बांग्लादेश की टॉप वकील बोलीं- मेरे बाल काटे, पिटाई की:भीड़ ने पेंसिल चुभोई, कहा- शेख हसीना के साथ भारत क्यों नहीं गई
‘मैंने टीवी पर देखा कि शेख हसीना देश छोड़कर चली गई हैं। मैं न्यूज देख रही थी कि बाहर क्या चल रहा है। तभी मेरे बेडरूम में दो लड़के घुस आए। मैं घबरा गई कि मेरे बेडरूम तक कोई कैसे पहुंच गया। उन लड़कों ने मुझसे कहा कि मैं भारत क्यों नहीं गई। मेरे बाल काट दिए, पैरों में पेंसिल की नोक चुभोई। मुझे नहीं पता दोनों कौन थे। देखने में बच्चों की तरह लग रहे थे।’
तुरीन अफरोज बांग्लादेश के बड़े वकीलों में शामिल हैं। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सपोर्टर रही हैं। दिल्ली में पढ़ाई की है। इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल में सरकार की तरफ से पैरवी करते हुए 46 वॉर क्रिमिनल को फांसी की सजा दिलाई। इस वजह से कट्टरपंथियों के निशाने पर रही हैं। उन पर 11 बार अटैक हो चुका है।
5 अगस्त को शेख हसीना बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गईं, उस दिन भी तुरीन अफरोज को टारगेट किया गया। दैनिक भास्कर ने इस घटना पर उनसे बात की। पढ़िए पूरा इंटरव्यू।
सवाल: 5 अगस्त को आपके साथ क्या हुआ था?
जवाब: मुझे मीडिया से पता चला कि शेख हसीना देश छोड़कर चली गई हैं। मैं घर पर टीवी देख रही थी। शाम के 7 बजे थे। बाहर से नारेबाजी और प्रदर्शन का शोर आ रहा था। रैलियां निकल रही थीं। मैंने अपने स्टाफ को फोन करके कहा कि अगर कोई अटैक करे या कुछ कहे, तो जवाब मत देना, चुप रहना, माहौल ठीक नहीं है।
मेरे साथ मेरी बेटी और एक सर्वेंट रहती है। वे घर में ही थीं। तभी अचानक मेरे बेडरूम में दो लड़के घुस आए। उनकी उम्र 18 से 25 साल के बीच होगी। एक लड़का बोला- ‘मैडम आपके साथ बात कर सकते हैं।’
मैंने उनसे कहा ‘बताओ क्या कहना है।’ इसके बाद तो उनकी टोन ही बदल गई। दोनों कुर्सी खींचकर बैठ गए और बोले- ‘तुम हिजाब क्यों नहीं पहनती हो।’
मैं शांत रही। मैंने उनसे कहा- ‘हां, हिजाब तो मुझे पहनना ही चाहिए, मेरी उमर भी हो गई है।’
फिर वे बोले- ‘इस उम्र में भी तुम ऐसे घूमती हो, लगता है कि सेक्स वर्कर है। तुमने बहुत गलती की है। इस्लामिक स्कॉलर के खिलाफ पैरवी की, गलत किया है तुमने। शेख हसीना की सरकार ने उन्हें फांसी दे दी। तुमने सबसे आगे बढ़कर पैरवी की है, शर्म नहीं आती क्या।’
मैंने कहा- ‘हां, मैंने ये किया है। बताओ बेटा, अब क्या करूं मैं।’
लड़कों ने कहा कि तुम अभी फेसबुक लाइव पर जाओगी। हम एक पेपर देंगे, वो पढ़ना है। पेपर में लिखा होगा कि मैंने जो केस लड़े, सब झूठे मामले थे। मैं देश से माफी मांगती हूं।
यहीं टेबल पर मेरी दवा और कैंची रखी थी। एक लड़के ने कैंची उठा ली और मेरे बाल काटने लगा।
वो बोला, ‘तुम देश छोड़कर क्यों नहीं गई हो। तुम्हारी मम्मी शेख हसीना तो चली गईं।’
सवाल: क्या उन लड़कों ने आपको फिजिकली टॉर्चर किया?
