शहीद विनोद सिंह का ऋषिकेश में अंतिम संस्कार:आदर्श नेगी के गांव पहुंचा पार्थिव शरीर; कठुआ आतंकी हमले में उत्तराखंड के 5 जवान शहीद हुए
कठुआ आतंकी हमले में आतंकी हमले में शहीद हुए उत्तराखंड के 5 जवानों का आज सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जा रहा है। शहीद हुए लांस नायक विनोद सिंह भंडारी को पैतृक गांव अठुरवाला में अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान माहौल गमगीन हो गया। लोगों ने नम आंखों से उन्हें विदाई दी। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने शहीद विनोद सिंह को श्रद्धांजलि दी। साथ ही परिवार को भी सांत्वना दी।
शहीद के पार्थिव शरीर को देखकर पत्नी बेसुध हो गई। लोगों ने किसी तरह ढांढस बंधाया। ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, विनोद तेरा नाम रहेगा’ के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। विनोद सिंह भंडारी का अंतिम संस्कार पूरे सैन्य सम्मान के साथ ऋषिकेश के पूर्णानंद घाट पर किया गया।
पहले शहीद विनोद सिंह के गांव से 3 तस्वीरें देखिए…
तीन परिवारों के इकलौते चिराग बुझ गए
कमल सिंह (22) गढ़वाल राइफल्स में तैनात थे। पिछले 20 जून को कमल अपने गांव में एक पूजा में शामिल होने आए थे। लेकिन ड्यूटी से जाने के कुछ दिन बाद ही कमल शहीद हो गए। हवलदार कमल सिंह तीन बहनों के इकलौते भाई थे। उनकी मां और दादी गांव में रहती हैं, जबकि बच्चों के साथ पत्नी कोटद्वार में रहती है।
वहीं राइफल मैन अनुज सिंह भी अपने घर के इकलौते चिराग थे, उनकी एक बहन है। अनुज सिंह के पिता भरत सिंह भंडारी वन विभाग में कर्मचारी हैं। अनुज की 8 महीने पहले नवंबर में शादी हुई थी। गर्मी की छुट्टियों में अनुज अपने घर आए थे। छुट्टी बिता कर अनुज मई अंतिम सप्ताह में अपनी ड्यूटी पर लौटे थे।
तीन बहनों के इकलौते भाई थे विनोद भंडारी
विनोद भंडारी भी तीन बहनों के इकलौते भाई थे। मूल रूप से टिहरी के रहने वाले विनोद भंडारी का परिवार अब जॉलीग्रांट में रहता है। उनके पिता वीर सिंह भी फौज में रहे हैं। जिन्होंने 19 साल देश की सेवा की।
इकलौते बेटे को खोकर उनका मन बहुत दुखी है, लेकिन गर्व भी है कि उनके बेटे ने देश के लिए अपने प्राण दिए हैं। वीर सिंह 3 महीने की बच्ची और 4 साल के पोते को देखकर रोने लगते हैं।
डागर गांव पहुंचा आदर्श नेगी का पार्थिव शरीर
शहीद राइफलमैन आदर्श नेगी का पार्थिव शरीर सैन्य सम्मान के साथ थाती डागर स्थित गांव पहुंचा। शहीद को श्रद्धांजलि देने के लिए लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। परिजन और ग्रामीणों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। मलेथा घाट में शहीद के पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी जाएगी।
हर कोई वीर सपूतों के साहस को कर रहा है नमन
हर जुबां पर वीर सपूतों के अदम्य साहस और पराक्रम की कहानी है। उत्तराखंड राज्य गठन से लेकर अब तक 354 सैनिक देश के लिए प्राण न्यौछावर कर चुके हैं।
कारगिल युद्ध में भी उत्तराखंड के जवानों का बड़ा योगदान रहा। उस समय उत्तराखंड के 75 जवानों ने अपनी आहुति दी थी। हर साल उत्तराखंड के वीर जवान अपने देश के लिए प्राण देते हैं।
