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JLF, पीयूष मिश्रा को दैनिक भास्कर द्वारका प्रसाद अग्रवाल सम्मान:बोले-डर जब हद से बढ़ता है, तब सॉल्यूशन मिलता है; किताब लॉन्च करने आए जगदीप धनखड़

JLF, पीयूष मिश्रा को दैनिक भास्कर द्वारका प्रसाद अग्रवाल सम्मान:बोले-डर जब हद से बढ़ता है, तब सॉल्यूशन मिलता है; किताब लॉन्च करने आए जगदीप धनखड़

जयपुर5 मिनट पहले
JLF में गीतकार पीयूष मिश्रा को श्री द्वारका प्रसाद अग्रवाल सम्मान दिया गया। पूर्व राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी किताब लॉन्च करने फेस्टिवल में पहुंचे। पूर्व सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ ने भ्रष्टाचार पर बात की।

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) में दैनिक भास्कर की ओर से इस वर्ष का श्री द्वारका प्रसाद अग्रवाल सम्मान लेखक-गीतकार-अभिनेता पीयूष मिश्रा को दिया गया। चार बाग में सम्मान समारोह में दैनिक भास्कर के मैनेजिंग डायरेक्टर गिरीश अग्रवाल और नेशनल एडिटर एल. पी. पंत ने पीयूष मिश्रा को सम्मान स्वरूप 2 लाख रुपए और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया।

रविवार को दैनिक भास्कर के विशेष टॉक शो में किताब ‘तुम्हारी औकात क्या है पीयूष मिश्रा’ पर चर्चा हुई। पीयूष मिश्रा ने कहा- डर जब हद से बढ़ जाता है, तब सॉल्यूशन मिलना शुरू हो जाता है। हर किसी के पास डर होता है, बस कोई अभिव्यक्त नहीं करता। मैंने अपना डर अभिव्यक्त किया है, इसलिए ज्यादा वाला डर खूबसूरत होता है।

JLF में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी पहुंचे। उन्होंने दामाद कार्तिकेय वाजपेई की किताब ‘द अनबिकमिंग’ को लॉन्च किया। कार्तिकेय पेशे से वकील हैं। सेशन में वरिष्ठ पत्रकार संजय पुगलिया ने भी कार्तिकेय की किताब पर विचार व्यक्त किए।

गीतकार पीयूष मिश्रा को श्री द्वारका प्रसाद अग्रवाल सम्मान प्रदान करते दैनिक भास्कर के मैनेजिंग डायरेक्टर गिरीश अग्रवाल और नेशनल एडिटर एल. पी. पंत।
‘तुम्हारी औकात क्या है पीयूष मिश्रा’ किताब पर बात करते हुए पीयूष मिश्रा ने अपने जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा की।
JLF में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने दामाद कार्तिकेय वाजपेई की किताब ‘द अनबिकमिंग’ को लॉन्च किया।

समाज में करप्शन, जज भी यहीं से आते हैं: पूर्व CJI चंद्रचूड़ JLF में पूर्व सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा- मैं भ्रष्टाचार को जस्टिफाई नहीं कर रहा, लेकिन जज भी सोसाइटी से आते हैं। सोसाइटी में करप्शन है। लेकिन जज से हायर कॉलिंग एक्सपेक्टेड है। हां, करप्शन है। इसे रोकने के लिए जवाबदेही तय करने के लिए एफिशिएंट सिस्टम चाहिए। गलत जजमेंट पर करप्ट कहना आसान है, लेकिन ट्रूथ देखना जरूरी है।

‘आइडियाज ऑफ जस्टिस’ सेशन में पूर्व सीजेआई ने कहा- जब मैं समलैंगिकता अपराधमुक्त करने वाला फैसला लिख रहा था तो मुझे लियोनार्ड कोहेन का कोट याद आया। वह कोट ‘डेमोक्रेसी इन सम डेंजर’ के बारे में था। मैंने सोचा कि ये फैसला फ्लोरिश वाला होना चाहिए। कुछ फैसले बीच रोड पर लिखे जाते हैं, कुछ में थोड़ा फ्लोरिश डालते हैं।

‘आइडियाज ऑफ जस्टिस’ सेशन में पूर्व सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ ने न्याय से जुड़े कई बिंदुओं पर चर्चा की।

प्रसून जोशी बोले- AI में इंसान जैसी क्रिएटिविटी-कल्पना नहीं ‘इमेजिन : द न्यू होराइजंस ऑफ क्रिएटिविटी’ सेशन में गीतकार प्रसून जोशी ने कहा- AI में वो रचनात्मकता और कल्पना नहीं है, जो मनुष्यों में होती है। AI एक टूल है। अगर हम इसे एक एक्सटेंशन के रूप में समझते हैं तो कोई आपत्ति नहीं है।

