जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव को लेकर नेशनल कॉफ्रेंस और कांग्रेस गठबंधन के कैंडिडेट्स की आज (23 अगस्त) पहली लिस्ट जारी हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक, पहली लिस्ट में नेशनल कॉफ्रेंस के 13 से 17 और कांग्रेस के 7 से 10 कैंडिडेट के नामों की घोषणा हो सकती है।
नेशनल कॉफ्रेंस चीफ फारूक अब्दुल्ला ने गुरुवार को राहुल गांधी से मुलाकात के बाद कांग्रेस के साथ गठबंधन का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि राज्य की सभी 90 सीटों पर दोनों दल एक साथ विधानसभा चुनाव लड़ेंगे।
NC उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने कहा- ज्यादातर सीटों पर गठबंधन फाइनल हो चुका है, जबकि कुछ सीटों पर सहमति बननी बाकी है। दोनों ही पार्टी कुछ सीटों पर अड़ी है। सीटों के बंटवारे को लेकर आज अंतिम दौर की बैठक होगी।
राहुल बोले- गठबंधन तभी होगा जब कांग्रेस कार्यकर्ताओं को इज्जत मिलेगी
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी 21 अगस्त की शाम श्रीनगर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ गठबंधन और सीट बंटवारे को लेकर मीटिंग की। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस ने कश्मीर में 12 सीटें मांगी हैं।
राहुल गांधी ने गुरुवार को कार्यकर्ताओं से कहा कि जम्मू-कश्मीर चुनाव में गठबंधन तभी होगा जब कांग्रेस के सभी कार्यकर्ताओं को इज्जत मिलेगी। लोकसभा चुनाव में हमने पीएम मोदी का कॉन्फिडेंस तोड़ दिया है। अब उनकी छाती 56 इंच की नहीं रही। वे कंधे झुकाकर चलते हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि अगर हम जम्मू-कश्मीर चुनाव जीतेंगे तो सारा हिंदुस्तान हमारे कब्जे में आएगा।
जम्मू और कश्मीर में 90 विधानसभा सीटें
जम्मू-कश्मीर परिसीमन आयोग ने 5 मई 2022 को अपनी रिपोर्ट पेश की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, जम्मू और कश्मीर में 90 विधानसभा सीटें और 5 संसदीय सीटें यानी लोकसभा सीटें होंगी। डिवीजन की नजर से देखें तो जम्मू डिवीजन में 6 सीटें बढ़ाकर 43 विधानसभा सीटें की गई हैं और कश्मीर घाटी में 1 सीट जोड़कर 47 सीटें बनाईं गईं।
जम्मू डिवीजन के सांबा जिले में रामगढ़, कठुआ में जसरोता, राजौरी में थन्नामंडी, किश्तवाड़ में पड्डेर-नागसेनी, डोडा में डोडा पश्चिम और उधमपुर में रामनगर सीट जोड़ी गईं। वहीं, कश्मीर घाटी में कुपवाड़ा जिले में त्रेहगाम नई सीट शामिल की गई। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में लोकसभा की 5 सीटें बनाईं गईं, जो बारामूला, श्रीनगर, अनंतनाग-राजौरी, उधमपुर और जम्मू हैं।
2014 में हुए थे आखिरी विधानसभा चुनाव
आखिरी बार 2014 में जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनाव हुए थे। तब BJP और PDP ने गठबंधन सरकार बनाई थी। 2018 में गठबंधन टूटने के बाद सरकार गिर गई थी। इसके बाद राज्य में 6 महीने तक राज्यपाल शासन (उस समय जम्मू-कश्मीर संविधान के अनुसार) रहा। इसके बाद राष्ट्रपति शासन लागू हो गया।
राष्ट्रपति शासन के बीच ही 2019 के लोकसभा चुनाव हुए, जिसमें BJP भारी बहुमत के साथ केंद्र में लौटी। इसके बाद 5 अगस्त 2019 को BJP सरकार ने आर्टिकल-370 खत्म करके राज्य को दो केंद्र-शासित प्रदेशों (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख) में बांट दिया था। इस तरह जम्मू-कश्मीर में 10 साल बाद विधानसभा चुनाव हो रहे हैं।