जवाब: टेबल पर एक पेंसिल रखी थी। उसे वो मेरे पैर में चुभोने लगा। मैंने उनसे कहा कि मैं डायबिटिक पेशेंट हूं। मुझे मत मारो। वे बोले- अभी तो तुम्हें देश में ही रहना है। कहां भागना है। पैरों को कुछ दिन के लिए आराम दो।
दो लड़के मेरे कमरे में घुसे थे, लेकिन वे 8 लोग थे। करीब एक घंटे पहले भी कुछ लड़के आए थे। उन्होंने कहा कि प्रोटेस्ट में शामिल लड़कों की CCTV फुटेज चाहिए। दोनों लड़के पहले ही CCTV कैमरे की हार्ड डिस्क ले जाना चाहते थे। उस वक्त हर तरफ लूट हो रही थी, कुछ खतरा न हो, इसलिए मेरे मैनेजर ने उन्हें हार्ड डिस्क दे दी।
सवाल: वे कौन लोग थे, क्या किसी खास संगठन से थे?
जवाब: ये कहना मुश्किल है कि वे कौन थे। देखने में तो जमात जैसे नहीं दिख रहे थे। जींस-टीशर्ट पहनकर आए थे, लेकिन हमें समझना होगा कि जमात के लोग भी अब मॉडर्न हो गए हैं।
सवाल: क्या आपके ऊपर हुए अटैक के पीछे जमात का हाथ है?
जवाब: मैं ये नहीं बोल सकती। इसके पीछे कोई भी हो सकता है। देश में जैसे हालात हैं, उसका फायदा कोई भी उठा सकता है।
सवाल: क्या आप जमात जैसे कट्टरपंथी संगठनों को फिर से उभरते देख रही हैं?
जवाब: जब तक सिचुएशन सेटल नहीं होते, तब तक कुछ भी कहना मुश्किल है। अभी तो पता ही नहीं है कि किसका राज चल रहा है। आर्मी का है या अंतरिम सरकार का है या पॉलिटिकल पार्टियां कंट्रोल कर रही हैं। पुलिस तो है ही नहीं। इस स्थिति का फायदा कोई न कोई तो लेगा।
सवाल: आपको क्यों टारगेट किया गया?
जवाब: मैं पॉलिटिक्स में एक्टिव नहीं हूं, लेकिन अवामी लीग की समर्थक जरूर हूं। मैं एक्टिविस्ट भी रही हूं। बांग्लादेश में वॉर क्रिमिनल के खिलाफ रही हूं। अवामी लीग में शामिल होने के बाद मैंने 20 सबसे अहम केस पर काम किया। मेरी वजह से 46 वॉर क्रिमिनल को फांसी की सजा हुई।
हसीना सरकार जिस वजह से भी ये सब कर रही थी, लेकिन मेरे लिए ये बदला नहीं, बल्कि काम था। लगता है कि वे लड़के सोचते थे कि ये सब मैंने किया है। मैं वकील हूं, जज नहीं। मैं फैसला नहीं करती, मैं सिर्फ जिरह करती हूं। मेरे बांग्लादेश लिबरेशन वॉर से जुड़े हुए होने की वजह से लोगों के मन में गुस्सा है।
सवाल: आप जैसे लाखों सपोर्टर्स को छोड़कर शेख हसीना देश से चली गईं, आपको नहीं लगता कि उन्हें इस्तीफा देकर यहीं रहना था?
जवाब: ये उनका राजनीतिक फैसला था। मैं नहीं कह सकती कि उन्होंने ऐसा क्यों किया। अभी जो हो रहा है, उसकी वजह से अवामी लीग के कार्यकर्ताओं की हालत खराब है। उन पर अटैक हो रहे हैं।
खासतौर पर हिंदू टारगेट पर हैं। लूट, आगजनी, रेप हो रहे हैं। मेरा भी एक घर जला दिया गया, मेरी प्रॉपर्टी जला दी। मैं हिंदू समुदाय के जिन लोगों के साथ काम करती हूं, वो सब फोन करके बोल रहे हैं कि लड़कियों को कहां भेज दें। ऐसे तो हालात हैं।
सवाल: बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के बारे में आप क्या सोचती हैं?
जवाब: उनकी नीयत क्या है, ये नहीं बता सकती। मैं नई सरकार में शामिल सभी एडवाइजर्स को जानती हूं। उनका इरादा क्या है, इस पर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा। एक वकील और नागरिक होने के नाते मेरी अपील है कि सरकार जो भी करे, संविधान के दायरे में रहकर करे। ये नहीं होना चाहिए कि सत्ता बदलने के बाद हमारा ही नुकसान हो।
सवाल: कहा जा रहा है कि बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन इस्लामिक टेकओवर है, क्या इस बात में कोई दम है?
