केजरीवाल गिरफ्तारी केस,सिंघवी बोले-16 मार्च तक वे आरोपी नहीं थे:सुप्रीम कोर्ट बोला- जब तक अरेस्ट नहीं किया जाता, तब तक आरोपी नहीं मानते
दिल्ली शराब नीति केस में गिरफ्तारी और रिमांड के खिलाफ अरविंद केजरीवाल की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार 3 मई को सुनवाई जारी है। केजरीवाल के वकील ने कहा कि 16 मार्च तक वे (दिल्ली के सीएम) आरोपी नहीं थे, अचानक इसमें क्या बदलाव हुआ?
इस पर जस्टिस खन्ना ने कहा कि जब तक आपको गिरफ्तार नहीं किया जाता, तब तक आरोपी नहीं है।
30 अप्रैल को कोर्ट ने केजरीवाल की गिरफ्तारी की टाइमिंग पर सवाल उठाए थे और पूछा था कि चुनाव से ठीक पहले ही गिरफ्तारी क्यों हुई। कोर्ट ने ED से 4 और सवालों के जवाब मांगे थे। कोर्ट ने केजरीवाल से भी सवाल किया गया था कि आपको ED ने जो नोटिस भेजे, आपने उन्हें नजरअंदाज क्यों किया। आप गिरफ्तारी और रिमांड के खिलाफ यहां आए, आपने जमानत के लिए ट्रायल कोर्ट क्यों नहीं गए।
शराब नीति घोटाला केस में केजरीवाल 1 अप्रैल को गिरफ्तार किए गए थे। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 23 अप्रैल को उनकी न्यायिक हिरासत 7 मई तक बढ़ा दी थी। केजरीवाल तीसरे (7 मई) फेज की वोटिंग के दौरान भी जेल में रहेंगे।
केजरीवाल के अलावा BRS नेता के. कविता और एक अन्य आरोपी चरनप्रीत की कस्टडी भी 7 मई तक बढ़ा दी गई है।
कोर्ट रूम लाइव…
केजरीवाल की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी और ED की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी राजू ने दलीलें दीं।
सिंघवी- ED का 12 जनवरी को दिया जवाब देखिए। इसमें कहा गया है कि पीएमएलए की धारा 50 के तहत समन दिए गए व्यक्ति को आरोपी तब तक नहीं माना जाता, जब तक कि सभी सबूत इकट्ठे करके औपचारिक आरोप नहीं लगाए जाते।
सिंघवी- मुझे (केजरीवाल) समन मिला है। इसके मुताबिक मैं (केजरीवाल) आरोपी या दोषी नहीं हूं। आखिरी समन 16 मार्च को आया था। इसमें मुझे 21 मार्च को पेश होने कहा गया। यानी साफ है कि मैं 16 मार्च तक आरोपी नहीं हूं। क्या इसमें अचानक बदलाव हुआ?
जस्टिस खन्ना- जब तक आपको गिरफ्तार नहीं किया जाता, तब तक आप आरोपी नहीं हैं।
सिंघवी- मैंने लिखित में पूछा था कि क्या मैं (केजरीवाल) आरोपी हूं। जब उनके मुताबिक 16 मार्च तक मैं आरोपी नहीं था, तब वे 21 मार्च को गिरफ्तारी की जरूरत को अदालत के सामने कैसे रख सकते हैं।
सिंघवी- जिन सबूतों के आधार पर गिरफ्तारी हुई, वे सभी दिसंबर 2023 से पहले के हैं। हर सबूत जुलाई 2023 का ही है। मनीष सिसोदिया के मामले में भी यही सबूत इस्तेमाल किए गए थे। मनी ट्रेल चार्ट भी वही था।
सिंघवी- मेरे केस में बाकी सब आरोपियों ने पहले कुछ नहीं कहा, फिर अचानक उनके बयान आए। आप यह भी देखिए कि कैसे दस्तावेजों में इन आरोपियों को बचाने वाली बयान जोड़े गए।
ASG राजू- मैं शिकायत नहीं कर रहा हूं, लेकिन उन्होंने मुझे इसकी सॉफ्ट कॉपी नहीं दी।
सिंघवी- हमने हार्ड कॉपी दी।
सिंघवी- PMLA की धारा 70 किसी राजनीतिक दल के किए हुए किसी भी काम या हर चीज को उसके संयोजक या अध्यक्ष के नाम से नहीं जोड़ा जा सकती। धारा नॉन रजिस्टर्ड AoP (एसोसिएशन ऑफ पर्सन्स) का नाम नहीं लेती।
जस्टिस खन्ना- क्या आम आदमी पार्टी है?
