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राजस्थान में इस बार क्या कांग्रेस का खाता खुलेगा?:18-20 सीटों पर मोदी-राम मंदिर की ही बात, 5-7 पर कड़ी टक्कर; जानिए-25 सीटों के समीकरण

हवा 

राजस्थान में लू के थपेड़े पड़ते हैं तो रेतीले धोरे झरने की तरह बहने लगते हैं। अभी न तेज गर्मी शुरू हुई है और न लू बह रही है, लेकिन दस साल में पहली बार ऐसा है कि लोकसभा चुनाव में गर्मी सिर चढ़कर बोल रही है।

25 में से 7 सीटों पर गर्म हवा बह रही है। पांच सीटों पर तो मुकाबला कांटे की टक्कर का हो गया है।

शेखावाटी की सीकर, चूरू और झुंझुनूं सीट पर मुकाबला आमने-सामने का है। बाड़मेर-जैसलमेर में निर्दलीय रविन्द्र सिंह भाटी ने इस सीट और इलाके दोनों को हॉट बना दिया है।

जोधपुर और दौसा में एक ही जाति के प्रत्याशी होने के बावजूद मुकाबला काफी पेचीदा हो गया है। मतदाता खुलकर नहीं बोल रहे।

वहीं, राजस्थान की 18 से 20 सीटों पर मतदाता को न प्रत्याशी से मतलब है, न किसी और से। यहां सिर्फ मोदी, राम मंदिर और भाजपा की ही बात होती है।

राजस्थान में सभी 25 सीटों पर कहां क्या हालात हैं, ये समझने से पहले ग्राउंड पर आंखों देखी स्थिति बताते हैं…

बाड़मेर-जैसलमेर : ‘भाजपा- कांग्रेस ने लॉलीपॉप पकड़ाई’
सबसे पहले सबसे चर्चित बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा सीट पर निर्दलीय विधायक रविन्द्र सिंह भाटी के मैदान में होने से ये सीट काफी हॉट बन चुकी है। प्रधानमंत्री सहित भाजपा के कई बड़े नेताओं का यहां फोकस है।

इसका कारण समझने के लिए हम बाड़मेर पहुंचे। बाड़मेर मार्ग पर कल्याणपुर में पेट्रोल पंप पर दूदाराम मिले। वे कहते हैं, हम तो भाजपा वाले हैं।

कारण पूछा तो बताया कि काम तो वैसे भी कुछ नहीं होता, लेकिन हम तो पीढ़ियों से भाजपा को ही वोट देते आए हैं।

यहां पर सुनील सैन का कहना था कि रविन्द्र भी तो भाजपा का ही है। यहां पर रामदेव आश्रम, सारलाई के संत राकेश गिरी भी मिले। कहते हैं इस बार भाजपा ने कोई काम नहीं किया। दस साल से वोट दे रहे हैं। हर बार लॉलीपॉप पकड़ाते हैं।

बीच में ट्रक ड्राइवर राजूसिंह बोल पड़े, कांग्रेस वालों ने भी लॉलीपॉप कम नहीं पकड़ाई। उन्होंने भी बोला था- मिर्ची बड़ा नहीं पकेगा, उससे कम टाइम में कर्ज माफ कर देंगे। हम भोलेभाले लोग चक्कर में आ गए।

बाड़मेर मार्ग पर कल्याणपुर में पेट्रोल पंप पर मिले दूदाराम, सुनील सैन व राजूसिंह ने बताया कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ही वादे नहीं निभाए।

कांग्रेस राज में पेपर लीक और भ्रष्टाचार से त्रस्त थे। वैसे बीजेपी का काम सही है। मोदी सही हैं।

राजूसिंह कहते हैं कि रविन्द्र छत्तीस कौम को साथ लेकर चलने वाला है और उसकी भावना भी बीजेपी की ही है। कोई भी पार्टी युवा को आगे आने ही नहीं दे रही। देख लो ये 26 साल का है, सब पीछे पड़े हैं।

