जम्मू-कश्मीर में एनकाउंटर, 24 घंटे में दूसरा जवान शहीद:कुपवाड़ा में एक आतंकी भी ढेर, यहां कल 3 आतंकियों के घुसपैठ की सूचना मिली थी
जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा के कोवुत इलाके में बुधवार सुबह सेना-आतंकियों के बीच गोलीबारी में एक और जवान शहीद हो गया है। नॉन कमीशंड ऑफिसर दिलावर सिंह अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। एनकाउंटर में सेना ने एक आतंकी को मार गिराया है। इससे पहले मंगलवार को पुंछ में एनकाउंटर हुआ था, जिसमें लांस नायक सुभाष कुमार शहीद हुए थे।
सेना ने बताया कि उन्हें कोवुत में मंगलवार को 2-3 आतंकियों के मूवमेंट की सूचना मिली थी। सर्च ऑपरेशन के दौरान आतंकियों ने फायरिंग की, जिसके बाद एनकाउंटर शुरू हुआ। देर रात दिलावर सिंह को गोली लगी थी। एनकाउंटर में आज सुबह जवानों ने एक आतंकी को मार गिराया।
जुलाई 2024 में अब तक जम्मू-कश्मीर में 8 बड़े आतंकी हमले हुए हैं। इनमें कुल 13 जवान शहीद हुए, जबकि सुरक्षाकर्मियों ने 12 आतंकियों को मारा गिराया।
मैप में देखिए आज चल रहे एनकाउंटर की लोकेशन
जम्मू-कश्मीर में जुलाई में इस महीने 8 बड़े हमले हुए
23 जुलाई: पुंछ में एनकाउंटर में एक जवान शहीद
जम्मू-कश्मीर के पुंछ में LOC के पास बट्टाल सेक्टर में मंगलवार (23 जुलाई) सुबह करीब 3 बजे आर्मी-आतंकियों के बीच गोलीबारी हुई। इसमें लांस नायक सुभाष कुमार घायल हो गए। उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया। लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पूरी खबर पढ़ें…
22 जुलाई: शौर्य चक्र विजेता के घर आतंकी हमला, एक आतंकी ढेर
जम्मू के राजौरी के घोंधा में आतंकियों ने एक शौर्य चक्र विजेता के घर पर हमला किया। घटना सुबह 3:10 बजे हुई। हमले की खबर लगते ही 63 आरआर आर्मी कैंप से आई टुकड़ी ने जवाबी कार्रवाई की और एक आतंकी को मार गिराया। पूरी खबर पढ़ें…
18 जुलाई: कुपवाड़ा में सेना ने 2 आतंकियों को मार गिराया
कुपवाड़ा के केरन इलाके में सेना ने 2 आतंकियों को एनकाउंटर में मार गिराया। सेना को यहां कुछ आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली, जिसके बाद सर्च ऑपरेशन चलाया गया। इसी दौरान आतंकियों-सेना के बीच मुठभेड़ शुरू हुई थी। पूरी खबर पढ़ें…
16 जुलाई: आतंकियों से मुठभेड़ में कैप्टन और पुलिसकर्मी समेत 5 शहीद
डोडा के डेसा इलाके में आतंकियों से मुठभेड़ में सेना के एक कैप्टन और पुलिसकर्मी समेत 5 जवान शहीद हो गए। 15 जुलाई को डोडा के डेसा फोरेस्ट बेल्ट के कलां भाटा में रात 10:45 बजे और पंचान भाटा इलाके में रात 2 बजे फिर फायरिंग हुई थी। पूरी खबर पढ़ें…
14 जुलाई: लाइन ऑफ कंट्रोल के पास घुसपैठ के दौरान 3 आतंकी ढेर
जम्मू-कश्मीर में कुपवाड़ा में लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के पास घुसपैठ के दौरान सुरक्षाबलों ने 3 आतंकियों को मार गिराया। इनके पास से पिस्तौल, गोला-बारूद बरामद किए गए। तीनों की पहचान का खुलासा नहीं किया गया। पूरी खबर यहां पढ़ें…
8 जुलाई: कठुआ में आतंकी हमले में 5 जवान शहीद