सिंघवी- यह कोई कॉर्पोरेट यूनिट नहीं है, बल्कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत रजिस्टर्ड है।
जस्टिस खन्ना- क्या आप के खिलाफ कोई मुकदमा चलाया जा रहा है?
सिंघवी- नहीं।
जस्टिस खन्ना- ASG राजू जो कह रहे हैं, वह यह है कि भविष्य में आम आदमी पार्टी को आरोपी बनाया जाएगा।
सिंघवी- लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि केजरीवाल को गिरफ्तार कर लें।
जस्टिस खन्ना- किसी का प्रतिनिधि होना सबूत नहीं है। आप गलत हैं। प्रभारी व्यक्ति को जिम्मेदार माना जाता है।
जस्टिस खन्ना- तो क्या यह माना जा सकता है कि उन्हें धारा 70 के तहत गिरफ्तार किया गया।
सिंघवी- लेकिन मेरी दलील है कि महज किसी कंपनी का नाम होने से एमडी की गिरफ्तारी नहीं हो सकती।
जस्टिस खन्ना- कोई व्यक्ति जो कंपनी का प्रभारी है अगर उसकी कंपनी कोई क्राइम करती है तो वह भी जवाबदार होगा। कंपनी की परिभाषा में एसोसिएशन शामिल है।
सिंघवी- आप राजनीतिक दलों के बारे में नहीं केवल कमर्शियल संस्थाओं को देख रहे हैं। यह एक व्यापारिक पहलू है। AoP इससे कुछ चीजें ले सकती है।
जस्टिस खन्ना- AoP (एसोसिएशन ऑफ पर्सन्स) समाज का ही एक हिस्सा है।
सिंघवी- ED कह रही है कि वे (केजरीवाल) आम आदमी पार्टी के मास्टरमाइंड हैं। वे रिश्वत की मांग में शामिल हैं। कोई सबूत नहीं है। साथ ही यह PMLA के तहत नहीं, बल्कि पहले से तय क्राइम है। उन्होंने धारा 164 बयान दर्ज किया, लेकिन वह भी मजबूत नहीं है।
सिंघवी- यह बयान PMLA की धारा 50 के तहत दिए गए बयान जैसा ही है। ये प्रलोभनों पर दिए गए बयान हैं। धारा 19 में इसे शामिल नहीं किया गया। जज को धारा 164 के तहत रिकॉर्ड करने के लिए बाध्य किया गया। यहां ऐसा नहीं किया गया।
सिंघवी – धारा 164 के तहत दर्ज बयान में स्वेच्छा से दिया गया शब्द नहीं हैं, जबकि यह महत्वपूर्ण है।
सिंघवी- आरोपी के बयान स्वेच्छा से दिया गया, इस बारे में मजिस्ट्रेट का बयान दर्ज किया जाना चाहिए।
ASG राजू- यह सब सामान्य कानून है। उन्हें बयान देखना चाहिए।
सिंघवी- धारा 164 तहत बयान से जुड़े मजिस्ट्रेट के सर्टिफिकेट के बारे में बता रहे हैं।
जस्टिस खन्ना- यह इस मामले से जुड़ा नहीं हो सकता।
सिंघवी- ED इस पर भरोसा करती है।
पिछली तीन सुनवाई में क्या-क्या हुआ
30 अप्रैल : सुप्रीम कोर्ट ने ED से 5 सवाल पूछे
1. क्या बिना किसी न्यायिक कार्यवाही के विजय मदनलाल चौधरी या अन्य मामले में जो कहा गया है, उसके संदर्भ में आपराधिक कार्यवाही शुरू की जा सकती है? (जस्टिस खन्ना ने कहा कि केजरीवाल के मामले में अब तक कोई कुर्की नहीं हुई है। अगर हुई है तो ED को यह बताना होगा कि उनका संबंध कैसे था)
2. मनीष सिसोदिया मामले में फैसले के दो हिस्से हैं- एक, जो उनके पक्ष में है, दूसरा, जो उनके पक्ष में नहीं है। केजरीवाल का मामला किस भाग में आता है?