बालोतरा जिले के थापन गांव में बुजुर्ग चुन्नी देवी से बात की तो वोट किसे देंगी…सवाल पर गुस्सा हो गईं। बोलीं- गांव में पानी की एक बूंद नहीं है? सब चुनाव के समय आते हैं वोट के लिए डांस करते हैं। 80 साल की हो गई। एक काम नहीं हुआ।

गांव के गंगाराम कहते हैं कि भूखौ तो पेट भरिया धापै…मैं तो ट्रैक्टर चलाऊंगा उससे ही घर चलेगा।

चुन्नी देवी ने बताया कि चुनाव के समय पार्टियां वोट मांगने के लिए आ जाती हैं, लेकिन उसके बाद कोई वादा पूरा नहीं करती। बोली- आज भी पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

जालोर-सिरोही : तरक्की एक्सप्रेस पर सवारी!
जालोर-सिरोही लोकसभा सीट पर एंट्री के दौरान हमारी नजर जगह-जगह लगे तरक्की एक्सप्रेस के होर्डिंग पर पड़ी। यहां पर कई गाड़ियां भी इस तरह की मिली। प्रोफेशनल एजेंसियां चुनाव प्रचार संभाल रही हैं।

अकोली गांव के बस स्टैंड पर बात करने पर लाखाराम, देसाराम ने कहा कि जालोर की कितनी तरक्की हुई, सड़कें देखकर इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। पानी के लिए आज भी तड़पना पड़ता है।

उधर, यहां पर ही बैठे कांतिलाल और रानाराम ने कहा कि बेरोजगारों का और गरीबों का भला करने वाले गहलोत हैं। उन्हीं को वोट देंगे।

जालोर-सिरोही लोकसभा क्षेत्र में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपनी सरकार में कराए गए कार्यों पर बेटे के लिए वोट मांग रहे हैं।

रूपसिंह कहते हैं कि मोदी ने किसानों को सम्मान निधि दी। सवर्णों को आरक्षण दिया। यहां पर मौजूद भलाराम का कहना था गहलोत जी ने भी तो राशन और दवा दी।

जालोर शहर में मिले अंबालाल व्यास, अंजना सोलंकी और हेमेंद्र सिंह का कहना था कि जवाई के मुद्दे पर कांग्रेस सरकार ने अनदेखी की। चूरू के तारानगर में मिले हाडूराम कहते हैं कि राहुल कस्वां के साथ अन्याय हुआ। यहां पर मिली रूमल कहती हैं कि मोदी जी अच्छे आदमी हैं, हम तो उनको ही वोट देंगे।

पहले समझिए फेज 2 की 13 सीटों का गणित

राजस्थान में 5-7 सीटों पर कांटे की टक्कर है। सियासत का ऊंट किसी भी करवट बैठ सकता है।

रोचक: चुनाव प्रचार का नया अंदाज, लेकिन डांट भी
जालोर के आहोर चौराहे पर दिल्ली से नुक्कड़ नाटक करने वाले युवकों का एक ग्रुप मतदान जागरूकता के साथ कांग्रेस प्रत्याशी वैभव गहलोत का प्रचार कर रहा था।

ग्रुप ने पहले तो ढोल-नगाड़े बजाकर मतदान करने की अपील की, जैसे ही भीड़ बढ़ी ग्रुप ने नुक्कड़ नाटक शुरू कर दिया।

ग्रुप के दो युवकों ने पहले शराब, पैसों के लालच में वोट नहीं करने की अपील की। फिर पिछली गहलोत सरकार की योजनाओं के फायदे बताते हुए वैभव को वोट देने की अपील की। तभी नाटक देखने वालों में से कुछ लोगों ने सवाल शुरू कर दिए। तीखे सवाल सुनकर युवकों ने नाटक रोक दिया और वहां से निकल गए।