प्रसून जोशी ने कहा कि मेरे पिता एजुकेशन ऑफिसर थे। मेरी मां संगीत से जुड़ी हुई थीं। आज मैं दोनों की वजह से दोनों गुणों के साथ आगे बढ़ रहा हूं।

उन्होंने कहा- पहाड़ी इलाकों में आप पत्थरों को नीचे गिरे हुए देखते हैं, वो पत्थर आपको बेहद खूबसूरत लगते हैं, जैसे किसी ने तराशा हो। उन्हें ठोकरों ने तराशा है, मुझे भी उन्हीं ठोकरों ने तराशा है।

जेएलएफ में गीतकार प्रसून जोशी ने क्रिएटिविटी पर बात की।

पोलैंड के उपप्रधानमंत्री ने कहा- पुतिन अहंकारी पोलैंड के उप प्रधानमंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की ने कहा- रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपने अहम को आगे रखते हुए दूसरे देशों पर प्रहार कर रहे हैं। इसका असर अन्य सभी देशों की जियो पॉलिटिक्स पर पड़ रहा है।

सेशन ‘ए कॉन्टिनेंट इन क्राइसिस: रशिया, यूक्रेन एंड द यूरोपियन स्टोरी’ में सिकोरस्की ने कहा- रूस-चीन की बढ़ती नजदीकी रूस के दीर्घकालिक हित में नहीं है। रूस धीरे-धीरे चीन पर आर्थिक रूप से निर्भर होता जा रहा है और अपनी राष्ट्रीय संपदा चीनी उत्पादों पर खर्च कर रहा है। यह स्थिति रूस को कमजोर बना सकती है, क्योंकि चीन रूस पर अपनी आर्थिक शक्ति का उपयोग राजनीतिक प्रभाव हासिल करने के लिए कर सकता है।

‘ए कॉन्टिनेंट इन क्राइसिस: रशिया, यूक्रेन एंड द यूरोपियन स्टोरी’ सेशन में पोलैंड के उपप्रधानमंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की से राइटर नवतेज सरना ने बातचीत की।

वर्ल्ड वाइड वेब के जनक बोले- ऑनलाइन नफरत बढ़ रही ‘दिस इज फॉर एवरीवन’ सेशन में वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) के संस्थापक टिम बर्नर्स ली ने कहा- ऑनलाइन नफरत बढ़ रही है, क्योंकि प्लेटफॉर्म एल्गोरिदम पर अधिक निर्भर हैं। यदि कोई एल्गोरिदम आपको धोखा दे रहा है, तो संभव है कि आप अधिक प्रभावित होंगे।

इससे पहले, होटल क्लार्क्स आमेर में जेएलएफ के चौथे दिन (18 जनवरी) की शुरुआत ‘मॉर्निंग म्यूजिक: एओ नागा क्वायर’ से हुई।

देखिए, JLF की PHOTOS…

JLF के चौथे दिन रविवार को अपने पसंदीदा राइटर्स के सेशन सुनने उमड़ी भीड़।
आयरलैंड के पूर्व प्रधानमंत्री लियो वराडकर ने JLF के मंच पर अपना जन्मदिन मनाया। उन्होंने केक भी काटा।
JLF में डिस्प्ले किया गया यह रोबोट मानसरोवर के बेन्यान ट्री स्कूल के 5वीं क्लास के स्टूडेंट मयंक ने बनाया है। रोबोट में कई सेंसर लगे हैं, जो मोबाइल पर डेटा भेजते हैं।

पल-पल की अपडेट के लिए ब्लॉग देखिए…

अपडेट्स

59 मिनट पहले

जगदीप धनखड़ ने दामाद की किताब लॉन्च की

JLF में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के दामाद कार्तिकेय वाजपेई की किताब ‘द अनबिकमिंग’ लॉन्च हुई। कार्यक्रम में शामिल होंगे जगदीप धनखड़ भी होटल क्लार्क्स आमेर पहुंचे। धनखड़ और जेएलएफ के प्रोड्यूसर संजॉय के रॉय ने किताब को लॉन्च किया।

कार्तिकेय पेशे से वकील हैं। सेशन में वरिष्ठ पत्रकार संजय पुगलिया भी मौजूद रहे।

कार्तिकेय ने कहा- यह किताब एक ऐसी यात्रा पर बात करती है, जिसमें आप अपने अंदर देख सकें। हम सभी में कई काबिलियत होती हैं। हम सभी में शक्ति होती है। इस किताब में जो मुख्य किरदार है, वह एक क्रिकेटर है, जो कि अपनी कॉस्मिक एनर्जी को तलाश कर रहा है। अपने अंदर की ऊर्जा को, अपने अंदर की शक्ति को तलाशता है। आपके एक्शन के साथ स्थिरता बहुत जरूरी है। जब स्थिरता और एक्शन मिलता है। तब यह नायब होता है।

