भीड़ ने होटल जलाया, 25 लोग जिंदा जल गए:बचने के लिए चौथी मंजिल से कूदे, टूटे हाथ-पैर लेकर बांग्लादेश से लौटे भारतीय
‘बांग्लादेश में हालात बहुत खराब हैं। हर जगह लूटपाट हो रही है। जेसोर के जिस जाबिर इंटरनेशनल होटल में हम रुके थे, वहां भीड़ ने आग लगा दी। मेरे साथ भाई भी था। भाई ने होटल की चौथी मंजिल से छलांग लगा दी। उसका पैर टूट गया है। हम किसी तरह जान बचाकर भागे हैं।’
बिजनेस के सिलसिले में रजिउल बांग्लादेश गए थे, लेकिन वहां हुई सियासी उठापटक के बीच हिंसा में फंस गए। 5 अगस्त को बांग्लादेश में शेख हसीना के सत्ता छोड़ने के बाद देशभर में जगह-जगह हिंसा हुई। शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के नेताओं और उनके समर्थकों को निशाना बनाया जा रहा है।
6 अगस्त को अवामी लीग के 29 नेताओं और उनके परिवार के लोगों के शव मिले। उनके घरों में लूटपाट करके आग लगा दी गई।
रजिउल उन 65 लोगों में से हैं, जो बांग्लादेश से जान बचाकर बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल के बनगांव पहुंचे है। बचकर लौटे लोगों में कई जख्मी हैं। किसी का पैर टूटा है, तो किसी का हाथ। इनमें भारतीयों के साथ-साथ बांग्लादेशी नागरिक भी हैं, जिन्होंने बिजनेस वीजा पर भारत में शरण ली है।
बांग्लादेश में हिंदू आबादी शेख हसीना के समर्थक रही है। लिहाजा, यहां हिंसा में हिंदू परिवारों और मंदिरों को भी निशाना बनाया गया। दैनिक भास्कर ने बांग्लादेश से भारत पहुंचे लोगों से बात की। उनसे जाना कि सियासी बदलाव के वक्त उन्हें किन मुश्किलों से गुजरना पड़ा।
जान बचाने के लिए होटल की खिड़की से कूदे, हाथ-पैर टूटे
बांग्लादेश बॉर्डर पर बनगांव में हमारी मुलाकात रजिउल इस्लाम से हुई। रजिउल असम के रहने वाले हैं। वे बांग्लादेश के जेसोर से लौटे हैं। 5 अगस्त की शाम जेसोर में भीड़ ने जाबिर इंटरनेशनल होटल में आग लगा दी थी। ये फाइव स्टार होटल अवामी लीग के जनरल सेक्रेटरी और MP शाहीन चकलादार का था। हादसे में 25 लोग मारे गए। वहीं 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए।
घटना के वक्त होटल में कई भारतीय भी थे। रजिउल बताते हैं, ‘मैं बिजनेस के सिलसिले में बांग्लादेश गया था। मैं टायर एक्सपोर्ट का काम करता हूं। हादसे के दिन होटल में ही था। मेरे साथ मेरा भाई भी था। शाम 4 बजे के आसपास भीड़ ने होटल में आग लगा दी। घबराकर मेरा भाई होटल की चौथी मंजिल से कूद गया। उसका पैर टूट गया है।’
यहीं हमारी मुलाकात असम के रहने वाले शाहिद अर्जित से भी हुई। उनके हाथ-पैर टूटे हुए हैं। वे एंबुलेंस में बनगांव बॉर्डर पहुंचे थे। 5 अगस्त को शाहिद भी जेसोर के होटल में रुके थे। वे बताते हैं, ‘होटल में आग लगाई गई, तब मैं अपने कमरे में ही था। लोगों के चिल्लाने की आवाज आ रही थी। सभी ने अपना कमरा बंद कर लिया था। होटल की खिड़की से मुझे धुआं निकलता दिखा।’
शाहिद बताते हैं, ‘लोग जान बचाने के लिए खिड़की और बालकनी से नीचे कूद रहे थे। मेरे साथ मेरा छोटा भाई भी था। हम दोनों तीसरी मंजिल से कूद गए। इसके बाद हमें जख्मी हालत में जेसोर के लोकल हॉस्पिटल ले जाया गया। मेरे दोनों पैर टूट गए हैं। भाई की कमर पर चोट आई है। अब हम इलाज के लिए कोलकाता जा रहे हैं।’