जालोर के आहोर चौराहा पर नुक्कड़ नाटक के जरिए वैभव गहलोत के पक्ष में प्रचार करते हुए।

जालोर-सिरोही सीट: सामाजिक समझाैते पर टिकी जीत
अब तक काफी पीछे चल रहे वैभव गहलोत अब टक्कर में दिखने लगे हैं। हालांकि भाजपा का भी यहां कम प्रभाव नहीं है। पिछले दिनों अहमदाबाद में हुए प्रवासी सम्मेलन के बाद लौटते वक्त डीसा के मालीपुरा में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कुछ खास लोगों से मुलाकात कर कुछ समीकरण बिठाए थे, इसका कुछ फायदा वैभव को मिल सकता है।

दूसरा, जालोर सिरोही में माली समाज भी काफी बड़ा है। समाज के यहां एक लाख से सवा लाख के बीच मतदाता हैं, जो परंपरागत भाजपा के हैं। पिछला चुनाव कांग्रेस यहां पर 2 लाख 61 हजार वोटों से हारी थी। इस बार ये तय है कि वोट तो बंटेंगे, लेकिन कितने? सांचौर को जिला बनाने का फायदा भले सुखराम विश्नोई को नहीं मिला, लेकिन कांग्रेस को जरूर मिल रहा है।

बाड़मेर-जैसलमेर: मतदाता साइलेंट, मुकाबला त्रिकोणीय
मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच नहीं बल्कि निर्दलीय और कांग्रेस के बीच है। ज्यादातर लोगों का कहना था कि निर्दलीय रविन्द्र सिंह भाटी की भावना भाजपा की ही है। ऐसे में सीट त्रिकोणीय मुकाबले में फंस गई है। बीजेपी ने दूसरी बार कैलाश चौधरी को, कांग्रेस ने RLP छोड़ शामिल हुए उम्मेदाराम बेनीवाल को उतारा है। कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक एससी-एसटी व मुसलमान इस बार किसका साथ देगा ये बड़ा प्रश्न है। निर्दलीय प्रत्याशी बीजेपी के माने जाने वाले वोट बैंक राजपूत समाज के अलावा मूल ओबीसी के वोटबैंक में सेंधमारी कर रहे हैं।

जोधपुर: पिछली जीत का अंतर भाजपा के लिए संजीवनी
राजपूत समाज से ही दोनों प्रत्याशी हैं। भाजपा के चुनाव प्रचार की थीम है- केंद्र में नरेंद्र और जोधपुर में गजेंद्र। यहां पर जगह-जगह सिर्फ केंद्र की योजनाओं और केंद्र के मुद्दों के पोस्टर लगे नजर आते हैं। इसमें जो राम को लाए उनको हम लाएंगे। धारा 370 हटाना भी शामिल हैं। उधर, कांग्रेस के प्रत्याशी की चुनाव थीम- जोधपुर का बेटा और विकास है।

पाली: प्रत्याशी से ज्यादा मोदी की बात
इलाके में भाजपा का काफी प्रभाव है। प्रत्याशी के स्थान पर यहां पर लोग मोदी को वोट देने की बात करते हैं। लोग साफ कहते हैं कि काम भले नहीं हुए, लेकिन वोट तो मोदी को ही देंगे। कांग्रेस की प्रत्याशी संगीता बेनीवाल प्रचार में भी काफी पीछे हैं। स्थानीय नेता भी पाली के बजाय आसपास की सीटों पर व्यस्त है। कांग्रेस यहां नजर नहीं आती।

बांसवाड़ा: गठबंधन के बावजूद कांग्रेस का प्रत्याशी भी
राजस्थान की इस सीट पर कांग्रेस के लिहाज से काफी अजीबोगरीब स्थिति बनी हुई है। यहां कांग्रेस-बीएपी का गठबंधन है, लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी अरविंद डामोर भी मैदान में हैं। प्रत्याशी की मौजूदगी के बावजूद अब कांग्रेस का एक धड़ा बीएपी प्रत्याशी राजकुमार रोत के समर्थन में वोटिंग करने की अपील कर रहा है। कांग्रेस से बीजेपी में शामिल हुए गहलोत सरकार के पूर्व मंत्री और इस इलाके के बड़े नेता महेंद्रजीत सिंह मालवीय मजबूत स्थिति में नजर आ रहे हैं।