कार्तिकेय ने आगे कहा- मैं जब 11 साल का था। तब से खुद से यह सवाल करता हूं कि मैं खुद को कैसे खुद बना सकता हूं। रख सकता हूं। हम अक्सर केवल उस बात की चिंता के साथ बढ़ते हैं।

जब आप अपनी पांचों ज्ञानेंद्रियों के परे जाकर ध्यान देने की कोशिश करते हैं, तभी आप जान पाते हैं कि आपके भीतर क्या शक्ति है। मेडिटेशन आप करते नहीं हैं। जब आपकी पांचों इंद्रियां शांत और स्थिर रहती हैं। मेरी किताब में एक रेस्ट इन एक्शन का पाठ है। जो एक बार फिर से स्थिरता और एक्शन के एक होने की बात को समझाता है।

कार्तिकेय से जब पूछा गया कि आप सफलता को कैसे परिभाषित करते हैं। तो उन्होंने कहा कि किसी भी प्रोफेशनल व्यक्ति की सबसे बड़ी सफलता वह है, जब वह अपनी यात्रा में सीखे कि क्रिएटिविटी क्या है। क्रिएटिविटी अपने आप को, खुद को, अपने सत्य को स्वीकार करने के साहस की कला है। आप हमेशा यह सोचते हैं कि दुनिया आपको कैसे देखेगी। लेकिन जब तक आप खुद को एक्सप्रेस नहीं करेंगे। अपने अंदर की बात को नहीं बताएंगे। दुनिया की परवाह करेंगे। वह क्रिएटिविटी नहीं आएगी। यही अहम ब्रह्मास्मि का सिद्धांत कहता है।

हम हमेशा किसी बेहतर पल की चिंता में रहते हैं। ऐसे में वर्तमान के पलों को खोते जाते हैं। इसलिए आप हमेशा ऐसे वर्तमान पल जिन पर आपने ध्यान नहीं दिया, उनको इकट्‌ठा करते जाते हैं।

वहीं, संजय पुगलिया ने कहा कि एक बहुत ही जटिल टॉपिक की किताब को सरल तरीके से लिखा है। मुझे Gen-Z के लिए आसान भाषा में यह कहना पड़ेगा कि हर इंसान डेलूलू से अपनी जिंदगी शुरू करता है और सुलूलू पर खत्म करता है। यानी डिल्यूजन से सॉलिट्यूड तक का सफर तय करते हैं।

हमारा ईगो हमारा सबसे बड़ा दुश्मन है। इसको आप तभी जीत सकते हैं। जब आप खुद के साथ तो कम से कम ईमानदार हो जाएं। इस यात्रा को क्रिकेट की पृष्ठभूमि का इस्तेमाल करते हुए बड़ी आसानी से समझाया है।

यह पता होना चाहिए कि हमें वह मिलेगा, जिसके हम हकदार हैं। लेकिन हम यह सोचते हैं कि जब हम किसी ओहदे पर पहुंच जाएंगे। तब हमें सुनेंगे या नहीं, आपको यह पता होना चाहिए। आप खुश हैं या नहीं। आप खुद से कितनी बातें कर रहे हैं। हमें सुनना सीखना चाहिए। आमतौर पर हम जितना खुद को एक्सप्लेन करने में लगे रहते हैं। उससे अधिक हमें सुनना भी चाहिए।

05:57 PM18 जनवरी 2026

पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी JLF में पहुंचे

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी पहुंचे।

05:39 PM18 जनवरी 2026

‘यूथ बहुत जल्दबाजी करता है, लेकिन मुझे Gen-Z से प्यार है’

पीयूष मिश्रा ने कहा- मैं फूड पॉइजनिंग के साथ यहां आया हूं, क्योंकि मैं आप लोगों से मिलना चाहता था। यूथ बहुत जल्दबाजी करता है, लेकिन मैं Gen-Z से प्यार करता हूं। तुम लोग घिसना नहीं चाहते।

05:38 PM18 जनवरी 2026

पीयूष मिश्रा बोले- मैं भगवान नहीं, एक आम आदमी हूं

पीयूष मिश्रा ने कहा- पहले मैं लेफ्ट विचारधारा में था। 20 की उम्र में हर कोई बच्चा लेफ्ट में होता है। मैं थोड़ा ज्यादा ही हो गया था और हर किसी का विरोध करता रहता था। 20 साल बाद सब कुछ छोड़ दिया। अच्छा पति बनने, मुंबई में एक्टिंग करने और अच्छा बाप बनने के लिए निकल गया। मुझे लेफ्ट से बाहर निकलने में बहुत संघर्ष हुआ, यह आसान नहीं था।

