अयोध्या में UPSTF और ATS की यूनिट के बाद अब नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) का हब बनेगा। NSG का यह देश में छठवां हब होगा। अभी चेन्नई, हैदराबाद, कोलकाता, मुंबई और अहमदाबाद में NSG के रीजनल हब हैं।
अयोध्या में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और आतंकी हमलों की धमकी को देखते हुए यह फैसला लिया है। जल्द ही इस पर काम भी शुरू होगा। गृह मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि NSG का हब राम मंदिर के पास होगा। जमीन के लिए प्रक्रिया शुरू हो गई है।
इसको लेकर SSP राजकरन अय्यर ने बात की। उनका कहना था कि अभी कोई लिखित सूचना नहीं मिली है।
रोज डेढ़ लाख श्रद्धालु पहुंच रहे राम मंदिर
22 जनवरी 2024 को राम मंदिर में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद से हर दिन करीब डेढ़ लाख श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। सूत्रों के मुताबिक, मंदिर पर आतंकी हमले को लेकर अक्सर धमकियां मिलती रहती हैं। ऐसे में मंदिर की सुरक्षा को देखते हुए सरकार यह कदम उठाने जा रही है।
अभी SSF के हाथों में मंदिर की सुरक्षा
श्रीराम जन्मभूमि परिसर और मंदिर की सुरक्षा की जिम्मेदारी SSF के हाथों है। मंदिर की सुरक्षा में 200 जवान तैनात हैं। UP सरकार ने हाल ही में PAC और पुलिस के जवानों को मिलाकर SSF गठन किया है।
मंदिर को दो बार बम से उड़ाने की मिल चुकी धमकी
14 दिन पहले राम मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी भी मिली थी। पहले एक आईडी से इंस्टाग्राम पर पोस्ट की गई। फिर 112 पर कॉल आई। राम मंदिर को उड़ाने की धमकी मिलते ही पुलिस में हड़कंप मच गया। साइबर एक्सपर्ट और सर्विलांस टीम को तुरंत एक्टिव किया।
दहशत न फैले इसलिए पुलिस ने अंदरखाने जांच की। जांच में लोकेशन कुशीनगर की निकली। पुलिस ने धमकी देने वाले पटहेरवा थाना के बलुआ तकिया क्षेत्र के रहने वाले एक 16 साल को हिरासत में लेकर पूछताछ की। शुरुआती जांच में पता चला कि नाबालिग मानसिक तौर पर स्वस्थ नहीं है।
9 महीने पहले बरेली के छात्र ने मंदिर को उड़ाने की धमकी दी थी
राम मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी 9 महीने पहले बरेली से दी गई। बरेली से लखनऊ कंट्रोल रूम में 112 नंबर पर कॉल कर यह धमकी दी गई। पुलिस ने मोबाइल नंबर के आधार पर बरेली के 8वीं के छात्र को हिरासत में लिया। उसकी उम्र 14 साल थी। जांच में सामने आया है कि छात्र ने यू-ट्यूब पर वीडियो देखकर मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी दी।
NSG का गठन 1986 में किया गया
- NSG खुद को जीरो एरर फोर्स करता है यानी इससे गलती होने की कोई गुंजाइश नहीं होती है।
- इसे विशेष रूप से आतंकवाद-विरोधी किसी भी अभियान को रोकने के लिए तैयार बनाया गया है। इनका इस्तेमाल तभी किया जाता है जब बेहद गंभीर आतंकवादी हमला हो।
- देश के प्रधानमंत्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी एनएसजी के पास ही होती है। इसके अलावा भी कुछ चुनिंदा वीवीआई की सुरक्षा का जिम्मा एनएसजी के पास होता है।
- 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद देश में ऐसे किसी फोर्स की जरूरत महसूस की गई।
- इसके बाद ही 1986 में नेशनल सिक्योरिटी गार्ड एक्ट के तहत इसे बनाया गया।