भीलवाड़ा: ब्राह्मण-वैश्य समीकरण की चर्चा
औद्योगिक नगरी भीलवाड़ा में ब्राह्मण-वैश्य समीकरण की चर्चा है। कांग्रेस ने पहले यहां से गुर्जर समाज के दामोदर गुर्जर को टिकट दिया था। बाद में बदलकर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी को प्रत्याशी बनाया। डॉ. जोशी के सामने भाजपा से दामोदर अग्रवाल हैं। ये लोकसभा क्षेत्र भी उनमें से है, जहां भाजपा का प्रत्याशी कोई भी हो, लेकिन चेहरा और मुद्दा मोदी ही बने हुए हैं।

चित्तौड़गढ़: भाजपा के जोशी को भितरघात का खतरा
इस सीट पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी के सामने कांग्रेस से गहलोत सरकार के पूर्व मंत्री उदयलाल आंजना खड़े हुए हैं। यहां विधानसभा चुनाव से ही चंद्रभान सिंह आक्या के साथ उनकी अदावत चल रही है और आक्या का टिकट कटने के बाद उन्हें विधानसभा चुनाव में निर्दलीय के रूप में जीत मिली थी। इस तरह के समीकरणों से जोशी को भितरघात का खतरा बना हुआ है। वहीं, आंजना की इस क्षेत्र में अच्छी पकड़ है आधा दर्जन से अधिक बार विधायक बन चुके हैं।

राजसमंद: कांग्रेस प्रत्याशी बदलने से नाराजगी
भाजपा ने हाल ही विधानसभा चुनाव जीते विश्वराज सिंह मेवाड़ की पत्नी महिमा सिंह मेवाड़ को प्रत्याशी बनाया है। अपने पति का चुनाव प्रचार संभालने के कारण उनका कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों से अच्छा जुड़ाव हो गया है। ये सीट भाजपा के लिए सुरक्षित मानी जाने वाली सीटों में गिनी जाती है। इस सीट पर कांग्रेस ने प्रत्याशी को बदल कर दामोदर गुर्जर को उतारा है, लेकिन इस बदलाव से भी कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखी जा रही है।

उदयपुर: कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध का खतरा
मेवाड़ की इस सीट को भाजपा खुद के लिए मजबूत मानती है। दर्जी कन्हैयालाल की बर्बर हत्या के बाद से यहां धर्म और भी बड़ा मुद्दा बन गया है। यहां चुनावी चेहरा प्रधानमंत्री मोदी और मुद्दे उनके विकास कार्य हैं। यहां बीजेपी से मन्नालाल रावत खड़े हुए हैं। कांग्रेस प्रत्याशी ताराचंद मीना के लिए एक संकट है, यहां गठबंधन के बावजूद बीएपी से प्रकाशचंद्र बुझ खड़े हुए हैं। कांग्रेस का वोट बैंक में सेंध का पूरा खतरा है।

झालावाड़-बारां: यहां वसुंधरा फैक्टर सबसे अहम
इस सीट पर विधानसभा चुनाव हो या लोकसभा चुनाव पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का एक छत्र राज रहता है। इस सीट पर लगातार चुनाव जीतते आ रहे दुष्यंत सिंह एक बार फिर मैदान में हैं। उनके सामने गहलोत सरकार में मंत्री रहे प्रमोद जैन भाया की पत्नी उर्मिला जैन हैं। भाजपा इस सीट को लेकर बिल्कुल चिंतित नहीं है।

