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अयोध्या गैंगरेप का आरोपी सपा नेता 50 करोड़ का मालिक:दूसरी तक पढ़ा, राजनीति में आकर अवैध धंधे फैलाए, दंगे का आरोपी रहा

ग्राउंड रिपोर्ट

अयोध्या गैंगरेप का आरोपी सपा नेता 50 करोड़ का मालिक:दूसरी तक पढ़ा, राजनीति में आकर अवैध धंधे फैलाए, दंगे का आरोपी रहा

अयोध्या7 मिनट पहलेलेखक: सौरभ चंद्र शुक्ला

अयोध्या रेपकांड के मुख्य आरोपी सपा नेता मोईद खान के पक्ष में अखिलेश यादव भले ही नजर आ रहे हो। मगर योगी सरकार उसकी नामी-बेनामी प्रॉपर्टी की जांच शुरू कर चुकी है। सवाल उठ रहा है कि मदरसे से दूसरी क्लास तक पढ़ा मोईद खान आखिर बीते 15 सालों में 50 करोड़ से ज्यादा की प्रॉपर्टी का मालिक कैसे बन गया।

ADM प्रशासन अनिरुद्ध प्रताप सिंह के मुताबिक, शुरुआत में मोईद खान की 1 करोड़ की जमीन को चिह्नित किया गया है। उसकी बेकरी तालाब की जमीन पर 3000 स्क्वायर फीट में बनी थी, जिसको तोड़ा गया है। 48 घंटे में अयोध्या और आस-पास के कई लोग शिकायत लेकर आए हैं कि उनकी जमीन पर मोईद खान ने जबरन कब्जा किया है। इनकी जांच चल रही है।

यह भी सामने आया है कि मोईद खान 2012 में हुए भदरसा दंगे का आरोपी रह चुका है। एक समय कांग्रेस के लिए चुनाव कैंपेन करने वाला मोईद 2012 से सपा का नगर अध्यक्ष है। 2012 से उसका पॉलिटिकल रसूख और आर्थिक साम्राज्य बढ़ता ही चला गया।

इस हकीकत को और करीब से समझने के लिए दैनिक भास्कर टीम मोईन खान के घर पहुंची…

यह मोईद खान का घर है। 2 मंजिला इस घर में उसका परिवार रहता है।

भदरसा में तंग गलियों से होते हुए हमारी टीम मोईद खान के घर पहुंची। जैसे-जैसे हम गली में आगे बढ़ रहे थे, सन्नाटे का एहसास बढ़ता जा रहा था। मोईद का घर कौन सा है। इस सवाल पर एक दरवाजा खुला। महिला ने एक 2 मंजिला आलीशान घर की तरफ हाथ से इशारा किया और दरवाजा बंद कर दिया।

हम उस घर तक पहुंचे। दरवाजे की डोर बेल बजाई। एक महिला ने दरवाजा आधा खोला। हमने पूछा कि मोईद खान पर कुछ आरोप लगे हैं। क्या वो ठीक है? जवाब मिला- हमें न्याय चाहिए। कोर्ट पर विश्वास है, सरकार पर नहीं। सब बढ़ा-चढ़ाकर दिखा रहे हैं। एक 65-70 साल के बुजुर्ग को फंसा दिया है। ये राजनीतिक षडयंत्र है। इसी बीच पीछे से एक और महिला आईं और दरवाजा बंद कर दिया।

हम इस घर की सीढ़ियां उतर ही पाए थे कि मोहल्ले के कई लोग आ गए। इनमें कुछ लोगों ने हमें तुरंत यहां से चले जाने के लिए कहा। उनके चेहरे पर गुस्सा था। तस्वीर तक खींचने से मना किया। हम उन्हीं गलियों से होते ही बाहर आ गए।

बगल की गली में हमें 70 वर्षीय मोहम्मद असमल मिलते हैं। कुछ देर की बातचीत के बाद उन्होंने कहा- मोईद खान ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं है। मदरसे में दो साल ही गया था। इसके बाद पढ़ाई छोड़कर कारोबार में लग गया। कई कारोबार किए, मगर कुछ चले नहीं। फिर जमीनों का काम करने लगा। उसी में पैसा बनाया, फिर सब बोलने लगे कि वो नेता हो गया है। अभी कुछ दिन पहले पता चला कि उसने एक लड़की के साथ गलत काम किया है।