अब मैं आध्यात्मिक हूं। मेरे मंच की सरगम के जो ऐसे गाने हैं जो बाहर नहीं आए हैं, कभी न कभी वो सामने आ ही जाएंगे। मैंने यह किताब यह समझाने के लिए लिखी है कि मैं भगवान नहीं, एक आम आदमी हूं।

05:36 PM18 जनवरी 2026

‘मैंने अधिकांश गाने थिएटर के लिए लिखे’

पीयूष मिश्रा ने कहा- मैंने अधिकांश गाने थिएटर के लिए लिखे हैं। ‘हुस्ना’ गाने के किरदार को लोग लाहौर में ढूंढने लग गए थे। ‘आरम्भ’ गाना मैंने फिल्म ‘गुलाल’ के लिए लिखा था।

अनुराग कश्यप मेरा प्रिय भाई है, उसके साथ काम करने में मजा आता है। कुछ संबंधों को डिस्कार्ड नहीं करना चाहिए। मिल गए तो चाय पी लेते हैं। हमारी विचारधारा अलग है। वो कभी काम लेकर आता है तो मैं कुछ पूछता भी नहीं हूं, मैं करके दे देता हूं।

05:29 PM18 जनवरी 2026

गीतकार बोले- फुटपाथ पर किसी के कंबल में सोया, रात को वो मर गया

पीयूष मिश्रा ने कहा- कलम पर भरोसा नहीं था, मैंने अधिकांश के नाम बदल दिए। मैं नहीं चाहता था कि ज्यादा कुछ नहीं बोल दूं किसी एक्टर के लिए। अपना नाम भी बदल दिया, इसलिए किसी दूसरे के नाम बदलने में दिक्कत नहीं आई।

पीयूष मिश्रा ने आगे कहा- संघर्ष के दिनों में मैं मुंबई के फुटपाथों पर सोया करता था। स्मैक पिया करता था। मेरे पास कंबल नहीं था। एक रात स्मैक के नशे में धुत होकर मैं फुटपाथ पर एक आदमी के साथ उसी के कंबल में सो गया।

रात के किसी पहर उस शख्स की मौत हो गई, लेकिन मुझे इसका एहसास नहीं हुआ। सुबह आंख खुली तो मैं एक मुर्दे के साथ लेटा थे। आज भी मैं दादर से गुजरता हूं, तो वो याद आ जाता है।

उन्होंने कहा- साफ कहना सुखी रहना, उसे थोड़ी देर खराब लगेगा, लेकिन बाद मैं उसको वह सही लगेगा।

05:27 PM18 जनवरी 2026

पीयूष मिश्रा बोले- डर जब हद से बढ़ जाता है, तब सॉल्यूशन मिलना शुरू हो जाता है

पीयूष मिश्रा ने कहा- डर जब हद से बढ़ जाता है, तब सॉल्यूशन मिलना शुरू हो जाता है। हर किसी के पास डर होता है, बस कोई अभिव्यक्त नहीं करता। मैंने अपना डर अभिव्यक्त किया है, इसलिए ज्यादा वाला डर खूबसूरत होता है।

युवाओं को संदेश देते हुए कहा- जिंदगी एक बार मिली है, इसलिए वही करो, जो तुम करना चाहते हो। अगर सफल होगे तो किसी की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी, सिर्फ तुम्हारे अचीवमेंट्स होंगे।

05:26 PM18 जनवरी 2026

पीयूष मिश्रा बोले- साल 2000 में युवा मुझे भगवान मानने लगे थे

दैनिक भास्कर का विशेष टॉक शो भी हुआ। इसमें किताब ‘तुम्हारी औकात क्या है पीयूष मिश्रा’ पर चर्चा हुई। पीयूष मिश्रा ने कहा कि साल 2000 के आस-पास मुझे युवा भगवान मानने लगे थे। मैं सोचता था कि कोई मेरा जीवन देख लेगा तो क्या सोचेगा। इस पर मैंने खुद को बदला। आज वो पीयूष मिश्रा तो हूं ही नहीं।

05:16 PM18 जनवरी 2026

पीयूष मिश्रा को श्री द्वारका प्रसाद अग्रवाल सम्मान

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) में दैनिक भास्कर ने इस वर्ष का श्री द्वारका प्रसाद अग्रवाल सम्मान लेखक और गीतकार पीयूष मिश्रा को प्रदान किया। उन्हें सम्मान स्वरूप 2 लाख रुपए और प्रशस्ति पत्र दिया गया। चार बाग के मंच पर सम्मान समारोह में दैनिक भास्कर के मैनेजिंग डायरेक्टर गिरीश अग्रवाल और नेशनल एडिटर एल. पी. पंत भी उपस्थित थे।

पीयूष मिश्रा एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी कलाकार हैं, जो अभिनेता, संगीत निर्देशक, गायक और पटकथा लेखक के रूप में भी जाने जाते हैं। उन्होंने मकबूल, गुलाल और गैंग्स ऑफ वासेपुर जैसी प्रसिद्ध फिल्मों के लिए यादगार गीत लिखे हैं।

