जयपुर में कांग्रेस मुख्यालय। कार्यालय के बाहर महेश जैन पान की दुकान चलाते हैं। बोले- इस बार तो राम मंदिर पर ही वोट पड़ेंगे। पेपरलीक, धारा 370 जैसे दूसरे इश्यू भी हैं, लेकिन राम मंदिर तो हर हिंदू से जुड़ा है।
अकेले महेश नहीं… बहुत से लोग हैं, जिनके लिए राम मंदिर ही सबसे बड़ा मुद्दा है। ऐसा भी नहीं है कि यही इकलौता मुद्दा है।
जयपुर ग्रामीण में कपड़ों के व्यापारी सांवरमल शर्मा लगातार बढ़ रही महंगाई से नाराज हैं। दौसा के विजय मीणा गुस्सा हैं कि सरकारी से लेकर प्राइवेट सेक्टर…कहीं नौकरी नहीं है। हर चुनाव में मुद्दा बनने वाला पानी इस बार भी लोगों की जुबान पर है।
राजस्थान में पहले फेज में 19 अप्रैल को 12 सीटों (श्रीगंगानगर, बीकानेर, चूरू, नागौर, झुंझुनूं, सीकर, जयपुर, जयपुर ग्रामीण, अलवर, भरतपुर, दौसा, करौली-धौलपुर) पर चुनाव होने हैं।
इन 12 सीटों में घूमने और लोगों से बात करने पर लोकसभा चुनावों में वोटिंग पर असर डालने वाले ये 4 बड़े मुद्दे समझ आते हैं।
1. राम मंदिर लोगों के इमोशन से जुड़ा है। साल 1992 में भी यहां के कई कार सेवक अयोध्या गए, जान गंवाई। हाल ही में अयोध्या दर्शन के लिए शुरू की गई आस्था ट्रेन में भी ये इमोशन दिख रहा है।
2. विधानसभा चुनाव में पेपरलीक बड़ा मुद्दा बना था। सीएम भजनलाल ने भी पद ग्रहण करते ही सबसे पहले पेपरलीक के खिलाफ ही एक्शन के आदेश दिए। लोकसभा चुनाव के बीच एसओजी लगभग हर दिन पेपरलीक में नए खुलासे कर रही है।
3. भाजपा ने विधानसभा चुनाव के घोषणा पत्र में 1.20 लाख नौकरियों का वादा किया है। इसे लेकर भी युवा सवाल पूछ रहे हैं- जाॅब कब मिलेगी या कांग्रेस की तरह ये भी घोषणा ही रह जाएगी।
4. हमेशा की तरह इस बार भी हर सीट के चुनावी मुद्दों की फेहरिस्त में पानी शामिल है। हालांकि ईआरसीपी को लेकर मध्य प्रदेश सरकार के साथ एमओयू हुआ है, लेकिन लोगों की मांग है कि असर धरातल पर दिखना चाहिए।
जयपुर: राम मंदिर और पेपरलीक ही मुद्दे
राजधानी जयपुर की लोकसभा सीट पर हिंदू वोटर्स के बीच राम मंदिर सबसे बड़ा मुद्दा है। पेपरलीक का मुद्दा युवा वोटर्स के बीच सबसे चर्चित है। पेपरलीक पर एसओजी के एक्शन पर भी युवा मुखर हैं।
जयपुर के मालवीय नगर में हमारी मुलाकात शंकर शर्मा से हुई। बोले- जयपुर शहर में राम मंदिर का मुद्दा आगे जा रहा है। मोदी का चेहरा और मोदी का काम भी मुद्दा है। सीएए का यहां ज्यादा असर नहीं है। पेपरलीक का विधानसभा चुनावों की तरह ही फर्क पड़ेगा।
जयपुर ग्रामीण : बढ़ती महंगाई बनी हुई है चुनौती
सुंदरपुरा गांव में सांवरमल शर्मा कपड़ों का कारोबार करते हैं। चुनाव का मुद्दा पूछा तो बोले- महंगाई ने कमर तोड़ रखी है। आम आदमी कैसे गुजारा करेगा? हमारे लिए तो यही मुद्दा है। राज्य सरकार का काम तो ठीक है लेकिन महंगाई कम नहीं हो रही है।
बगरू में शंकरलाल मिले। बोले- चुनावों में केंद्र सरकार के काम और राम मंदिर के मुद्दे का पूरा असर है। जैसे-जैसे वोटिंग का टाइम नजदीक आएगा, इंपैक्ट दिखेगा।
दौसा : घटती नौकरियां, पानी की किल्लत बड़े मुद्दे
बसवा तहसील के दुड़की गांव में हमारी मुलाकात गोपाल सिंह से हुई। बोले- मनमर्जी चल रही है, जो भी खिलाफ बोलता है, उसे जेल भेजा जा रहा है। ऐसा तो राजाओं के राज में भी नहीं होता था। दौसा में पानी नहीं है। रोज नहर लाने के वादे हो रहे हैं लेकिन धरातल पर कुछ नहीं है।
