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जम्मू-कश्मीर के सांबा में पाकिस्तानी घुसपैठिया मारा गया:भारतीय सीमा में घुस रहा था; राजौरी में आतंकी ठिकाने से हथियार बरामद, सर्च ऑपरेशन जारी 2 घंटे पहलेलेखक: रउफ डार जम्मू-कश्मीर में जुलाई महीने में 10 से अधिक आतंकी हमले हुए। – Dainik Bhaskar जम्मू-कश्मीर में जुलाई महीने में 10 से अधिक आतंकी हमले हुए। जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले में भारत-पाक बॉर्डर पर BSF के जवानों ने एक पाकिस्तानी घुसपैठिए को मार गिराया है। BSF के आईजी डीके बूरा ने गुरुवार (1 अगस्त) को बताया कि घुसपैठिए को बुधवार रात करीब 10 बजे खोरा पोस्ट के पास भारतीय इलाके में घुसते देखा गया। BSF जवानों की चेतावनी के बाद भी घुसपैठिया नहीं रुका, जिसके बाद फायरिंग में वह मारा गया। सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि घुसपैठिया भारत-पाक सीमा की जीरो लाइन पार कर रहा था जो बॉर्डर प्रोटोकॉल का उल्लंघन था। घटना को पाकिस्तान की ओर से उकसाने की कोशिश की तरह देखा जा रहा है। घुसपैठिए की पहचान और मकसद का पता नहीं चल पाया है। अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है। इंटेलिजेंस से मिली जानकारी के आधार पर सेना, पुलिस और BSF जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में जॉइंट सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं। इसी दौरान राजौरी जिले के कालाकोट इलाके में एक आतंकी ठिकाने का पता चला है। यहां AK राइफल और अन्य हथियार बरामद हुए हैं। राजौरी के कालाकोट इलाके में सर्च ऑपरेशन के दौरान हथियार और विस्फोटक मिले। राजौरी के कालाकोट इलाके में सर्च ऑपरेशन के दौरान हथियार और विस्फोटक मिले। पुंछ में हिजबुल मुजाहिदीन का आतंकी गिरफ्तार राष्ट्रीय राइफल की रोमियो फोर्स ने मंगलवार (30 जुलाई) को पुंछ जिले में हिजबुल मुजाहिदीन के एक आतंकवादी को गिरफ्तार किया। आतंकी के पास एक विदेशी पिस्तौल भी मिली है। पाकिस्तान में एक्टिव एक व्हाट्सएप नंबर का भी पता लगा है, जिसके जरिए एक हैंडलर मोहम्मद खलील को काम सौंप रहा था। आरोपी पुलिस की हिरासत में है और आगे की जांच की जा रही है। 30 जुलाई को जम्मू-कश्मीर के पुंछ में सेना ने हिजबुल मुजाहिदीन का सक्रिय सहयोगी गिरफ्तार किया था। 30 जुलाई को जम्मू-कश्मीर के पुंछ में सेना ने हिजबुल मुजाहिदीन का सक्रिय सहयोगी गिरफ्तार किया था। 3 दिन पहले कुपवाड़ा में मारा गया था पाकिस्तानी आतंकी जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में शनिवार (27 जुलाई) को माछिल सेक्टर के पास जंगल एरिया में एक पाकिस्तानी आतंकी मारा गया था। एनकाउंटर में राइफलमैन मोहित राठौर शहीद और मेजर समेत 4 जवान घायल हो गए। न्यूज एजेंसी ANI ने रक्षा विभाग के सूत्रों के हवाले से बताया कि पाकिस्तानी बॉर्डर एक्शन टीम (BAT) आतंकियों की घुसपैठ करा रही थी। BAT के साथ SSG कमांडो और पाकिस्तानी सेना के सैनिक आतंकवादी संगठनों के साथ आतंकियों को कश्मीर भेज रहे थे। जम्मू में जैश और लश्कर का 20 साल पुराना नेटवर्क एक्टिव जम्मू रीजन में सेना ने 20 साल पहले पाकिस्तान परस्त आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के जिस लोकल नेटवर्क को सख्ती से निष्क्रिय कर दिया था, वो पूरी ताकत से फिर एक्टिव हो गया है। पहले ये लोग आतंकियों का सामान ढोने का काम करते थे, अब उन्हें गांवों में ही हथियार, गोला बारूद और खाना-पीना दे रहे हैं। बीते दिनों जिन 25 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है, उन्होंने पूछताछ में इसके सुराग दिए हैं। यह नेटवर्क जम्मू के 10 में से नौ जिलों राजौरी, पुंछ, रियासी, ऊधमपुर, कठुआ, डोडा, किश्तवाड़, जम्मू और रामबन में जम चुका है। जम्मू-कश्मीर के पूर्व DGP एसपी वैद्य के मुताबिक, आर्टिकल 370 हटने के बाद से ही पाकिस्तान आर्मी और ISI ने जम्मू को टारगेट करना शुरू कर दिया था। उसने दो साल में इस नेटवर्क को सक्रिय किया। इन्हीं की मदद से आतंकियों ने 2020 में पुंछ और राजौरी में सेना पर बड़े हमले किए। फिर ऊधमपुर, रियासी, डोडा और कठुआ को निशाने पर लिया। 2020 में जम्मू से सेना हटाकर लद्दाख भेजी गई, यही आतंकियों के लिए मौका बना 2020 तक जम्मू रीजन में काफी सुरक्षा बल तैनात था। हालांकि, गलवान एपिसोड के बाद चीनी आक्रामकता का जवाब देने के लिए यहां की सेना को हटाकर लद्दाख भेज दिया गया। आतंकियों ने भारत के इस कदम को मौके के रूप में भुनाया और अपना आधार कश्मीर से जम्मू में शिफ्ट किया। यहां इनका पुराना लोकल नेटवर्क पहले से ही था, जिसे एक्टिव करना था। वही हुआ है। जम्मू में आतंकी घटनाएं सांप्रदायिक रंग भी ले सकती हैं। यहां कश्मीर के मुकाबले जनसंख्या घनत्व कम है और सड़क संपर्क सीमित है। बड़ा इलाका पहाड़ी है, इसलिए आतंकियों को यहां मार गिराने में समय लग रहा है। पूरी खबर पढ़ें..

