देश के लगभग सभी राज्यों में बारिश का दौर जारी है। बिहार में पिछले 24 घंटे के दौरान बिजली गिरने से 8 लोगों की मौत हुई है। गंगा, बागमती और कोसी नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। कटिहार के बरारी में सुखाई घाट से मतलुधार के बीच 5 करोड़ की लागत से बन रहे ब्रिज का पिलर और ब्रिज बॉक्स गंगा में समा गया।
हिमाचल प्रदेश के मंडी के 9 मील के पास देर रात 3 बजे चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे पर लैंडस्लाइड हुआ। मलबे में एक ट्रक और पिकअप फंस गया। दोनों गाड़ियों के ड्राइवर ने भागकर जान बचाई। राज्य में पिछले 24 घंटे के दौरान लगातार तेज बारिश से चंडीगढ़-मनाली हाईवे सहित 214 सड़कें बंद हैं।
मध्य प्रदेश में ओंकारेश्वर डैम के 18 गेट खोल दिए गए हैं। डैम में कुल 23 गेट हैं।
राजस्थान के पाली शहर में 15 गांव डूब गए हैं। अभी तक रेस्क्यू कर करीब 100 लोगों को बचाया गया है। यहां से 100 से ज्यादा लोगों को रेस्क्यू किया गया है। मौसम विभाग ने राज्य के 9 जिलों में अलर्ट जारी किया है। पूरी खबर पढ़ें …
19 राज्यों में भारी बारिश का यलो अलर्ट
मौसम विभाग (IMD) ने गुरुवार (8 अगस्त) को 19 राज्यों में भारी बारिश की बात कही है। हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, ओडिशा, गोवा, कर्नाटक, अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, मिजोरम और नगालैंड में यलो अलर्ट है।
राजस्थान के रेगिस्तान में लूणी नदी का पानी पहुंचा: राजस्थान में पिछले तीन दिन की बारिश के बाद सूखी पड़ी लूणी नदी में पानी भर गया। बुधवार (7 अगस्त) सुबह अजमेर और जोधपुर से होते हुए ये नदी बाड़मेर के रेगिस्तानी इलाके में पहुंची। लोगों ने चुनरी ओढ़ाकर और पूजा-अर्चना कर नदी का स्वागत किया। राजस्थान की गंगा भी कही जाने वाली लूणी नदी अजमेर की नाग पहाड़ी से निकलती है। राज्य के 9 जिलों से होती हुई ये नदी गुजरात पहुंचकर अरब सागर में मिल जाती है।
UP में गंगा घाट डूबे, गांव में मगरमच्छ घुसा: उत्तर प्रदेश के 66 जिलों में बुधवार (7 अगस्त) को कई घंटे लगातार बारिश हुई। मुरादाबाद में रेल ट्रैक पानी में डूब गया। पीलीभीत में सड़क बह गई। बिजनौर के एक गांव में मगरमच्छ घुस गया। प्रयागराज में गंगा का पानी 1200 घरों में भर गया। संगम के लेटे हनुमान मंदिर तक गंगा का पानी पहुंच गया।
वाराणसी में 80 से ज्यादा गंगा घाट डूब गए हैं। प्रसिद्ध अस्सी घाट और सुबह-ए-बनारस घाट भी जलमग्न हो चुके हैं। गंगा आरती हो या अंतिम संस्कार, सब छतों और गलियों पर किए जा रहे हैं। दशाश्वमेध और मणिकर्णिका घाट की एक भी सीढ़ी नहीं दिख रही है।