विरोधी पार्टी का डर, बांग्लादेशी नागरिक भारत आए
भारतीयों के साथ ही बांग्लादेशी नागरिक गियाज भी भारत पहुंचे हैं। वे पेशे से व्यापारी हैं और शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग से जुड़े हैं। वे बिजनेस वीजा पर भारत आए हैं। गियाज बताते हैं, ‘बांग्लादेश में आंदोलन के बाद से हिंसा हो रही है। प्रदर्शनकारियों को जहां भी शेख हसीना के समर्थक दिखाई दे रहे हैं, उन पर हमला किया जा रहा है। उन्हें जान से मारा जा रहा है।’
वे आगे कहते हैं, ‘मैं किसी तरह बचकर भारत आया हूं। अगर वहां रहता तो बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के लोग मुझे मार देते।’
गियाज भी आगजनी की घटना के वक्त जाबिर होटल में ही थे। वे बताते हैं, ’मैं कल (5 अगस्त) रातभर होटल के गार्डन में छिपा बैठा था। आज (6 अगस्त) सुबह होते ही बंगाल भाग आया।’
गियाज घटना का वक्त याद करते हुए बताते हैं, ‘शाम को होटल में आग लगाई गई। भीड़ बहुत आक्रामक हो चुकी थी। मौके पर पुलिस या आर्मी नहीं थी। मैं होटल के नीचे ही था, इसलिए बच गया। आग लगते ही पूरे होटल में धुआं भरने लगा था।’
‘लोग जान बचाने के लिए छत, खिड़की और बालकनी जहां भी जगह मिली, वहां से छलांग लगा रहे थे। कई लोगों की चोट लगने से मौत हो गई। बिना बालकनी वाले कमरों या बार में जो थे, उनकी झुलसने या दम घुटने से मौत हो गई। वे लोग समय से बाहर नहीं निकल पाए।’
हिंदुओं और मंदिरों को भी निशाना बनाया जा रहा
पार्टी दफ्तरों और कार्यकर्ताओं के घरों के अलावा भीड़ हिंदुओं को भी निशाना बना रही है। उनके घरों में तोड़फोड़-आगजनी की जा रही है। साथ ही मंदिरों को भी नुकसान पहुंचाया जा रहा।
जेसोर में रहने वाले एक हिंदू परिवार ने पहचान जाहिर न करते हुए बताया, ‘6 अगस्त को हमारे घर को निशाना बनाया गया। 15-20 लोगों की भीड़ हमारे घर में घुस आई।’
‘हमारा परिवार तब पड़ोसी के घर में छिप गया। हमने घर के अंदर खिड़की से सब कुछ देखा। करीब 10 लोगों ने मेरे घर का मेन गेट तोड़ने की कोशिश की। बाद में उन्होंने ईंट से खिड़की का शीशा तोड़ दिया।’
वह आगे कहते हैं, ‘ये लोकल लोग हैं, जो हिंसा फैला रहे हैं। इन्हें इलाके में रहने वालों की जानकारी है। ये वही अपराधी हैं, जिन्होंने अपने बयान में 500 स्टूडेंट्स के मारे जाने का जिक्र किया है, लेकिन उन्होंने ये नहीं बताया कि हिंसक भीड़ ने हिंदुओं पर हमला किया। उन्हें बेरहमी से मार डाला। उन्हें लूटा गया और उन पर अत्याचार किया गया।’
ढाकेश्वरी मंदिर की सुरक्षा बढ़ाई गई, 4 गार्ड तैनात
लगातार हिंसा और हमले की घटनाओं के बीच ढाकेश्वरी मंदिर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। चार सिक्योरिटी गार्ड मंदिर की सुरक्षा में तैनात हैं। सिक्योरिटी गार्ड कायुम बताते हैं, ‘मैं इस मंदिर की देख-रेख कर रहा हूं। जो पूजा करने आ रहे हैं, केवल उन्हीं को मंदिर में जाने की इजाजत दी जा रही है। उसके अलावा किसी की भी एंट्री मना है।’
