाप बन सकता है। ऐसी स्थिति में एस्ट्रोनॉट्स की मौत तय होती है।

सवाल 6: क्या सुनीता और विलमोर के अलावा भी कुछ एस्ट्रोनॉट्स ISS से वापस धरती पर आने वाले हैं? क्या उनके साथ सुनीता और विलमोर नहीं आ सकते?
जवाब:
 असल में नासा का एक्सपेडिशन-71 नाम का एक अभियान 5 अप्रैल 2024 को शुरू हुआ था। ये सिंतबर 2024 में खत्म होगा। इसके तहत कुल 9 एस्ट्रोनॉट्स अभी ISS पर मौजूद हैं। इनमें सुनीता और विलमोर के अलावा 4 अन्य अमेरिकी और 3 रूसी एस्ट्रोनॉट्स हैं। इनके नाम हैं-

ओलेग कोनोनेंको, निकोलाई चूब, ट्रेसी डायसन, मैथ्यू डोमिनिक, माइकल बैरेट, जीनेट एप्स और अलेक्जेंडर ग्रेबेन्किन।

ओलेग और निकोलाई एक्सपीडिशन-70 के तहत रूस के स्पेसक्राफ्ट सोयुज एमएस-24 से ISS पहुंचे थे और एक्सपेडिशन-71 में शामिल होने के लिए वहीं रुक गए। जबकि ट्रेसी डायसन 25 मार्च को सोयुज एमएस-25 पर सवार होकर ISS के क्रू में शामिल हुईं। ये तीनों 24 सितंबर 2024 को सोयुज एमएस-25 पर सवार होकर वापस लौट आएंगे। इसमें तीन लोगों के लिए ही जगह है।

डोमिनिक, बैरेट, एप्स और ग्रेबेन्किन 5 मार्च को स्पेसएक्स के ड्रैगन एंडेवर नाम के स्पेसक्राफ्ट से ISS पहुंचे थे। ये भी एक्सपेडिशन-71 में शामिल हुए। ये चारों लोग ड्रैगन से ही सितंबर 2024 में पृथ्वी पर लौटने वाले हैं। इसमें भी अधिकतम 4 ही एस्ट्रोनॉट्स सफर कर सकते हैं।

एक्सपेडिशन-71 जब वापसी करेगा तो एक्सपेडिशन-72 शुरू होगा। इसमें कुल 7 एस्ट्रोनॉट्स होंगे। सुनीता और विलमोर को एक्सपेडिशन-72 शुरू होने से पहले ही ISS छोड़ देना था, लेकिन अब वह इस मिशन के एस्ट्रोनॉट्स के साथ ही वापसी कर पाएंगे।

सवाल 7: सुनीता और विलमोर की वापसी का आखिरी जरिया क्या है?
जवाब:
 अगर स्टारलाइनर से वापसी का प्लान रद्द हो गया तो नासा के पास एक ही बैकअप प्लान है। स्पेसएक्स का क्रू-9 ड्रैगन मिशन। इसके तहत 4 एस्ट्रोनॉट्स को अगले महीने सितंबर में ISS पर भेजा जा रहा है। इन चारों एस्ट्रोनॉट्स को फरवरी 2025 तक ISS पर रहना है। अभी तक इसकी यही योजना है।

इधर अगर स्टारलाइनर से सुनीता और विलमोर की वापसी नहीं हो पाती तो, नासा क्रू-9 के तहत ड्रैगन में सिर्फ 2 एस्ट्रोनॉट्स को भेजेगा। फरवरी तक ये दोनों सुनीता और विलमोर के साथ ISS पर रहेंगे। वापसी में सुनीता इन्हीं दोनों के साथ वापस पृथ्वी पर आ जाएंगी।

हालांकि, यह पहली बार नहीं है कि किसी एस्ट्रोनॉट को अपने मिशन से ज्यादा समय तक स्पेस में रहना पड़ा हो। पहले भी ऐसा हो चुका है। चिंता की बात यह भी है कि ज्यादा समय तक स्पेस में रहने पर एस्ट्रोनॉट्स को शारीरिक और मानसिक दिक्कतें भी होती हैं। खराब स्पेसशिप से वापसी के दौरान एस्ट्रोनॉट्स की मौतें भी हुई हैं, इसलिए फिलहाल सुनीता और विलियम्स को स्पेस में ही रखा गया है।

सवाल 8: सुनीता और विलमोर इतने लंबे समय तक स्पेस में कैसे फंस गए?
जवाब:
 स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट के लॉन्च के समय से ही उसमें कई दिक्कतें थीं। इनके चलते 5 जून से पहले भी कई बार लॉन्च फेल हुआ था।

लॉन्च के बाद भी स्पेसक्राफ्ट में दिक्कतों की खबर आई। नासा ने बताया कि स्पेसक्राफ्ट के सर्विस मॉड्यूल के थ्रस्टर में एक छोटा सा हीलियम लीक है। एक स्पेसक्राफ्ट में कई थ्रस्टर होते हैं। इनकी मदद से स्पेसक्राफ्ट अपना रास्ता और स्पीड बदलता है। वहीं हीलियम गैस होने की वजह से रॉकेट पर दबाव बनता है। उसका ढांचा मजबूत बना रहता है, जिससे रॉकेट को अपनी फ्लाइट में मदद मिलती है।

लॉन्च के बाद 25 दिनों में स्पेसक्राफ्ट के कैप्सूल में 5 हीलियम लीक हुए। 5 थ्रस्टर्स काम करना बंद कर चुके थे। इसके अलावा एक प्रॉपेलेंट वॉल्व पूरी तरह बंद नहीं किया जा सका। स्पेस में मौजूद क्रू और अमेरिका के ह्यूस्टन में बैठे मिशन के मैनेजर मिलकर भी इसे ठीक नहीं कर पा रहे हैं।

सवाल 9: सुनीता और विलमोर को स्पेस स्टेशन पर क्यों भेजा गया था?
जवाब:
 सुनीता और बुश विलमोर बोइंग और नासा के जॉइंट ‘क्रू फ्लाइट टेस्ट मिशन’ पर गए थे। इसमें सुनीता, स्पेसक्राफ्ट की पायलट थीं। उनके साथ गए बुश विलमोर इस मिशन के कमांडर थे। दोनों को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में 8 दिन रुकने के बाद वापस पृथ्वी पर आना था।

लॉन्च के समय बोइंग डिफेंस, स्पेस एंड सिक्योरिटी के प्रेसिडेंट और CEO टेड कोलबर्ट ने इसे स्पेस रिसर्च के नए युग की शानदार शुरुआत बताया था।

इस मिशन का मुख्य उद्देश्य स्पेसक्राफ्ट की एस्ट्रोनॉट्स को स्पेस स्टेशन तक ले जाकर वापस लाने की क्षमता साबित करना था। एस्ट्रोनॉट्स को स्पेस स्टेशन पर 8 दिन में रिसर्च और कई एक्सपेरिमेंट भी करने थे। सुनीता और विलमोर पहले एस्ट्रोनॉट्स हैं जो एटलस-वी रॉकेट के जरिए स्पेस ट्रैवेल पर भेजे गए। इस मिशन के दौरान उन्हें स्पेसक्राफ्ट को मैन्युअली भी उड़ाना था। फ्लाइट टेस्ट से जुड़े कई तरह के ऑब्जेक्टिव भी पूरे करने थे।

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