उनका बैंड बल्लीमारान काफी लोकप्रिय है, और उन्होंने आरंभ है प्रचंड बोल… और इक बगल में चांद होगा… जैसे कई शानदार गीत बॉलीवुड को दिए हैं। इस सम्मान की शुरुआत 2016 में हुई थी, और इससे पहले प्रभात रंजन, मनोज मुंतशिर शुक्ला, इरशाद कामिल और स्वानंद किरकिरे जैसी प्रतिष्ठित हस्तियों को सम्मानित किया जा चुका है।

05:06 PM18 जनवरी 2026

WWW के जनक बोले- ऑनलाइन नफरत बढ़ रही है, AI से खतरा

‘दिस इज फॉर एवरीवन’ सेशन में वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) के संस्थापक टिम बर्नर्स ली ने कहा- ऑनलाइन नफरत बढ़ रही है, क्योंकि प्लेटफॉर्म एल्गोरिदम पर अधिक निर्भर हैं। यदि कोई एल्गोरिदम आपको धोखा दे रहा है, तो संभव है कि आप अधिक प्रभावित होंगे।

जब उनसे AI से होने वाले लाभ और हानियों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने जवाब दिया कि एआई एक उपकरण है, जो आपकी सहायता कर सकता है। एआई का उपयोग एक उपकरण के रूप में करना सबसे अच्छा है। हालांकि, एआई अभी भी अपने निर्माता से कम बुद्धिमान है। लेकिन अगर किसी ने एआई को इतना बुद्धिमान बना दिया कि वह हमसे आगे निकल जाए, तो यह हमारे लिए खतरा बन जाएगा।

04:54 PM18 जनवरी 2026

आयरलैंड के पूर्व पीएम बोले- ऋषि सुनक बिजनेस करना चाहते थे, पर पहल नहीं करते थे

ब्रेग्जिट पर आयरलैंड के पूर्व पीएम लियो एरिक वराडकर ने कहा कि मैंने तीन ब्रिटिश प्रधानमंत्रियों के साथ उस दौर में काम किया है। ब्रिटेन के लोगों ने बहुत तेजी से प्रधानमंत्री बदले। जहां ऋषि सुनक ऐसे व्यक्ति हैं, जो आपसे बिजनेस करना चाहते हैं, लेकिन पहल नहीं करेंगे। वहीं, बोरिस जॉनसन के साथ बारगेनिंग करने में बहुत मुश्किल है।

राजनीति में उतार-चढ़ाव होते हैं। कई बार पत्रकारों को खबरें मिल जाती हैं, लेकिन राजनीति में खबरें लीक होती रहती हैं। एक समय आया, जब पुलिस ने करीब एक हफ्ते मुझसे पूछताछ की। वह मुश्किल समय था, न केवल इसलिए कि मेरा कॉन्फिडेंस कम हुआ, बल्कि इसलिए भी कि मुझसे गलती हुई थी। मैंने किसी को वो बात बताई, जो मुझे नहीं बतानी चाहिए थी।

कोविड के समय में आयरलैंड में मौतों का आंकड़ा बहुत कम रहा। हमने सही समय पर नीतियां बनाईं और लागू कीं। वैक्सीनेशन में भी हमने बेहतर काम किया। जब मुझे डॉक्टरों ने कोविड से पहले रिपोर्ट दिखाई तो उस रिपोर्ट ने मुझे परेशान कर दिया, क्योंकि कई बार एक डॉक्टर के सामने बहुत मुश्किल निर्णय लेने का समय आता है। आप आईसीयू में उस व्यक्ति को रखते हैं, जो सबसे ज्यादा बीमार हो, लेकिन उस व्यक्ति को सही होने में 20 दिन लग सकते हैं। इन सब बातों ने मुझे डराया।

04:48 PM18 जनवरी 2026

‘भारत में नेताओं तक पहुंचना मुश्किल, आयरलैंड में आसान’

आयरलैंड के पूर्व पीएम लियो एरिक वराडकर ने कहा कि ट्रम्प संयुक्त राष्ट्र में ज्यादा दिलचस्पी नहीं रखते हैं। रूस, यूक्रेन के कारण और चीन भी खास महत्व नहीं देता है। मुझे लगता है संयुक्त राष्ट्र में सुधार की आवश्यकता है। लेकिन दुनिया के लीडर्स इसमें रुचि नहीं ले रहे हैं।

जब अंग्रेजों ने आयरलैंड पर कब्जा करने की कोशिश की तो उन्होंने कहा कि किंग ऑफ इंग्लैंड, लार्ड ऑफ आयरलैंड भी हो सकते हैं। क्योंकि वे पोप की बात मानते हैं। इसलिए मैं फिलिस्तीनियों की भावना भी समझ सकता हूं। मुझे लगता है अमेरिका इसे नहीं समझ सकता, क्योंकि वह इजरायल के बहुत करीब है।