नई संसद की छत से पानी लीक, नीचे बाल्टी रखी:विपक्ष बोला- संसद के बाहर पेपर लीक और अंदर पानी लीक; लोकसभा सचिवालय बोला- ठीक करा लिया है

नई दिल्ली2 मिनट पहले
कांग्रेस नेता मणिकम टैगाेर समेत कई नेताओं ने वीडियो शेयर किया, जिसमें संसद की छत से पानी टपकता हुआ दिखाई दे रहा है।

एक साल पहले बनकर तैयार हुई नई संसद की छत से पानी लीक होने का एक वीडियो सामने आया है। इसमें दिखाई दे रहा है कि संसद की लॉबी में से पानी गिर रहा है और उसके नीचे एक बाल्टी रखी है जिसमें पानी जमा हो रहा है। यह वीडियो कांग्रेस के मणिकम टैगोर ने शेयर कर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा- संसद के बाहर पेपर लीक और अंदर पानी लीक।

इसे लेकर लोकसभा सेक्रेट्रिएट ने कहा कि ग्रीन संसद की अवधारणा को ध्यान में रखते हुए संसद भवन के कई हिस्सों में कांच के गुंबद (ग्लास डोम) लगाए गए हैं, ताकि नेचुरल लाइट आ सके। इसमें लॉबी भी शामिल है। बुधवार को भारी बारिश के बाद ग्लास डोम को सील करने के लिए लगाया गया पदार्थ हट गया था, जिसके चलते पानी का रिसाव हुआ। हालांकि इसे अब ठीक कर लिया गया है।

बुधवार को नई संसद के मकर द्वार के बाहर बारिश का पानी भर गया।

अखिलेश बोले- इससे तो पुरानी संसद अच्छी थी
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि इस नई संसद से अच्छी तो वो पुरानी संसद थी, जहां पुराने सांसद भी आकर मिल सकते थे। क्यों न फिर से पुरानी संसद चलें, कम से कम तब तक के लिए, जब तक अरबों रुपयों से बनी संसद में पानी टपकने का कार्यक्रम चल रहा है। जनता पूछ रही है कि भाजपा सरकार में बनी हर नई छत से पानी टपकना, उनकी सोच-समझकर बनाई गयी डिजाइन का हिस्सा होता है या फिर…

