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नोएडा में कार समेत दलदल में गिरा इंजीनियर, मौत:80 मिनट तक मदद के लिए चिल्लाता रहा; पिता को फोन कर कहा- मैं मरना नहीं चाहता

नोएडा में कार समेत दलदल में गिरा इंजीनियर, मौत:80 मिनट तक मदद के लिए चिल्लाता रहा; पिता को फोन कर कहा- मैं मरना नहीं चाहता

गौतम बुद्ध नगर26 मिनट पहले

नोएडा में घने कोहरे की वजह से साफ्टवेयर इंजीनियर की दलदल में गिरकर मौत हो गई। वह करीब 80 मिनट तक पिता के सामने चिल्लाता रहा। उनसे फोन कर कहा- पापा मुझे बचा लो, मैं मरना नहीं चाहता। इसके बाद कार समेत नाले के पानी से भरे 30 फीट गहरे दलदल में समा गया।

इंजीनियर युवराज मेहता अपनी ग्रैंड विटारा कार से गुरुग्राम से नोएडा के सेक्टर-150 टाटा यूरिका पार्क जा रहे थे। रास्ते में एटीएस ले ग्रांड के पास कार नाले की दीवार तोड़ते हुए 30 फीट गहरे पानी से भरे दलदल में गड्ढे में गिर गई।

युवराज की कार गड्ढे में गिरते ही दलदल में समाने लगी। युवराज किसी तरह कार से निकलकर उसके ऊपर चढ़ गए। पिता को फोन करके पूरी घटना बताई। डायल-112 पर सूचना देकर पिता मौके पर पहुंचे। प्रभारी निरीक्षक सर्वेश सिंह भी फोर्स के साथ वहां आए। दमकल कर्मी भी छोटी-बड़ी क्रेन के साथ पहुंचे।

युवराज से कुछ ही मीटर दूर पिता और तमाम फोर्स थी, लेकिन कोहरे की वजह से वह एक-दूसरे को देख नहीं पा रहे थे। वह मोबाइल का टॉर्च जलाकर चिल्लाता रहा- पापा मुझे बचा लो, मेरी कार डूब रही है। कुछ ही समय में उसकी आवाज आनी बंद हो गई। करीब ढाई घंटे बाद उसका शव निकाला गया। घटना शुक्रवार देर रात की है।

पहले देखिए 4 तस्वीरें…

ये नाले की रेलिंग है, जिसे तोड़ते हुए कार गड्ढे में गिरी।
कार नाली को पार करते ही नाले के पानी से भरे दलदल में गिर गई।
युवक को बचाने के लिए रेस्क्यू टीम नाले में उतरी। तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
घने कोहरे की वजह से कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। ढाई घंटे में युवक के शव को निकाला गया।

अब पढ़िए पूरी घटना…

16 जनवरी की रात करीब 12 बजे युवराज मेहता (27) अपनी ग्रैंड विटारा कार से नोएडा के सेक्टर-150 टाटा यूरिका पार्क जा रहे थे। सेक्टर-150 मोड़ पर यूटर्न था। कोहरे की वजह से उन्हें आगे का रास्ता नहीं दिखा और उनकी कार नाले को तोड़ते हुए पानी से भरे प्लॉट के गड्ढे में गिर गई। मॉल के बेसमेंट के लिए यहां 30 फीट का गड्ढा खोदा गया था।

युवराज किसी तरह डूबती कार से बाहर निकलकर उसकी छत पर चढ़ गए। 12.20 बजे उन्होंने अपने पिता को फोन करके हादसे की जानकारी दी। पिता ने तुरंत डायल-112 पर घटना की सूचना दी। कुछ ही मिनट में पिता वहां पहुंच गए। करीब 30 मिनट बाद पुलिस और दमकल विभाग की टीमें पहुंची। रात 1.15 बजे एसडीआरएफ की टीम भी पहुंची।

युवराज चिल्लाते रहे- पापा मुझे बचा लो। कोई आ जाओ। मेरी कार डूब रही है।

NDRF के पहुंचने से पहले डूब चुका था उस समय घने कोहरे की वजह से युवराज की सिर्फ आवाजें ही सुनाई दे रही थी। युवराज करीब 80 मिनट तक चिल्लाता रहा कि कोई मुझे बचा लो। कार जल्दी ही डूब जाएगी। लेकिन कोई उसकी मदद नहीं कर सकता। फिर पौने दो बजे के करीब गड्ढे भरे पानी में कार समेत युवराज डूब गए। 1.55 पर एनडीआरएफ की टीम भी गाजियाबाद से मौके पर पहुंची। सुबह करीब 4:30 शव को बाहर निकाला गया।