जब उनसे उनके नेता की तरह अनुभव पर पूछा तो उन्होंने कहा कि कई बार ऐसा होता है। आप पर हमेशा लोगों की नजर रहती है। निजता की भी समस्या रहती है। भारत जैसे देश में जब राजनेता सिक्योरिटी से घिरे रहते हैं। इसलिए लोगों का उन तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। ऐसा आयरलैंड में नहीं है।

04:25 PM18 जनवरी 2026

आयरलैंड के पूर्व पीएम बोले- ट्रम्प से मिलना राजा से मिलने जैसा अनुभव

  • आयरलैंड के पूर्व प्रधानमंत्री लियो एरिक वराडकर ने JLF में अपनी किताब ‘स्पीकिंग माई माइंड’ पर चर्चा की। अमेरिका के साथ संबंधों पर बात करते हुए वराडकर ने डोनाल्ड ट्रम्प पर कहा- उनसे मिलना किसी राजा से मिलने जैसा अनुभव होता है। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि अच्छी बात यह है कि उनके सामने घुटने टेककर नमस्कार नहीं करना पड़ता।
  • वराडकर ने ट्रम्प के पहले कार्यकाल और अब के संभावित कार्यकाल के बीच अंतर बताते हुए कहा-पहले के कार्यकाल में वे चेक एंड बैलेंस करते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं कर रहे हैं।
  • ट्रम्प की नोबेल शांति पुरस्कार पाने की इच्छा पर वराडकर ने कहा- वे किसी को भी यह पुरस्कार उनसे चुराने नहीं देंगे। वराडकर ने ग्रीनलैंड की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि किसी का भी घर केवल रियल एस्टेट बिजनेस के लिए नहीं ले लेना चाहिए।
  • ट्रम्प के टेरिटोरियल एक्सपेंशन वाले भाषणों का जिक्र करते हुए कहा कि वे अपनी तुलना जेम्स के पोक से करते हैं और उन्हें लगता है कि वे अगले राष्ट्रपति होंगे, जो अमेरिका की सीमाओं को बढ़ाएंगे, जो हम सभी के लिए मुश्किल होने वाला है।
  • भारत के बारे में आयरलैंड के पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि यहां आना अच्छा है और पिछले 20 साल में इस देश ने बहुत तरक्की की है। वे हर साल यहां आना चाहेंगे और उन्हें लगता है कि भारत एक ऐसा देश बनेगा, जो दुनिया को लीड करने वाले देशों में से एक होगा। उन्होंने भारत में कानून का शासन, लोकतंत्र और मानवाधिकारों की सराहना की, जो इसे यूरोपीय देशों के साथ जोड़ते हैं
04:11 PM18 जनवरी 2026

पूर्व CJI बोले-समाज में करप्शन है, जज भी यहीं से आते हैं

उमर खालिद के केस के सवाल पर पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा- मैं अब जज के तौर पर नहीं, नागरिक के तौर पर बोल रहा हूं। मैं इस केस को समझाने के लिए कानून को सरलता से समझाता हूं। किसी भी दोषसिद्धि से पहले जमानत मिलना अधिकार का मामला है। क्योंकि हमारा कानून इनोसेंस की पूर्वधारणा पर टिका है। हर आरोपी निर्दोष माना जाता है, जब तक ट्रायल में दोषी साबित न हो। प्री-ट्रायल बेल पनिशमेंट नहीं हो सकती। अगर 5-7 साल अंडरट्रायल रहकर बरी हो गया, तो खोया समय कैसे कंपनसेट करोगे?

बेल के लिए मना कब करते हैं, इसे आसान उदाहरण से समझिए। मान लो सीरियल रेपिस्ट-मर्डरर 6-7 रेप-मर्डर के आरोप में गिरफ्तार है। अगर छोड़ दिया तो सोसाइटी में अपराध दोहरा सकता है। ये क्लासिक केस है बेल डिनाय का।

दूसरा, अगर बेल पर छूटने के बाद ट्रायल के लिए उपलब्ध न रहे, भाग जाए। तीसरा, एविडेंस से छेड़छाड़ करे। अगर ये तीनों एक्सेप्शन न हों, तो बेल नियम है। आज की प्रॉब्लम ये है कि नेशनल सिक्योरिटी वाले कानून इनोसेंस को गिल्ट से रिप्लेस कर देते हैं।

पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया चंद्रचूड़ ने आगे कहा- कोर्ट को चेक करना चाहिए कि नेशनल सिक्योरिटी सच में इन्वॉल्व है या नहीं, और डिटेंशन प्रोपोर्शनल है या नहीं। वरना लोग सालों जेल में सड़ते रहते हैं। आखिरी पॉइंट, क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम की प्रॉब्लम ये है कि ट्रायल रीजनेबल टाइम में खत्म नहीं होते। अगर ऐसा है, तो आर्टिकल 21 के तहत राइट टू स्पीडी ट्रायल वायलेट होता है। भले ही कोई कानून बेल डिनाय करे, कॉन्स्टिट्यूशन सुप्रीम है। इसलिए एक्सेप्शन न हों तो बेल मिलनी चाहिए।

खालिद को जेल में 5 साल हो गए। मैं अपनी कोर्ट की आलोचना करने में हिचकिचा रहा हूं, क्योंकि साल भर पहले मैं इंस्टीट्यूशन लीड कर रहा था। लेकिन ये प्रिंसिपल्स बताते हैं कि कंडीशंस लगा सकते हो, लेकिन एक्सपीडिशस ट्रायल का हक देखना पड़ेगा। अगर ट्रायल नहीं हो सकता, तो बेल रूल है।

पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा- हाईकोर्ट और जिला अदालतों में बेल न देने की आदत है। चिंता की बात है। जिला अदालतें पहला इंटरफेस है। इसकी वजह, कंट्री में अथॉरिटी पर डिस्ट्रस्ट का कल्चर है। जज सोचते हैं, बेल दी तो मोटिव पर सवाल होगा। फाइनेंशियल फ्रॉड के केस में जज की इंटरग्रिटी पर शक जाएगा। बेहतर है हाईकोर्ट को जाने दो। नतीजा ये है कि सुप्रीम कोर्ट पर 70,000 केस सालाना आ रहे हैं।

वहीं, यदि डिस्ट्रिक्ट जज गलत बेल दे, जैसे दहेज हत्या केस में, रिवर्स करो। लेकिन मोरल दबाव मत डालो। ये इकोसिस्टम बनाता है, जहां जज डरते हैं। हाईकोर्ट की स्मॉल ऑब्जर्वेशन करियर डिस्ट्रॉय कर देती है। प्रमोशन पर असर पड़ता है। ये ट्रायल जज के असेसमेंट का इश्यू है।

डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा- मैं भ्रष्टाचार को जस्टिफाई नहीं कर रहा, लेकिन जज भी सोसाइटी से आते हैं। सोसाइटी में करप्शन है। लेकिन जज से हायर कॉलिंग एक्सपेक्टेड है। हां, करप्शन है। इसे रोकने के लिए जवाबदेही तय करने के लिए एफिशिएंट सिस्टम चाहिए। गलत जजमेंट पर करप्ट कहना आसान है, लेकिन ट्रूथ देखना जरूरी है।

04:00 PM18 जनवरी 2026

पूर्व CJI बोले- कुछ फैसले बीच रोड पर लिखे जाते हैं, कुछ में थोड़ा फ्लोरिश डालते हैं

‘आइडियाज ऑफ जस्टिस’ सेशन में पूर्व सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा- मैं बेबी बूमर पीढ़ी का हूं, लेकिन मेरी 2 बेटी हैं, जो स्पेशल नीड्स वाली हैं और Gen-Z हैं। तो अगर मुझे उनकी जिंदगी से जुड़ा रहना है, तो मुझे Gen-Z के काम करने का तरीका फॉलो करना पड़ेगा।

अपनी किताब का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ये स्पीचेज की किताब है। सख्त कानूनी किताब नहीं है। रेफरेंस देखें तो अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट, इंडियन सुप्रीम कोर्ट, फिलॉसफर जैसे- जॉन स्टुअर्ट मिल, कांट वगैरह की उम्मीद के मुताबिक चीजें हैं।

जब मैं समलैंगिकता अपराधमुक्त करने वाला फैसला लिख रहा था तो मुझे लियोनार्ड कोहेन का कोट याद आया। वह कोट ‘डेमोक्रेसी इन सम डेंजर’ के बारे में था। मैंने सोचा कि ये फैसला फ्लोरिश वाला होना चाहिए। कुछ फैसले बीच रोड पर लिखे जाते हैं, कुछ में थोड़ा फ्लोरिश डालते हैं।

03:30 PM18 जनवरी 2026

आयरलैंड के पूर्व पीएम ने मंच पर मनाया जन्मदिन

आयरलैंड के पूर्व प्रधानमंत्री लियो वराडकर ने JLF के मंच पर अपना जन्मदिन मनाया। वहां मौजूद लोगों ने उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान उन्होंने केक भी काटा।

02:31 PM18 जनवरी 2026

JLF में उमड़ी लिटरेचर लवर्स की भीड़

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में रविवार को भारी भीड़ उमड़ी। वहीं, जो लोग फिजिकल रूप से जयपुर नहीं पहुंच सकते, उनके लिए आयोजकों ने वर्चुअल सेशन रजिस्ट्रेशन पूरी तरह फ्री रखा है।