वहीं सपा के मीडिया सेल ने ट्वीट किया कि भाजपा सरकार में नेता इंजीनियर बन जाते हैं, इंजीनियरों को निर्देश देना शुरू कर देते हैं, काम में दखलंदाजी और आर्किटेक्चर में दखल देते हैं जिसका परिणाम सामने है। नए संसद भवन में पानी टपक रहा है। न पानी निकासी के इंतजाम हैं, न सीवर ड्रेनेज सिस्टम दुरुस्त है। भाजपा सरकार में दिल्ली हो या यूपी दोनों जगह यही हो रहा है।

दिल्ली में बुधवार को एक घंटे में 114 मिमी से ज्यादा बारिश
दिल्ली में बीते कुछ दिनों से बारिश के चलते हालात बेहद खराब हैं। 27 जुलाई को ओल्ड राजेंद्र नगर में बारिश के बाद पानी भरने से राउ कोचिंग इंस्टीट्यूट के बेसमेंट में पानी भर गया। इसमें तीन स्टूडेंट्स की जान चली गई। वहीं, 31 जुलाई को सिर्फ एक घंटे में 114 मिमी बारिश हुई। इसके चलते संसद, सुप्रीम कोर्ट, एम्स, लुटियंस दिल्ली, भारत मंडपम, इंडिया गेट-रिंग रोड टनल, प्रगति मैदान पानी में डूबे रहे।

बुधवार की बारिश के चलते ओल्ड राजेंद्र नगर इलाके में दो-ढाई फीट तक पानी भर गया।

पीएम का ड्रीम प्रोजेक्ट थी नई संसद
नए संसद भवन का उद्धाटन 28 मई, 2023 को हुआ था। प्रधानमंत्री ने 10 दिसंबर 2020 को इसकी आधारशिला रखी थी। नए संसद भवन का निर्माण 15 जनवरी 2021 को शुरू हुआ था। इस बिल्डिंग को पिछले साल नवंबर में पूरा हो जाना था। सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत बनी ये बिल्डिंग प्रधानमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट है। इसे 28 महीने में बनाया गया।

क्यों बनाई गई नई बिल्डिंग
पुराना संसद भवन 97 साल पहले 1927 में बनाया गया था। मार्च 2020 में सरकार ने संसद को बताया था कि पुरानी बिल्डिंग ओवर यूटिलाइज्ड हो चुकी है और खराब हो रही है। इसके साथ ही लोकसभा सीटों के नए सिरे से परिसीमन के बाद जो सीटें बढ़ेंगीं, उनके सांसदों के बैठने के लिए पुरानी बिल्डिंग में पर्याप्त जगह नहीं है। इसी वजह से नई बिल्डिंग बनाई जा रही है।

प्रधानमंत्री ने संसद के उद्घाटन से पहले 30 मार्च को नए संसद भवन का दौरा किया था। वे यहां एक घंटे रुके थे।

4 मंजिला बिल्डिंग, भूकंप का असर नहीं
पुराना संसद भवन 47 हजार 500 वर्गमीटर में है, जबकि नई बिल्डिंग 64 हजार 500 वर्ग मीटर में बनाई गई है। यानी पुराने से नया भवन 17 हजार वर्ग मीटर बड़ा है। नया संसद भवन 4 मंजिला है। इसमें 3 दरवाजे हैं, इन्हें ज्ञान द्वार, शक्ति द्वार और कर्म द्वार नाम दिया गया है। सांसदों और VIPs के लिए अलग एंट्री है। इस पर भूकंप का असर नहीं होगा। इसका डिजाइन HCP डिजाइन, प्लानिंग एंड मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड ने तैयार किया है। इसके आर्किटेक्ट बिमल पटेल हैं।

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का हिस्सा है नई संसद

नई संसद के उद्घाटन का 20 विपक्षी पार्टियों ने बहिष्कार किया
कांग्रेस समेत 20 विपक्षी पार्टियों ने उद्घाटन समारोह के बहिष्कार किया था। विपक्ष का कहना था कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को दरकिनार कर प्रधानमंत्री से इसका इनॉगरेशन कराने का निर्णय न केवल गंभीर अपमान है, बल्कि यह लोकतंत्र पर भी सीधा हमला है। वहीं, भाजपा समेत 25 पार्टियां उद्घाटन समारोह में शामिल हुईं।

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