टोंक-सवाई माधोपुर: गुर्जर-मीणा वोटों का ध्रुवीकरण
टोंक सवाईमाधोपुर भी उन सीटों में से एक है, जहां चुनाव फंसा हुआ है। भाजपा से मौजूदा सांसद सुखबीर सिंह जोनापुरिया मैदान में हैं और उनके सामने विधायक हरीश मीणा चुनौती बने हुए हैं। यहां गुर्जर-मीणा वोटों का ध्रुवीकरण देखने को मिल रहा है। मीणा सचिन पायलट खेमे के होने के कारण यहां गुर्जर वोट बैंक में कांग्रेस अच्छी सेंध लगा सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में मुद्दों के बजाय ये चुनाव जातिगत समीकरणों में सिमटकर रह गया है।

कोटा: कांटे की टक्कर होगी
भाजपा प्रत्याशी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के कारण इस सीट पर देश भर से सभी की नजरें टिकी हुई हैं। भाजपा के बागी प्रहलाद गुंजल के कांग्रेस से खड़े होने के कारण राजस्थान के लिए ये हॉट सीट बनी हुई है। अपने क्षेत्र के मतदाताओं के साथ एक खास तरह का पर्सनल टच रखना बिरला की खासियतों में से एक है। वहीं, गुंजल का ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छा खासा प्रभाव है।

अजमेर: यहां धर्म ही सबसे बड़ा मुद्दा
भाजपा ने सांसद भागीरथ चौधरी को फिर मौका दिया है। लम्बे समय से डेयरी चेयरमैन रहे रामचंद्र चौधरी कांग्रेस से प्रत्याशी हैं। यहां धर्म हर मुद्दे से बड़ा है और ऐसे में कांग्रेस को मुस्लिम क्षेत्रों में अच्छी खासी बढ़त मिलती है। भाजपा राम मंदिर, धारा 370 हटाने, केंद्र सरकार का पाकिस्तान के खिलाफ रवैये जैसे मुद्दे के कारण इस सीट को सुरक्षित मान रही है।

अब समझिए फेज 1 की 12 सीटों का गणित

चूरू: कांग्रेस को खाता खुलने की यहां से ही उम्मीद
कांग्रेस को सबसे ज्यादा उम्मीद है तो इसी सीट से है। हालांकि राह आसान नहीं है। कांग्रेस प्रत्याशी राहुल कस्वां और भाजपा नेता राजेंद्र राठौड़ के लिए प्रतिष्ठा का सवाल है। भाजपा से देवेंद्र झाझड़ियां मैदान में हैं। एक ही समाज से जुड़े दो चेहरों के बीच टक्कर है, लेकिन जातीय वोटों का ध्रुवीकरण देखने को मिल रहा है। इधर, कस्वां का टिकट कटने के बाद से जाट समाज का एक धड़ा नाराज है। उधर, झाझड़िया को राजपूत वोटर्स का साथ तो मिल रहा है, लेकिन खुद के समाज को साधने में मशक्कत करनी पड़ रही है।

अलवर: लोकल पर भारी पड़ रहा अनुभव
इस सीट पर राम मंदिर और धारा 370 का मुद्दा हावी है। कांग्रेस के ललित यादव राठ क्षेत्र से आते हैं। मुंडावर, बहरोड़ और बानसूर में उनकी पकड़ है। भाजपा से केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के लिए यह प्लस पॉइंट है कि शहरी क्षेत्रों में बीजेपी मजबूत स्थिति में है। वे ‘मोदी की गारंटी’ देकर प्रचार में जुटे हैं।

भरतपुर: जाट आंदोलन तय करेगा हवा का रुख
भरतपुर सीट पर जाट आरक्षण आंदोलन की हवा बह रही है। क्षेत्र में करीब 5 लाख जाट वोटर्स हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल आरक्षण की गारंटी दे चुके हैं। करीब 3.50 लाख जाटव वोटर्स हैं, जो एक बड़ा वर्ग है। कांग्रेस कैंडिडेट संजना इसी समाज से हैं। भाजपा प्रत्याशी रामस्वरूप कोली बयाना (अब भरतपुर) सीट से लोकसभा का चुनाव जीत चुके हैं।

