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इलेक्शन फैक्ट चेक 2019- क्या वाराणसी में मतदान से ज्यादा काउंटिंग हुई:लोग बोले- 11 लाख वोट पड़े, EVM से 12.87 लाख निकले; हमने सच जाना 3 घंटे पहले वाराणसी लोकसभा सीट एक बार फिर चर्चाओं में है। दरअसल, सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें एक शख्स दावा कर रहा है कि 2019 में वाराणसी में हुए लोकसभा चुनाव में 11 लाख वोट डाले गए, लेकिन EVM में 12 लाख 87000 वोट गिने गए। इस वीडियो को एक्स पर कई वेरिफाइड और नॉन वेरिफाइड यूजर ने शेयर किया। वीडियो में एक शख्स को कहते सुना जा सकता है-जानकारी के लिए मैं नरेंद्र मोदी का उदाहरण बता रहा हूं, वाराणसी में नरेंद्र मोदी चुनाव लड़ रहे थे, मोदी के चुनाव में 11 लाख लोगों ने वोट डाले, मशीन से कितना निकलना चाहिए था ? 11 लाख… कितने निकले 12 लाख 87 हजार…यानि 1 लाख 87 हजार वोट नरेंद्र मोदी के चुनाव क्षेत्र वाराणसी से ज्यादा निकले। वीडियो में यह शख्स आगे कहता है-नरेंद्र मोदी के चुनाव क्षेत्र में ऐसा हुआ और 373 लोकसभा सीटों का डेटा मेरे पास है, चुनाव आयोग ने लिखकर दिया। 373 लोकसभा सीटों पर जितने लोगों ने वोट डाले, उससे ज्यादा वोट निकले। एक्स यूजर मनीषा चौबे ने वायरल वीडियो को ट्वीट करते हुए लिखा-EVM का सबसे बड़ा सबूत ये रहा, 2019 में वाराणसी में EVM से कैसे जीत मिली, इसका सबसे बड़ा सबूत देखें,11 लाख वोटर थे, EVM में 12 लाख 87000 वोट गिनती किए गए? देखें ट्वीट: वेरिफाइड एक्स यूजर जीतू बरदक ने इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया को टैग करते हुए ट्वीट किया-क्या ये सच है… 2019 में वाराणसी चुनाव में 11 लाख वोट डाले गए, लेकिन EVM में 12 लाख 87000 वोट गिने गए। देखें ट्वीट: वहीं, एक्स यूजर वंदना सोनकर ने भी वायरल वीडियो को शेयर करते हुए ट्वीट किया और इसे ईवीएम से छेड़छाड़ का सबसे बड़ा सबूत बताया। एक्स पर वंदना को 1.25 लाख से अधिक लोग फॉलो करते हैं। देखें ट्वीट: वायरल दावे की पड़ताल के लिए हमने इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया की वेबसाइट पर 2019 लोकसभा चुनाव के ‘कॉन्स्टिट्वेंसी वाइज समरी’ को चेक किया। इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, वाराणसी में 2019 लोकसभा चुनाव के समय कुल मतदाताओं की संख्या 18 लाख 56 हजार 791 थी। वहीं, कुल 10 लाख 60 हजार 829 वोट डाले गए। इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया की वेबसाइट से प्राप्त डेटा। इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया की वेबसाइट से प्राप्त डेटा। जांच के दौरान हमें इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया का एक ट्वीट मिला जिसमें वायरल दावे का खंडन किया गया था। इलेक्शन कमीशन ने ट्वीट में लिखा था-आम चुनाव 2019 के दौरान वाराणसी में मतदाताओं और ईवीएम के जरिए डाले गए वोटों की संख्या मिसमैच होने के संबंध में एक वीडियो प्रकाश में आया है, वीडियो में किया गया दावा पूरी तरह से गलत और भ्रामक है। इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया ने अपने ट्वीट में आगे लिखा- वाराणसी में कुल मतदाता 18,56,791 थे। ईवीएम में डाले गए और गिने गए कुल वोट-10,58,744 और डाक वोट-2085 थे।

2019 में अरुणाचल प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में तेजु विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक कारिखो क्रि जीते।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार 9 अप्रैल को कहा, चुनाव में नामांकन के दौरान कैंडिडेट को सारी संपत्ति का खुलासा करने की जरूरत नहीं है। जब तक कि उससे वोटिंग में असर न पड़ता हो। जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस संजय कुमार की बेंच ने यह टिप्पणी पांच साल पुराने मामले पर सुनवाई करते हुए की।

साल 2019 में अरुणाचल प्रदेश की तेजु विधानसभा क्षेत्र से जीतकर आए निर्दलीय विधायक कारिखो क्री की गुवाहाटी हाईकोर्ट ने सदस्यता रद्द कर दी थी। इसके खिलाफ कारिखो ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी। कोर्ट ने अब लोअर कोर्ट के फैसले को पलट दिया।

कोर्ट ने कहा- चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को उनके या उनके आश्रितों के मालिकाना हक वाली हर चल संपत्ति का खुलासा करने की आवश्यकता नहीं है, जब तक कि वे काफी महंगी न हों।

कारिखो के खिलाफ दायर याचिका में याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि, कारिखो ने चुनाव लड़ने के लिए नामांकन दाखिल करते समय अपनी पत्नी और बेटे की तीन गाड़ियों का खुलासा नहीं किया था।

अब जानिए क्या है पूरा मामला…
2019 में अरुणाचल प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में तेजु विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक कारिखो क्रि जीते। चुनाव परिणाम आने के बाद, कांग्रेस उम्मीदवार नुनी तयांग ने एक चुनाव याचिका दायर की। जिसमें कारिखो की जीत को चुनौती दी गई।

तयांग ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 90 (ए) (सी) के तहत एक याचिका दायर की। उन्होंने तेजू सीट से क्रि की चुनावी जीत को रद्द करने की घोषणा की मांग की।

तयांग ने दावा किया कि कारिखो ने इलेक्शन नॉमिनेशन फाइल करते समय गलत डिटेल दी। हाईकोर्ट ने कारिखो के खिलाफ फैसला सुनाते हुए उनकी जीत को रद्द कर दिया।

2019 अरुणाचल प्रदेश चुनाव में कारिखो क्रि निर्दलीय चुनाव जीते थे।

सुप्रीम कोर्ट बोला- जब तक सामान लग्जरी नहीं, बताना जरूरी नहीं
हाईकोर्ट के फैसले को कारिखो ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा- चुनाव लड़ रहे किसी भी उम्मीदवार से जुड़ी हर जानकारी जानना वोटर का अधिकार नहीं है। सार्वजनिक पद के लिए उम्मीदवार को अपनी हर जानकारी बताना जरूरी नहीं। उसके पास निजता का अधिकार है।

कोर्ट ने कहा- उम्मीदवार को अपनी या परिवार के सदस्यों की हर उस वस्तु की जानकारी क्यों देनी चाहिए। जैसे कि कपड़े, जूते, क्रॉकरी, स्टेशनरी, फर्नीचर इत्यादि। जब तक कि वह इतनी कीमती न हो कि एक बड़ी संपत्ति बन जाए।

एक उदाहरण देते हुए कोर्ट ने कहा- यदि किसी उम्मीदवार या उसके परिवार के पास कीमती घड़ियाँ हैं, तो उनका खुलासा करना होगा क्योंकि वे उसकी लग्जरी लाइफ स्टाईल को दर्शाती हैं।

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