कठुआ में 8 जुलाई को आतंकियों के हमले में जूनियर कमीशंड ऑफिसर (JCO) समेत 5 जवान शहीद हो गए। आतंकियों ने पहाड़ी से घात लगाकर सेना के ट्रक पर पहले ग्रेनेड फेंका, फिर स्नाइपर गन से फायरिंग की। सेना ने भी काउंटर फायरिंग की, लेकिन आतंकी जंगल में भाग गए। पूरी खबर यहां पढ़ें…
7 जुलाई: राजौरी में सुरक्षा पोस्ट पर फायरिंग, आतंकी फरार
राजौरी जिले के मंजाकोट इलाके में आतंकियों ने एक आर्मी कैंप पर हमला कर दिया। इसमें एक जवान घायल हुआ है। जवानों की जवाबी कार्रवाई के बाद आतंकी घने जंगल के रास्ते भाग गए। सेना और पुलिस ने सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है।
7 जुलाई: कुलगाम में 6 आतंकी ढेर, एनकाउंटर में 2 जवान शहीद
कुलगाम के मुदरघम और चिन्निगम फ्रिसल में एनकाउंटर में 6 आतंकी मारे गए। एनकाउंटर में दो जवान भी शहीद हुए। मुदरघम में एक-दो आतंकियों और चिन्निगम फ्रिसल में एक और आतंकी के छिपे होने की संभावना थी। जम्मू-कश्मीर के डीजीपी ने बताया कि हमले में स्थानीय आतंकियों भी शामिल थे। पूरी खबर पढ़ें…
जम्मू में जैश और लश्कर का 20 साल पुराना नेटवर्क एक्टिव
जम्मू रीजन में सेना ने 20 साल पहले पाकिस्तान परस्त आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के जिस लोकल नेटवर्क को सख्ती से निष्क्रिय कर दिया था, वो पूरी ताकत से फिर एक्टिव हो गया है। पहले ये लोग आतंकियों का सामान ढोने का काम करते थे, अब उन्हें गांवों में ही हथियार, गोला बारूद और खाना-पीना दे रहे हैं।
बीते दिनों जिन 25 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है, उन्होंने पूछताछ में इसके सुराग दिए हैं। यह नेटवर्क जम्मू के 10 में से नौ जिलों राजौरी, पुंछ, रियासी, ऊधमपुर, कठुआ, डोडा, किश्तवाड़, जम्मू और रामबन में जम चुका है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद्य के मुताबिक, आर्टिकल 370 हटने के बाद से ही पाकिस्तान आर्मी और ISI ने जम्मू को टारगेट करना शुरू कर दिया था। उसने दो साल में इस नेटवर्क को सक्रिय किया। इन्हीं की मदद से आतंकियों ने 2020 में पुंछ और राजौरी में सेना पर बड़े हमले किए। फिर ऊधमपुर, रियासी, डोडा और कठुआ को निशाने पर लिया।
2020 में जम्मू से सेना हटाकर लद्दाख भेजी गई, यही आतंकियों के लिए मौका बना
2020 तक जम्मू रीजन में काफी सुरक्षा बल तैनात था। हालांकि, गलवान एपिसोड के बाद चीनी आक्रामकता का जवाब देने के लिए यहां की सेना को हटाकर लद्दाख भेज दिया गया। आतंकियों ने भारत के इस कदम को मौके के रूप में भुनाया और अपना आधार कश्मीर से जम्मू में शिफ्ट किया।
यहां इनका पुराना लोकल नेटवर्क पहले से ही था, जिसे एक्टिव करना था। वही हुआ है। जम्मू में आतंकी घटनाएं सांप्रदायिक रंग भी ले सकती हैं। यहां कश्मीर के मुकाबले जनसंख्या घनत्व कम है और सड़क संपर्क सीमित है। बड़ा इलाका पहाड़ी है, इसलिए आतंकियों को यहां मार गिराने में समय लग रहा है।
जम्मू में घुसे आतंकियों में पाकिस्तान के पूर्व और वर्तमान सैनिक भी
सैन्य सूत्रों ने बताया कि रियासी हमले के बाद मारे गए आतंकियों से जो हथियार और सैटेलाइट फोन मिले थे, वो इस बात के सबूत हैं कि नए आतंकियों में पाकिस्तान सेना के पूर्व या वर्तमान सैनिक भी शामिल हैं। इनके हमलों का तरीका पाक सेना के पैरा ट्रूपर डिवीजन जैसा है। सैटेलाइट फोन भी पूरी तरह एंड टू एंड एनक्रेप्टेड हैं।