‘कोई भी पानी में उतरने को तैयार नहीं था’ घटना के चश्मदीद मुनेंद्र, जो एक डिलीवरी बॉय है। उन्होंने बताया- रात में डिलीवरी करते समय मैंने घटनास्थल पर भीड़ देखी। पुलिस भी मौजूद थी। एक लड़का मोबाइल की लाइट जलाकर मदद के लिए चिल्ला रहा था। लेकिन कोई भी व्यक्ति पानी में उतरने को तैयार नहीं हुआ।

पुलिस ने भी पानी बहुत ठंडा और सरिया होने का हवाला देते हुए पानी में उतरने से इनकार कर दिया था। इसके बाद मैंने हिम्मत करते हुए अपनी कमर पर रस्सी बांधी और पानी में उतरने का प्रयास किया। लेकिन अंधेरा और कोहरा होने के कारण मुझे कुछ भी दिखाई नहीं दिया।

डिलीवरी बॉय ने बताया- जब आवाज बंद हुई, तो मैं अकेले लड़के को बचाने कूदा। तो वहां मुझे कुछ नहीं मिला।

पिता एसबीआई से रिटायर्ड सेक्टर-150 स्थित टाटा यूरेका पार्क सोसायटी निवासी राजकुमार मेहता भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) से निदेशक के पद से रिटायर्ड हैं। उनकी पत्नी की कुछ साल पहले बीमारी से मौत हो गई थी। बड़ी बेटी की शादी हो चुकी है। वह यूनाइटेड किंगडम (यूके) में रहती है। युवराज मेहता एकलौता बेटा था, जो गुरुग्राम के सेक्टर-54 स्थित डनहमबी इंडिया कंपनी में साफ्टवेयर इंजीनियर था।

हादसे के बाद वहां मलबा गिराया घटना के बाद लोगों ने घटनास्थल पर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा- ये हादसा सिर्फ नोएडा प्राधिकरण की लापरवाही की वजह से हुआ। इस कट पर पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। जिसके चलते कई बार प्राधिकरण को यहां बेरिकेडिंग और रिफ्लेक्टर लगाने के लिए कहा गया, लेकिन यहां कुछ नहीं किया गया। जब मामला बढ़ा तो, प्राधिकरण ने देर शाम घटनास्थल के पास सैकड़ों टन मलबा गिरा दिया।

हादसे के बाद नाले से पहले प्राधिकरण ने मलबा डाला।
नाले की दीवार के बाद करीब 30 फीट गहरा गड्‌ढा है, जो कोहरे की वजह से दिख नहीं रहा है।

रेस्क्यू देर से शुरू हुआ दरअसल, ये प्लाट एससी-02 सेक्टर-150 है। ये प्लाट अभी खाली है। इसपर एक मॉल बनाया जाना था। बेसमेंट के लिए जमीन खोदी गई थी, लेकिन किसी वजह से मॉल का निर्माण नहीं हो सका। इसमें बगल के नाले से पानी भर गया था। जोकि दलदल का रूप ले लिया।

लोगों का कहना है कि घटना करीब 12 बजे की है। कोहरे की वजह से समय से रेस्क्यू नहीं किया जा सका। सारी टीमें मौके पर मौजूद थी। इसके बाद भी युवक करीब 80 मिनट तक चिल्लाता रहा, उसे बचाया नहीं जा सका। तड़प-तड़पकर अपने पिता के सामने बेटे ने दम तोड़ दिया।

युवक की मौत के बाद लोग घटनास्थल पर प्रदर्शन कर रहे हैं। लोगों ने प्राधिकरण को इसका जिम्मेदार ठहराया।
कोहरे में जीरो विजिबिलिटी की वजह से रात में नाला नहीं दिखाई दिया होगा। जिसकी वजह से कार नाले में गिरी। इस नाले के सामने से तीन तरफ की मेन रोड निकली है।

प्लॉट मालिक के खिलाफ FIR दर्ज जॉइंट सीपी राजीव नारायण मिश्रा ने बताया- थाना नॉलेज पार्क अंतर्गत यह घटना हुई है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम पहुंची। फायर ब्रिगेड के लैडर, क्रेन और सर्च लाइट समेत सभी जरूरी उपकरण से बचाव कार्य शुरू किया गया। फाइनल रेस्क्यू एसडीआरएफ को जोड़ कर किया गया है। उस समय जीरो विजिबिलिटी थी।

युवराज की कार सेक्टर-150 के खाली प्लाट में गिरी थी। पुलिस ने पिता राजकुमार मेहता की शिकायत पर दो बिल्डरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इसमें पहला नाम बिल्डर एमएजे विशटाउन प्लानर लिमिटेड और दूसरा लोट्स ग्रीन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड का है। हादसे की जांच की जा रही है। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल आज घटना के स्थल पर बैरीकेड कर दिए गए है। ताकि और कोई घटना न हो।

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