3. PMLA के सेक्शन-19 की व्याख्या कैसे की जाए, क्योंकि केजरीवाल जमानत के लिए आवेदन करने के बजाय गिरफ्तारी और रिमांड के खिलाफ आ रहे हैं। यदि वे बाद का रास्ता अपनाते हैं तो उन्हें PMLA के सेक्शन-45 के तहत उच्च प्रावधानों का सामना करना पड़ेगा?
4. मामले में कार्यवाही शुरू होने और कुछ समय बाद बार-बार शिकायत दर्ज होने के बीच का समय। (इस संबंध में यह बताया गया कि अंतर के गंभीर नतीजे होंगे। चूंकि धारा 8 न्यायिक प्रक्रिया के लिए 365 दिनों की अधिकतम समय सीमा निर्धारित करती है)
5. गिरफ्तारी की टाइमिंग। चुनाव के पहले ऐसा क्यों किया?
29 अप्रैल: केजरीवाल की तरफ से दी गईं दलीलें
- 3 स्टेज होती हैं। दस्तावेज, विश्वास करने का कारण और आरोपी होना। गिरफ्तार करने का अधिकार होने का मतलब यह नहीं कि गिरफ्तार कर लें। आरोप साबित होना चाहिए, सिर्फ शक नहीं होना चाहिए। आपके पास पुख्ता या आरोपी साबित करने के सबूत होने चाहिए। कुछ आधार होना चाहिए, जो हमें नहीं पता।
- केजरीवाल को CBI ने बुलाया, वे गए। ED के नोटिस का डिटेल में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वे नहीं आ सकते। आप आज ये नहीं कह सकते हैं कि आप आए नहीं, इसलिए हमने गिरफ्तार कर लिया। ये मेरा अधिकार है कि मैं न जाऊं।
- अगर कोई आरोपी कहता है कि मैं बयान नहीं दूंगा तो क्या आप कह सकते हैं कि आरोपी सहयोग नहीं कर रहा है, इसलिए उसे गिरफ्तार करते हैं? इन्होंने केजरीवाल को गिरफ्तार किया। सेक्शन 50 के तहत वहां बयान नहीं लिए गए। डेढ़ साल तक गिरफ्तारी नहीं की गई। मेरी बेल को नकार दिए जाने से मुझे घर आकर गिरफ्तार करने का आधार नहीं बन जाता।
- सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- आपको ED ने जो नोटिस भेजे, आपने उन्हें नजरअंदाज क्यों किया। आप गिरफ्तारी और रिमांड के खिलाफ यहां आए, आपने जमानत के लिए ट्रायल कोर्ट क्यों नहीं गए। इस पर केजरीवाल के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था कि गिरफ्तारी अवैध है इसलिए। ED के वकील एसवी राजू ने कहा कि इन्होंने पिछली कस्टडी का भी विरोध नहीं किया था।
15 अप्रैल: सुप्रीम कोर्ट ने ED को नोटिस देकर गिरफ्तारी पर जवाब मांगा
- 15 अप्रैल को अरविंद की याचिका पर सुनवाई करते हुए शराब घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग केस में ED से 24 अप्रैल तक जवाब मांगा था। हलफनामे में ED ने कहा कि कई बार समन भेजे जाने के बावजूद उन्होंने एजेंसी के साथ सहयोग नहीं किया।
- ED ने यह भी कहा कि केजरीवाल को किसी दुर्भावना या दूसरे कारणों से गिरफ्तार नहीं किया गया है। किसी अपराध की जांच एक ऐसा क्षेत्र है जो जांच एजेंसी के लिए रिजर्व है। उनकी गिरफ्तारी भी जांच का हिस्सा है।