जवाब: अगर लोग ऐसा सोच रहे हैं, तो इसके पीछे कोई तो आधार है। आपको 1971 की जंग के इतिहास में जाना होगा। बांग्लादेश के जन्म के साथ द्विराष्ट्र सिद्धांत की धज्जियां उड़ गईं। बांग्लादेश के जन्म के साथ धर्मनिरपेक्षता की जीत हुई। 1975 में शेख मुजीब की हत्या कर दी गई।
बांग्लादेश के इतिहास में इस्लामिक ग्रुप कभी सत्ता में नहीं आ सके। यहां जमात के लोग जरूर हैं, लेकिन उन्हें वोट नहीं मिलते। अब इस्लामिक संगठनों के लोग सड़कों पर हैं। कह रहे हैं कि हम सरकार बनाएंगे। पहले से एक अंतरिम सरकार बन चुकी है, तो ये क्यों बोल रहे हैं कि हम अलग सरकार बनाएंगे।
सवाल: प्रदर्शन के दौरान शेख मुजीबुर्रहमान की मूर्तियां तोड़ी गईं। शेख मुजीबुर्रहमान की इमेज पर हमले को कैसे देखती हैं?
जवाब: मुझे लगता है कि हम इतिहास बनाते हैं। आप इतिहास को इतनी जल्दी नहीं भूल सकते। जो भी पहले हुआ, वो फैक्ट है। आज जो हो रहा है, वो भी 50 साल बाद इसी तरह से देखा जाएगा। अगर आप हमारा इतिहास उठाकर देखें, तो हम किसी एक चीज पर नहीं ठहरते, हम हमेशा नई शुरुआत खोजते रहते हैं।
बांग्लादेश 1971 में बना था। आप बांग्लादेश 2.0 की बात कर रहे हैं, लेकिन कैसे कोई देश इतनी बार जन्म ले सकता है। जरूरी है कि इस तरह के सवालों को सत्ता में बैठे लोगों को साफ करना चाहिए। हालात ये हैं कि पुलिस स्टेशन में काम नहीं हो रहा, लूटमार का दौर जारी है, ये हमेशा नहीं चल सकता।
सवाल: कोटा सिस्टम के विरोध से शुरू हुआ आंदोलन इतना बड़ा कैसे हो गया?
जवाब: शेख हसीना सरकार आंदोलन को बेहतर तरीके से हैंडल कर सकती थी। कई बार आपको लंबा चलने के लिए दो कदम पीछे लेने होते हैं। कई बार आपको अपने अहम को पीछे रखना होता है।
मेरा सवाल है कि शेख हसीना सरकार ने ठीक समय पर बातचीत करके मसला क्यों नहीं सुलझा लिया। शेख हसीना ज्यादातर मांगें मान चुकी थीं, 93% कोटा मेरिट के आधार पर ही हो रहा था। जो प्रदर्शनकारी मांग रहे थे, उन्हें उससे ज्यादा सुना गया।
सवाल: लोगों का कहना है कि शेख हसीना तानाशाह हो गई थीं, आपको क्या लगता है?
जवाब: बांग्लादेश में जो भी सरकार में रहा है, उसके जाने के बाद ऐसी ही बातें ही होती हैं। उन्होंने क्या किया, क्या नहीं किया, किसी को जज करने का ये सही तरीका नहीं है। कोई भी सरकार उम्मीदों पर 100% खरी नहीं उतर सकती।
हो सकता है कि कुछ कमी रही हो। एक-दो महीने पहले बांग्लादेश में सब अवामी लीग में थे। जिससे मिलो वो यही कहता था कि मैं अवामी लीग में इस पोस्ट पर हूं। अब बांग्लादेश में कोई नहीं बोलेगा कि वो अवामी लीग में है। ये तो ट्रेंड रहा है कि सरकार बदलने के साथ लोग कहने लगते हैं कि जो चले गए वो बहुत खराब थे, नए आए हैं वे अच्छे हैं।
सवाल: स्टूडेंट लीडर नाहिद और आसिफ एडवाइजर बने हैं, क्या आप उन्हें जानती हैं, उनके आंदोलन को कैसे देखती हैं?
जवाब: मैं उन्हें नहीं जानती। दोनों को मीडिया पर ही देखा है। स्टूडेंट्स से कहूंगी कि हमारी उम्र हो गई है, हम जाने वाले हैं, लेकिन ये आपका बांग्लादेश है। आप सोचो कि इसे कैसे एकजुट रखोगे। देश में कोई भेदभाव ना हो, ये कोशिश करना चाहिए।
सवाल: होम अफेयर्स एडवाइजर एम. सखावत हुसैन ने कहा कि हम शेख हसीना के खिलाफ केस चलाएंगे। आप वकील हैं, क्या ऐसा हो सकता है?