भदरसा में मोईद खान की बेकरी पर बुलडोजर चलाया गया।

6 साल पहले बेकरी खोली
इस एरिया से निकलकर हम भदरसा मेन बाजार तक आए, जो कि सिर्फ 500 मीटर दूरी पर है। यहीं पर उसकी बेकरी है। मोहम्मद शोएब बताते हैं- करीब 6 साल पहले मोईद खान ने बेकरी शुरू की। कुछ दूरी पर एक और दुकान है, जिसमें वह बेकरी का ही सामान बेचता है। मोईद के 4 बेटे हैं।

बड़े बेटे का नाम जाहिर, नदीम, नफीस और सबसे छोटा बेटा जावेद है। 2 बेटियां भी हैं। पास में रहने वाले शकील अहमद बताते हैं – 3 बेटे मोईद के साथ मिलकर व्यापार करते हैं। बड़ा बेटा दुकान चलाता है। 2 बेटे सेल्समैन का काम करते है। छोटा बेटा अभी पढ़ाई कर रहा है।

यह मेन मार्केट में बनी मोईद खान की बिल्डिंग है। इसी में PNB बैंक की शाखा है।

अब मोईद का पॉलिटिकल करियर भी जानिए…
मोईद खान की पॉलिटिकल एंट्री कैसे हुई? वो सपा सांसद अवधेश प्रसाद का करीबी कैसे हो गया? उसका भदरसा के लोगों पर क्या प्रभाव है? इन्हीं सवालों के साथ हमने अलग-अलग लोगों से बात की। सभी लोगों के साथ एक बात कॉमन थी। कोई भी कैमरे पर बोलने को तैयार नहीं हुआ।

सामने आया कि पढ़ाई छोड़ने के बाद करीब 18 साल की उम्र से मोईद लोकल नेतागिरी करने लगा था। प्रॉपर्टी का काम करते हुए वह कांग्रेस दफ्तर में बैठने लगा। लोग उसको कांग्रेस कार्यकर्ता समझते थे। वह सभाओं में जाता था। लोगों को चुनाव के वक्त कांग्रेस के लिए वोट करने के लिए कहता था।

सपा के जिलाध्यक्ष पारस यादव ने कहा- मोईद खान 2012 से भदरसा के नगर अध्यक्ष हैं। मुस्लिम कम्युनिटी पर उनकी अच्छी पकड़ है। उन पर लगे आरोपों की जांच हो रही है।

भदरसा दंगे में आया था मोईद का नाम
दरअसल, भदरसा में 2012 में दंगा हुआ था, तत्कालीन नगर पंचायत चेयरमैन मोहम्मद अहमद दंगा भड़काने का मुख्य आरोपी थे। उन पर मिट्टी का तेल बंटवाकर दंगे को भड़काने का आरोप था। वर्तमान समय में चेयरमैन मोहम्मद अहमद पुत्र मो रासिद चेयरमैन हैं।

इस केस में मोईद खान भी आरोपी रहा था। लोगों का कहना है कि सपा सरकार थी, इसलिए मोईद को फायदा मिला और केस रफा-दफा हो गया।

रास्ते की जमीन कब्जा कर दुकानें बना डालीं
गैंगरेप के आरोप लगने के बाद लोग खुलकर मोईद के खिलाफ सामने आने लगे हैं। आरोप है कि मोईद खान के टारगेट पर भदरसा और आस-पास की जमीनें थीं। कब्रिस्तान, चकबंदी की सरकारी जमीनें और लोगों की जमीनों पर कब्जा कर उन्हें बेच देता था। छानबीन में सामने आया कि जिस जमीन पर बेकरी चल रही है, वो भी तालाब की जमीन थी। इस पर कब्जा कर निर्माण कराया गया था। इसके अलावा दुकानें भी रास्ते की जमीन का कब्जा कर बनाई गई हैं।

शनिवार को प्रशासन की टीम बुलडोजर लेकर मोईद की मुख्य बाजार वाली बिल्डिंग पर पहुंची। हालांकि, बिल्डिंग तोड़ी नहीं जा सकी। क्योंकि, बिल्डिंग में PNB बैंक चल रही है। प्रशासन ने बैंक को खाली करने के लिए नोटिस दिया है। बिल्डिंग में चल रही सपा नेता की बेकरी को सील कर दिया गया।

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