सीकर: कांग्रेस-सीपीएम का साथ भाजपा की हैट्रिक में चुनौती
कांग्रेस ने सीपीएम प्रत्याशी अमराराम को समर्थन दिया है। गठबंधन ने बड़े वोट बैंक को साधने का इशारा दिया है। भाजपा ने दो बार के सांसद सुमेधानन्द सरस्वती को ही तीसरा मौका दिया है। तीन बार में यहां पर पहली बार कांटे की टक्कर दिख रही है।

झुंझुनूं: होगी कांटे की टक्कर
भाजपा से शुभकरण चौधरी और कांग्रेस से विधायक बृजेंद्र ओला मैदान में हैं। बृजेंद्र के पिता शीशराम ओला इसी सीट से 1996 से 2009 तक लगातार सांसद रहे थे। ओला और चौधरी के जरिए दोनों बड़ी पार्टियों ने सामाजिक समीकरणों को भी साधने का प्रयास किया है।

नागौर: इमोशनल कार्ड के सहारे ज्योति
नागौर सीट पर कांग्रेस गठबंधन के कारण एक बड़ा वोट बैंक भाजपा के लिए टेंशन बन गया है। नागौर सीट पर भाजपा प्रत्याशी ज्योति मिर्धा के साथ बार-बार चुनाव हारने के कारण एक सहानुभूति की लहर दिख रही है। मिर्धा के सामने आरएलपी सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल हैं।

जयपुर शहर: राम मंदिर और हिंदू वोटों की लामबंदी
जयपुर शहर की सीट पर बीजेपी ने दिग्गज नेता रहे भंवरलाल शर्मा की बेटी मंजू शर्मा को प्रत्याशी बनाया है। समीकरणों के हिसाब से यहां बीजेपी को मजबूत माना जा रहा है। राम मंदिर बड़ा फैक्टर है। हिंदू वोटर्स को बीजेपी लामबंद कर रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रोड शो के लिए भी जयपुर का ऐसा ही इलाका चुना।

जयपुर ग्रामीण: कांग्रेस-बीजेपी के बीच कड़ी टक्कर
जयपुर ग्रामीण सीट पर बीजेपी ने पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष राव राजेंद्र सिंह को टिकट दिया है। कांग्रेस ने सचिन पायलट खेमे के अनिल चोपड़ा को उम्मीदवार बनाया है। राव राजेंद्र सिंह को बीजेपी के मजबूत कैडर का समर्थन और राम मंदिर के मुद्दे की वजह से शहर-कस्बों में फायदा हो रहा है।

दौसा: जाति तय करेगी जीत
दौसा सीट पर कांग्रेस ने दौसा से विधायक मुरारीलाल मीणा को टिकट दिया है। सचिन पायलट खेमे के नेता होने के कारण गुर्जर वोट बैंक का भी उन्हें सहारा है। बीजेपी ने बस्सी से पूर्व विधायक कन्हैया लाल मीणा को मैदान में उतारा है। गुर्जर, मीणा, दलित और मुस्लिम वोटर्स के समीकरणों की वजह से कांग्रेस का पक्ष मजबूत दिख रहा है, लेकिन भीतरघात की भी आशंका है।

करौली-धौलपुर: बीजेपी-कांग्रेस में कांटे की टक्कर
करौली सीट पर भाजपा ने इंदु देवी को प्रत्याशी बनाया है। कांग्रेस से प्रत्याशी भजनलाल जाटव भी दो बार विधायक और एक बार मंत्री रह चुके हैं। इस सीट पर सांसद मनोज राजोरिया का टिकट काट कर भाजपा ने इंदु देवी को प्रत्याशी बनाया है। यहां एससी-एसटी वोटर निर्णायक स्थिति में रहते हैं।