वहीं, जेसोर की कानून व्यवस्था के संबंध में यहां के पुलिस अधीक्षक मसूद आलम ने ढाका ट्रिब्यून से कहा कि घबराने की कोई बात नहीं है। ऐसे हमले को रोकने के लिए पुलिस अलर्ट पर है। पुलिस ने समाज के सदस्यों के साथ मिलकर कानून-व्यवस्था को ठीक करने के लिए काम शुरू कर दिया है।
अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों को लेकर हमने हिंदू, बौद्ध, ईसाई ओइक्या परिषद के महासचिव राणा दासगुप्ता से बात की। वे बताते हैं, ‘भीड़ के निशाने पर सिर्फ सरकारी संस्थाएं और मुक्ति संग्राम की उपलब्धियां ही नहीं, बल्कि अल्पसंख्यक भी हैं। अल्पसंख्यकों पर हमले सिर्फ 5 अगस्त को सियासी बदलाव के बाद ही नहीं हुए। 4 अगस्त को देश के कम से कम पांच जिलों में अल्पसंख्यक प्रभावित हुए।’
‘हालांकि, अब तक हत्या की कोई घटना सामने नहीं आई है। मठ-मंदिरों, खासकर अल्पसंख्यकों के मकान और दुकानों पर हमले और लूटपाट की जा रही है। कई जगहों पर अल्पसंख्यकों को जाने से रोका जा रहा है। उनकी जमीन पर कब्जा किया जा रहा है।’
राष्ट्रपति से लेकर BNP महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने भी लोगों से किसी भी तरह की हिंसा से बचने की अपील की। सत्ता परिवर्तन से पहले ही कोटा सुधार आंदोलन के एक कोऑर्डिनेटर ने सभी को अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने को कहा था, लेकिन हम देखते हैं इसका कोई असर नहीं हुआ।’
‘मुझे डर है कि अल्पसंख्यकों के बीच पलायन में तेजी आ सकती है। अगर यही हालात बने रहे तो ये बांग्लादेश और पड़ोसी किसी भी देश के लिए अच्छा नहीं होगा।’
ढाका की सड़कों पर लोग रातभर पहरा दे रहे
राजधानी ढाका की सड़कों पर लोग और वॉलंटरी ऑर्गेनाइजेशन के मेंबर रातभर पहरा दे रहे हैं। बांग्लादेश की कई शहरों की सड़कों पर बुधवार को रातभर ये लोग तैनात रहे। राजधानी ढाका में भी सड़कों से पुलिस नदारद थी। उनकी जगह आम लोग हाथ में डंडे लेकर दिन-रात पहरेदारी करते दिखे। इसके अलावा कुछ इलाकों में सैनिक भी तैनात नजर आए।
दरअसल, बांग्लादेश में हिंसा के बाद से चोरी की वारदात भी बढ़ गई हैं। इसके बाद लोग सोशल मीडिया पर मदद मांग रहे हैं। डेली स्टार के मुताबिक, ढाका के ECB छतर इलाके में चोरी की कोशिश की कई घटनाएं देखने को मिलीं। इस दौरान सैनिकों ने आम नागरिकों की मदद से कई चोरों को हिरासत में भी लिया है।
भारत में घुस रहे 1500 बांग्लादेशियों को BSF ने रोका
बांग्लादेश में हिंसा और राजनीतिक उथल-पुथल के बीच BSF ने भारत में घुसने की कोशिश कर रहे करीब 1500 बांग्लादेशियों को रोका है। इनमें से 1 हजार लोग बिहार और 500 लोग पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी के रास्ते भारत आ रहे थे। घुसपैठ को देखते हुए भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर BSF अलर्ट है।
इधर, मेघालय की सरकार ने बॉर्डर पर लगने वाले बाजारों को बंद रखने का आदेश दिया है। सरकार ने कहा है जब तक हालात स्थिर नहीं हो जाते तब तक ये हाट नहीं लगेंगे।
