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जम्मू-कश्मीर के राजौरी में टारगेट किलिंग:आतंकियों ने सरकारी कर्मचारी की गोली मारकर हत्या की; एक महीने में ऐसी तीसरी घटना

जम्मू-कश्मीर के राजौरी में टारगेट किलिंग:आतंकियों ने सरकारी कर्मचारी की गोली मारकर हत्या की; एक महीने में ऐसी तीसरी घटना

श्रीनगर3 घंटे पहले
40 साल के रज्जाक सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट में काम करते थे। उनके भाई सेना में जवान हैं।

जम्मू-कश्मीर के राजौरी में आतंकियों ने एक बार फिर से टारगेट किलिंग को अंजाम दिया है। आतंकियों ने सोमवार (22 अप्रैल) को एक लोकल शख्स की गोली मारकर हत्या कर दी। विक्टिम की पहचान कुंडा टोपे शहादरा शरीफ के रहने वाले मोहम्मद रज्जाक के रूप में हुई

40 साल के रज्जाक सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट में काम करते थे। उनके भाई सेना में जवान हैं। आतंकियों ने मोहम्मद रज्जाक के घर पर फायरिंग की थी। इस दौरान रज्जाक को गोली लग गई। वे हमले में बुरी तरह जख्मी हो गए थे।

उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। पुलिस ने आरोपियों को पकड़ने के लिए पूरे इलाके को सील कर दिया है। सूचना मिलते ही पुलिस और सेना की जॉइंट टीम ने हमलावरों को पकड़ने के लिए इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया था।

यह ऑपरेशन मंगलवार यानी आज भी जारी है। पुलिस और सेना के अधिकारी राजौरी के थाना मंडी तेहसील के शाहदरा शरीफ इलाके और कुंदा गांव में छानबीन कर रही है। पूरे जिले में सुरक्षाबलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

अप्रैल में टारगेट किलिंग की ये तीसरी वारदात

17 अप्रैल को आतंकियों ने बिहार के एक प्रवासी की गोली मारकर हत्या कर दी थी।

जम्मू-कश्मीर में एक महीने के भीतर टारगेट किलिंग की ये तीसरी घटना है। इससे पहले दो गैर कश्मीरियों की हत्या की गई थी। अनंतनाग में 17 अप्रैल को आतंकियों ने बिहार के एक प्रवासी शंकर शाह की गोली मारकर हत्या कर दी थी। हमलावरों ने उसे पेट और गर्दन में गोलियां मारी थीं।

इस घटना से पहले 8 अप्रैल को दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले के पदपावन में आतंकियों ने गैर कश्मीरी स्थानीय ड्राइवर परमजीत सिंह को गोली मारी थी। वह दिल्ली का रहने वाला था। आतंकियों ने परमजीत पर उस वक्त हमला किया था, जब वह अपने ड्यूटी पर था। घटना को अंजाम देने के बाद आतंकी मौके से भाग निकले थे।

फरवरी में पंजाब के दो लोगों की हत्या हुई

7 फरवरी को आतंकियों ने अमृतसर के दो युवकों की गोली मारकर हत्या कर दी थी।

श्रीनगर में 7 फरवरी 2024 को आतंकियों ने हब्बा कदल इलाके में सिख समुदाय के दो लोगों को AK-47 राइफल से गोली मारी दी थी। मृतकों की पहचान अमृतसर के रहने वाले अमृत पाल (31) और रोहित मसीह (25) के रूप में की गई। अमृत पाल की मौके पर ही मौत हो गई थी। रोहित ने इलाज के दौरान दम तोड़ा था।

पिछले 2 साल में टारगेट किलिंग की अन्य घटनाएं
26 फरवरी 2023: आतंकियों ने पुलवामा में एक कश्मीरी पंडित संजय शर्मा की हत्या कर दी थी। वो अपने गांव में गार्ड का काम करते थे। सुबह के वक्त वह ड्यूटी से लौट रहे थे। तभी आतंकियों ने उन पर फायरिंग की थी।

29 मई 2023: अनंतनाग में आतंकियों ने एक नागरिक की गोली मारकर हत्या कर दी थी। मृतक की पहचान दीपक कुमार के रूप में हुई थी। दीपक जम्मू के उधमपुर का रहने वाला था और अनंतनाग के जंगलात मंडी में सर्कस मेले में काम करता था।

15 अक्टूबर 2022: शोपियां के चौधरीगुंड गांव में आतंकियों ने पूरन कृष्ण भट्ट पर फायरिंग की थी। गंभीर रूप से घायल पूरन को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टर्स ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था।

अगस्त 2022: शोपियां में आतंकियों ने बिहार के रहने वाले तीन प्रवासी मजदूरों को गोली मारी थी। इसके अलावा सेब के बाग में एक कश्मीरी पंडित की हत्या कर दी गई थी। बांदीपोरा में आतंकियों ने बिहार के एक प्रवासी की गोली मारकर हत्या कर दी थी।

नवंबर 2022: शोपियां में आतंकियों ने उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले के रहने वाले दो मजदूरों की हत्या कर दी थी। शोपियां के हरमेन में आतंकियों ने ग्रेनेड फेंका था, जिसमें मोनीश कुमार और राम सागर नाम के दो मजदूर घायल हो गए थे।

घाटी में गैर-कश्मीरियों की हत्या का कारण

खुफिया एजेंसियों ने बताया था कि टारगेट किलिंग पाकिस्तान की कश्मीर में अशांति फैलाने की नई साजिश है। माना जा रहा है कि इसका मकसद, आर्टिकल 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास की योजनाओं पर पानी फेरना है।

आर्टिकल 370 हटने के बाद से ही कश्मीर में टारगेट किलिंग की घटनाएं बढ़ी हैं, जिसमें खास तौर पर आतंकियों ने कश्मीरी पंडितों, प्रवासी कामगारों और यहां तक कि सरकार या पुलिस में काम करने वाले उन स्थानीय मुस्लिमों को भी निशाना बनाया है, जिन्हें वे भारत का करीबी मानते हैं।

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