जवाब: अगर सबूत हैं कि किसी के साथ गलत हुआ है। इसके गवाह हैं, तब कोई भी कानून से बड़ा नहीं है। शेख हसीना ने कुछ गलत किया है, तो सरकार को उनके खिलाफ ट्रायल चलाना चाहिए। हालांकि, किसी को परेशान करने के लिए लीगल प्रोसेस करना गलत होगा।
सवाल: एम. सखावत हुसैन ने कहा है कि हिंसा की जांच में यूनाइडेट नेशंस को शामिल करेंगे?
जवाब: हम UN चार्टर का हिस्सा हैं। शेख हसीना ने भी कहा था कि जो भी जांच में शामिल होना चाहे, उसका स्वागत है। मैं जितना समझती हूं, UN का जांच में शामिल होना मुश्किल है। UN चार्टर का आर्टिकल 21 कहता है कि यूनाइडेट नेशंस किसी देश के अंदरूनी मामलों में दखल नहीं दे सकता।
सवाल: भारत-बांग्लादेश के रिश्तों के नजरिए से इस हिंसा को आप कैसे देखती हैं?
जवाब: सरकार के चीफ एडवाइजर ने शपथ लेने से पहले कहा था कि भारत और म्यांमार ने कुछ किया तो हम सख्ती बरतेंगे। मैं समझती हूं कि न सिर्फ भारत-बांग्लादेश, साउथ एशिया में हमें सभी देशों के बीच शांति की जरूरत है। बस पाकिस्तान के साथ प्रॉब्लम है। उसके साथ हमारी डिप्लोमैटिक रिलेशनशिप तो है, लेकिन दोस्ती जैसी बात नहीं रहती।
भारत के साथ हमारा रिश्ता बहुत पुराना है। चाहे आजादी की लड़ाई में मदद करना हो या रिफ्यूजी को शरण देने का मामला, भारत ने हमारे लिए परेशानी झेली है। आज लोगों के लिए इस इतिहास को भूल जाना आसान है। हमारी पीढ़ी इस मामले में फेल हो गई कि हम नई जनरेशन को उस इतिहास की अहमियत नहीं समझा पाए।
सवाल: बांग्लादेश के फ्यूचर को कैसे देखती हैं, अंतरिम सरकार कब तक रहने की उम्मीद है?
जवाब: स्टूडेंट्स की डिमांड है कि कम से कम तीन साल तो ये सरकार रहे। 6 साल भी रह सकती है। वे नया बांग्लादेश बनाने वाले हैं। ये आइडिया बहुत अच्छा है। यंग जनरेशन और अच्छे लोग पॉलिटिक्स में आएंगे, लेकिन ये अच्छे लोग कहां हैं। बाहर क्यों नहीं आ रहे हैं।
अभी तो पूरे देश में हालात अच्छे नहीं हैं। जब ये हालात खत्म होंगे, तब हम कह पाएंगे कि बांग्लादेश का भविष्य क्या हो सकता है।
सवाल: भारत के लोगों के लिए क्या मैसेज देना चाहती हैं?
जवाब: मैं भारत में रहने वाले अपने दोस्तों की शुक्रगुजार हूं। उन्होंने मुझे इतना सपोर्ट किया। मुझे हिम्मत दी। दूसरी बात है कि भारत-बांग्लादेश की रिलेशनशिप सिर्फ सरकारों के बीच नहीं है। हमारे टीचर्स, आर्टिस्ट, स्टूडेंट्स, मीडिया सभी एक-दूसरे से जुड़े हैं। मैं कहना चाहती हूं कि हमारा भविष्य अच्छा है।
प्रधानमंत्री मोदी पहली बार बांग्लादेश आए थे तो उन्होंने कहा था कि बांग्लादेश में अगर सूरज उगता है, तो हमें लगता है कि ये कभी न कभी भारत के ऊपर आएगा। इसीलिए मैं सोचती हूं कि इस मुश्किल वक्त ने दोनों देशों के बीच बहुत सी गलतफहमियां पैदा कर दी हैं। शेख हसीना के जाने के बाद भारत पर भी बहुत प्रेशर है। कई मसले हैं, लेकिन मैं सोचती हूं कि दोनों देश दोस्त बने रहें।