01:30 PM18 जनवरी 2026

प्रसून जोशी ने दादी को बताया अपना सबसे बड़ा रोल मॉडल

प्रसून जोशी ने बताया- मेरा पहला कविता संग्रह मात्र 17 साल की उम्र में प्रकाशित हो गया था। मध्यवर्गीय परिवार से आने वाले किसी भी रचनात्मक व्यक्ति के लिए यह राह आसान नहीं होती।

प्रसून जोशी ने अपनी दादी को अपना सबसे बड़ा रोल मॉडल बताते हुए कहा कि उत्तराखंड के एक गांव से आने वाली उनकी दादी निरक्षर थीं। पति का निधन कम उम्र में हो गया था, लेकिन उन्होंने 18-19 साल की उम्र में पढ़ना-लिखना सीखा और बाद में एक स्कूल की प्रिंसिपल के पद से सेवानिवृत्त हुईं। मेरे सामने वह जज्बे और आत्मनिर्भरता की मिसाल थीं।

01:24 PM18 जनवरी 2026

इनोवेशन को ‘जुगाड़’ कहना गलत

प्रसून जोशी ने ‘जुगाड़’ शब्द के लिए महत्वपूर्ण बात कही और लोगों को इस शब्द को अपने बोलचाल से हटाने पर जोर दिया। हम नवाचार को जुगाड़ कहकर उसकी अहमियत कम कर देते हैं, जबकि इनोवेशन एक गंभीर, सोच-समझकर किया गया रचनात्मक प्रयास होता है।

जुगाड़ एक तात्कालिक समस्या का समाधान हो सकता है, लेकिन इनोवेशन एक दीर्घकालिक और स्थायी समाधान होता है। जुगाड़ और इनोवेशन को एक मानना गलत है, क्योंकि इससे हम नवाचार की शक्ति और महत्व को कम आंकते हैं।

01:23 PM18 जनवरी 2026

युवाओं को जामवंत जैसे मार्गदर्शक की जरूरत: प्रसून

‘इमेजिन : द न्यू होराइजंस ऑफ क्रिएटिविटी’ सेशन में प्रसून जोशी ने कहा- आज के युवाओं को ऐसे लोगों की जरूरत है, जो उन्हें उनकी असली ताकत का एहसास करा सकें। उन्होंने हनुमान जी का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि किस तरह जामवंत ने उन्हें उनकी भूली हुई शक्तियां याद दिलाई थीं, जब वे समुद्र लांघने में संकोच कर रहे थे। उसी तरह आज के समय में भी ऐसे लोगों की जरूरत है, जो युवाओं को उनकी भुजाओं की ताकत और क्षमता का बोध करा सकें और उन्हें अपनी सीमाओं से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकें।

01:19 PM18 जनवरी 2026

यूक्रेन युद्ध के बाद चीन को रणनीतिक लाभ मिला

  • रूस-चीन संबंधों पर सिकोरस्की ने कहा- यूक्रेन युद्ध के बाद चीन को रणनीतिक लाभ मिला है। रूस अब सस्ते दामों पर तेल बेचने को मजबूर है। वह हाई-क्वालिटी सामान, इंटरनेट और साइबर सेवाओं के लिए चीन पर निर्भर होता जा रहा है।
  • उन्होंने चिंता जताई कि बदले में रूस उत्तर कोरिया को मिसाइल और न्यूक्लियर तकनीक दे रहा है। इससे वैश्विक अस्थिरता और बढ़ सकती है। यह एक खतरनाक प्रवृत्ति है, जो अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करती है।
  • कूटनीति पर उन्होंने कहा कि बातचीत केवल दोस्तों से नहीं होती। यह विरोधियों और दुश्मनों से भी होती है। असली महत्व बातचीत की गुणवत्ता का होता है, न कि केवल संवाद का होना।
01:17 PM18 जनवरी 2026

रूस-यूक्रेन युद्ध केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं : सिकोरस्की

  • पोलैंड के उपप्रधानमंत्री सिकोरस्की ने कहा- रूस-यूक्रेन युद्ध केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं है। यह पूरे यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक गंभीर चुनौती है। यह युद्ध यूरोप के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है।
  • पोलैंड अपनी सुरक्षा को मजबूत करने के लिए GDP का 4.7 प्रतिशत रक्षा पर खर्च कर रहा है। वह यूरोपीय सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
  • सिकोरस्की ने कहा- रूस भरोसे की बात करता है, लेकिन उसके कर्म कुछ और कहते हैं। कीव (यूक्रेन) पर हमले और लगातार सैन्य धमकियां इस तथाकथित भाईचारे की सच्चाई उजागर करती हैं।
01:05 PM18 जनवरी 2026

आज जियो पॉलिटिक्स पर होगी बात

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