बीकानेर: मजबूत दिख रहे मेघवाल
बीकानेर में इस बार भी बीजेपी ने मौजूदा कानून मंत्री और मोदी के नजदीक माने जाने वाले अर्जुनराम मेघवाल को ही अपना प्रत्याशी बनाया है। कांग्रेस ने उनके सामने पिछली गहलोत सरकार में मंत्री रहे गोविंदराम मेघवाल को उतारा है। वर्तमान में यहां बीजेपी मजबूत दिख रही है। कांग्रेस अपने परंपरागत वोट बैंक के सहारे है।

श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़: चुनाव जनरल वर्सेज रिजर्व सीट पर मोड़ने की कोशिश
श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ सीट पर बीजेपी ने अपना प्रत्याशी बदलकर चौंकाया है। प्रियंका बैलान प्रत्याशी हैं। कांग्रेस ने कुलदीप इंदौरा को प्रत्याशी बनाया है। यहां चुनाव जनरल कैटेगरी वर्सेज रिजर्व सीट हो गया है। यहां टक्कर तो नहीं, लेकिन जीत हार का नंबर कम कम रहेगा।

चुनाव इस बार जाति का
जोधपुर-बाड़मेर हाईवे पर बालोतरा से आगे रेखा राम (जाट) अपने ऊंटों के काफिले को लेकर जा रहे थे। बोले- इस बार जातिवाद का चुनाव है। मैं तो अपनी जाति के प्रत्याशी (कांग्रेस के उम्मेदाराम ) को वोट दूंगा। दूसरी जाति के लोग हमारे साथ मारपीट करते हैं और परेशान करते हैं।

जोधपुर-बाड़मेर हाईवे पर मिले रेखाराम ने बताया कि इस बार बाड़मेर का चुनाव जाति के आधार पर ही लड़ा और जीता जाएगा।

लोकसभा चुनाव में भाजपा के मुद्दे

  • 70 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों को फ्री इलाज, मुद्रा लोन 10 की जगह 20 लाख तक करने व गरीबों को घर का वादा।
  • साल 2047 में भारत को विकसित राष्ट्र बनाने और तीसरे टर्म में भारत को विश्व में तीसरे नंबर की इकोनोमी बनाने का सपना।
  • भ्रष्टाचार के खिलाफ एजेंसियों को खुली छूट देने का मुद्दा भी उठा रहे।
  • राम मंदिर, धारा 370 हटाना, हिन्दुत्व, सेफ बॉर्डर की भी बात।

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के मुद्दे

  • जाति आधारित जनगणना, आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से अधिक करने, किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी देने का वादा।
  • चुनावी बॉण्ड, राफेल एवं पेगासस आदि मामलों की जांच कराने का आश्वासन।
  • 30 लाख सरकारी नौकरियां देने और युवाओं को एक साल के लिए प्रशिक्षुता कार्यक्रम के तहत एक लाख रुपए देने का वादा।

नतीजों पर किन बड़े नेताओं का भविष्य टिका

  • वैभव गहलोत : पिछला लोकसभा चुनाव हार चुके। इस बार सीट बदली। प्रतिष्ठा का प्रश्न।
  • राजेंद्र राठौड़ : विधानसभा चुनाव हार चुके हैं। अब चूरू सीट पर भाजपा प्रत्याशी देवेंद्र झाझड़िया की जीत राजनीतिक भविष्य के लिए बेहद जरूरी।
  • राहुल कस्वां : भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आए। इस सीट पर जीत राजनीतिक प्रतिशोध और प्रतिष्ठा का सवाल बन गई है।

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राजनीतिक रणनीतिकार नब्ज पकड़े हुए हैं, लेकिन ठीक से इलाज नहीं हो पा रहा है। किसी की भी हालत गंभीर नहीं है। इसके बावजूद हालात चिंताजनक जरूर है। (पूरी खबर पढ़ें)

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