मीनवाड़ा निवासी विजय मीणा ने कहा- केंद्र सरकार नौकरियां खत्म कर रही है। सरकारी से लेकर प्राइवेट तक कहीं नौकरी नहीं है। भारी बेरोजगारी है। रोजगार और पानी बड़ा मुद्दा है। बड़ी-बड़ी बातें ही कर रहे हैं, लगता नहीं नहर ला पाएंगे।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे राकेश शिवकुमार भादुका ने कहा- पेपरलीक करने वालों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई है। ये सबसे बड़ी राहत है। हम बेरोजगार युवाओं के लिए तो यही सबसे बड़ा मुद्दा है।
सीकर : खरीदने पड़ रहे हैं टैंकर
चौमूं के कालूराम कहते हैं- हर गर्मी में पानी के टैंकर खरीदने पड़ते हैं। कई बार तो डिमांड ज्यादा होने के कारण वो भी नहीं मिलते। हर चुनाव में प्रत्याशी पानी उपलब्ध करवाने का वादा करते हैं, लेकिन आज तक पूरा नहीं हुआ।
चौमूं के योगेश कुमावत कहते हैं- हमारा इलाका सीकर से 100 किलोमीटर दूर है। जो सीकर सीट से जीतता है, वह दूरी के कारण चौमूं के विकास पर ध्यान नहीं दे पाता। यही वजह है कि विकास की रफ्तार सुस्त पड़ी है।
झुंझुनूं : सांसदों ने नहीं उठाए लोकल मुद्दे
इलाके के विनोद कुमार कहते हैं महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दे किसी सरकार से हल होते नहीं दिख रहे। कांग्रेस की सरकारों को बहुत देख लिया है, अब भाजपा से उम्मीद है। ये सरकार नहीं करेगी तो और विकल्प देखना पड़ेगा।
चूरू : खारा पानी और ट्रेन की कनेक्टिविटी नहीं
तारानगर के शराफत अली का कहना है कि खारे पानी की समस्या बरसों पुरानी है। आज तक समाधान नहीं हुआ। रेलवे से भी हमारा क्षेत्र अच्छे से नहीं जुड़ पा रहा। किसानों के सिंचाई जैसे मुद्दे ज्यों के त्यों खड़े हैं।
सुजानगढ़ के मदनलाल कहते हैं हम तो विकास को वोट देते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने विकास किया है। पीने और खेती के लिए पानी की परेशानी बनी हुई है। सरकार प्रयास करेगी, ये उम्मीद है।
नागौर : शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अलग मुद्दे
नागौर में बीजेपी-कांग्रेस-RLP में हुई प्रत्याशियों की अदला-बदली सबसे बड़ा टॉकिंग पॉइंट है। यहां के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में चुनावी मुद्दे अलग-अलग नजर आ रहे हैं। शहरों और बड़े कस्बों में राम मंदिर, धारा 370, CAA की चर्चा है तो गांवों में अवैध खनन और किसानों से जुड़े मुद्दे चर्चा में हैं।
व्यापारी अशोक कुमार ललवानी में गुस्सा है कि नागौर में आज तक किसी नेता में विकास का संकल्प नहीं दिखा। बोले-सड़कें खराब हैं और बाजार में ट्रैफिक व्यवस्था की हालत तो बद से बदतर है।
बीकानेर : शहर के बीच से गुजरता रेलवे ट्रैक सबसे बड़ी समस्या
शहर की सबसे बड़ी समस्या बीच बाजार से गुजरता रेलवे ट्रैक है। अमित गोलछा ने बताया कि हर बार यहां नेता आते हैं और समस्या से निजात दिलाने के नाम पर वोट लेकर चले जाते हैं।
लूणकरणसर में इलेक्ट्रिक सामान की दुकान चलाने वाले हरिदत्त सारस्वत ने बताया कि केंद्र सरकार ने कई अच्छे कार्य किए हैं। देश और दुनिया में भारत का बढ़िया नाम हुआ है। देश सुरक्षा, शिक्षा और विज्ञान के साथ ही हर क्षेत्र में मोदी सरकार नंबर वन रही है।
श्रीगंगानगर : किसान आंदोलन और एमएसपी बड़ा मुद्दा
किसान आंदोलन व फसलों की एमएसपी बड़ा मुद्दा है। सरदार राजविन्द्र सिंह ने बताया कि आंदोलन से देश का किसान एकजुट हुआ है। आंदोलन की अगुवाई देश में सिखों ने और पंजाब के किसानों ने की है। वो वोटर बीजेपी सरकार से काफी नाराज है।
सूरतगढ़ में सब्जी का ठेला लगाने वाले मोहम्मद सलीम उर्फ केजरीवाल ने बताया कि इस समय देश में बीजेपी की लहर है। मोहम्मद शकूर ने कहा कि चुनावों में कोई मुद्दा नहीं है और इस बार तो मोदी के चेहरे पर ही वोट पड़ेंगे।
भरतपुर : जाट आरक्षण की मांग
