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अस्पताल के मालिक पर मानव तस्करी की एफआईआर:दो अडॉप्ट बच्चों के गायब होने का मामला; दमोह पुलिस अरेस्ट करने घर में घुसी

दमोह के सबसे बड़े प्राइवेट हॉस्पिटल के ऑनर डॉ. अजय लाल ह्यूमन ट्रैफिकिंग के केस में फंस गए। पुलिस सोमवार को उन्हें अरेस्ट करने घर में घुस गई, लेकिन डॉ. लाल नहीं मिले। इसके बाद मंगलवार रात करीब 12 बजे डॉ. लाल और उनसे जुड़े कई लोगों पर ह्यूमन ट्रैफिकिंग और जुवेनाइल जस्टिस केयर एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद डॉ. लाल की बेटी ने कहा- यहां माहौल खराब है। हम अमेरिका जाएंगे।

इधर, आरोपी डॉक्टर अजय लाल को हाईकोर्ट ने राहत दी है। कोर्ट ने 9 अगस्त तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।

डॉ. अजय लाल की आधारशिला संस्था के जरिए बाल भवन का संचालन किया जाता था, जिसमें अनाथ बच्चे रहते थे। करीब एक साल पहले राष्ट्रीय बाल आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने दमोह पुलिस को पत्र जारी किया था, जिसमें 18 साल पहले बाल भवन से अडॉप्ट किए गए दो बच्चों को लेकर ह्यूमन ट्रैफिकिंग की आशंका जताई थी। इसके बाद बाल भवन को बंद कर दिया गया।

पुलिस ने डॉक्टर लाल के परिजन को रात भर आधारशिला संस्थान के कैंपस में रोककर रखा।

पूरा मामला समझने से पहले डॉक्टर अजय लाल और उनके परिवार के बारे में जानिए…

डॉ. अजय लाल का नर्सिंग कॉलेज भी है। मिशनरी से जुड़े कई बड़े पद उनके पास हैं। उनकी संस्था का नाम पहले मिड इंडिया क्रिश्चियन मिशन था, अब इसे बदलकर आधारशिला संस्थान कर दिया गया है। बताया जाता है कि लोगों की स्वास्थ्य सेवा के लिए विदेश से उन्हें काफी फंडिंग मिलती है। डॉक्टर पर फंडिंग के माध्यम से धर्मांतरण के आरोप भी लगे हैं।

हाल ही में उनके बेटे अभिजीत लाल और करीबी संजीव लैंबर्ट पर मिशन अस्पताल में काम करने वाले तीन कर्मचारियों ने जबरन धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने के आरोप लगाए थे। कोतवाली पुलिस ने दोनों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। डॉक्टर लाल के बेटे अभिजीत और बेटी अभिनीता ने फॉरेन में शादी की है, दोनों के पास अमेरिका की नागरिकता है।

डॉ. लाल के परिजनों ने पुलिस पर प्रताड़ना का आरोप लगाया है।

पुलिस के पहरे से लापता हो गए डॉक्टर लाल

बुधवार तड़के करीब 4 बजे पुलिस ने लाल के परिजनों की मौजूदगी में पूरे घर की तलाशी ली, लेकिन वह कहीं नहीं मिले। पुलिस ने दरवाजा तोड़ा, लैपटॉप और CCTV का DVR भी जब्त किया है। लाल का घर एक किले की तरह सुरक्षा में रहता है। चारों तरफ पुलिस तैनात थी, लेकिन लाल कहां गए इस पर पुलिस ने चुप्पी साध रखी है। दमोह एसपी श्रुत कीर्ति सोमवंशी और एडिशनल एसपी संदीप मिश्रा से इस मामले में बात करने के लिए फोन लगाया तो उन्होंने रिसीव नहीं किया।

लाल के फरार होने के बाद परिवार को रोका

डॉक्टर अजय लाल के फरार होने के बाद उनकी पत्नी इंदू लाल, बेटे अभिजीत लाल और बेटी अभिनीता अपने अमेरिकी पति के साथ जबलपुर जाने के लिए दमोह वाले घर से निकले। पुलिस ने मारुताल टोल नाका के पास उनकी कार को रोक लिया। डॉक्टर लाल के बारे में पूछताछ की। इस दौरान परिजन और पुलिस के बीच काफी बहस हुई।

लाल की बेटी अभिनीता ने पुलिस पर प्रताड़ित करने के आरोप लगाए। उन्होंने पुलिस से कहा कि आपने मेरे पिता को पहरेदारी में रखा था तो आप ही बताइए वे कहां हैं। हालांकि, पुलिस के पास इसका कोई जवाब नहीं था। पुलिस ने परिवार को रातभर आधारशिला संस्थान के कैंपस में रोक कर रखा। सुबह नोटिस पर साइन करवाकर उन्हें जाने दिया।

परिजन पुलिस के साथ बहस करते नजर आए।

लाल के बेटे ने कहा- सेवा करने की मिल रही सजा

डॉ. अजय लाल के बेटे अभिजीत ने कहा, लोगों की सेवा करने की सजा मिल रही है। मेरे पिता अपना पूरा जीवन दमोह के लिए समर्पित कर चुके हैं। पिता पर एफआईआर हुई है। जबलपुर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के वकीलों से बात करूंगा। पुलिस हमसे पूछ रही है कि पिता कहां हैं, जबकि पुलिस ने ही उन्हें नजरबंद कर रखा था। वह भी बिना कोई नोटिस दिए।

बेटी अभिनीता ने कहा कि हम दमोह को अपना घर मानते हैं। हमारे पिता यहां लोगों की मदद करते हैं। अब उन्हें झूठे मामलों में फंसाया जा रहा है। हम फॉरेनर हैं और यहां अपने परिवार से मिलने आते हैं। अब माहौल खराब हो गया है, इसलिए वापस अपने देश जा रहे हैं।

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