लोकसभा चुनावों से ऐन वक्त पहले जाट आरक्षण का बड़ा मुद्दा सामने आया है। जाट आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक नेम सिंह फौजदार ने बताया कि हमने 40 दिन तक महापड़ाव रखा था। सीएम के आश्वासन के बाद आंदोलन खत्म किया था। वादा किया था कि आचार संहिता से पहले मांग पूरी की जाएगी। अब हम घर-घर जाकर आरक्षण की मांग को मजबूत कर रहे हैं।
भारतभूषण शर्मा ने बताया कि भाजपा ने राम मंदिर जैसे बड़े मुद्दे को सुलझाया है। रामराज्य की नींव रखी जा चुकी है। मोदी ने भ्रष्टाचार पर रोक लगाई है। ब्रजेश सिंघाड़ा बोले कि भ्रष्टाचार बढ़ रहा है। पहले जो काम 10 रुपए में होता था अब 50 रुपए देने पड़ते हैं।
अलवर : समाज की अहीर रेजिमेंट की मांग
इस बार भी पानी की समस्या बड़ा मुद्दा है। बहरोड़ के प्रद्युम्मन यादव ने बताया कि भूजल स्तर नीचे गिर रहा है। राजस्थान में 1200 फीट तक सूखा है, जबकि पड़ोसी हरियाणा में 400 से 600 फीट पर पानी है।
चुनावों में अहीर रेजीमेंट का मुद्दा उठ रहा है। यहां करीब 4 लाख यादव मतदाता हैं। यादव समाज के अध्यक्ष भारत यादव बोले- अहीर रेजीमेंट हमारा हक है। जो यादव समाज की मांग पूरी करेगा, उसे ही समर्थन करेंगे।
करौली-धौलपुर : रेलवे लाइन की मांग
इलाके के राजीव ने बताया कि करौली और धौलपुर के लिए रेलवे लाइन की लंबे से समय मांग है। हर बार आश्वासन ही मिलता है। धौलपुर के मोहित अग्रवाल का कहना है कि गंगापुरसिटी से करौली होकर सरमथुरा रेल लाइन चालू की जानी चाहिए।
डालचंद ने बताया कि पानी की बड़ी समस्या है। शहर और ग्रामीण क्षेत्र में पानी की किल्लत रहती है। डांग क्षेत्र में सड़क की बहुत बुरी समस्या है। सड़क नहीं हाेने से बस भी नहीं चलती है। आने-जाने के लिए लोग प्राइवेट जीप और अन्य वाहनों का प्रयोग करते हैं।
मुद्दों पर एक्सपर्ट की राय
पॉलिटिकल पार्टियां किन मुद्दों पर चुनाव प्रचार कर रहीं
बीजेपी : फेस भी मोदी, मुद्दा भी मोदी
बीजेपी राम मंदिर, धारा 370 हटाना, हिन्दुत्व, सीमा सुरक्षा जैसे इमोशंस को भुनाने की कोशिश में है। साथ ही, 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने तथा मोदी को तीसरा टर्म दिया तो भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बनाने का वादा भी है। प्रचार में ‘मोदी की गारंटी’ छाई हुई है। इनमें किसानों के कल्याण, युवाओं के विकास, महिलाओं के सशक्तीकरण और दशकों से नजर अंदाज करने का आरोप लगाते हुए अब अंतिम छोर के कमजोर तबके के लोगों को मुख्य धारा में लाने की गारंटी शामिल है। भ्रष्टाचार के खिलाफ एजेंसियों को खुली छूट देने का मुद्दा भी उठाया जा रहा है।
कांग्रेस : महंगाई और बेरोजगारी से राहत का वादा
कांग्रेस का मुख्य मुद्दा है- मोदी सरकार पर संविधान और लोकतंत्र को खत्म करने के प्रयास के आरोप। कांग्रेस के बड़े-बड़े नेता हर चुनावी सभा में इन आरोपों को मुद्दा बना रहे हैं। इसके अलावा महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार को लेकर भी भाजपा को घेरने की कोशिश की जा रही है।ये भी स्टेबलिश करने की कोशिश की जा रही है कि किस तरह ईडी, सीबीआई व आईटी जैसी जांच एजेंसियों का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। आरोपों से इतर वादों की बात करें तो देश के एससी-एसटी व ओबीसी, जो वर्ग 70 फीसदी है, उसे जनसंख्या के अनुपात में फायदा नहीं देने के आरोप हैं। कांग्रेस सरकार आते ही जातीय जनगणना करवाकर फायदा पहुंचाने का वादा है। भूमिहीन किसानों को भूमि देने, बढ़ती महंगाई व बेरोजगारी से राहत देने का भी वादा है।
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