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नेवी पश्चिम बंगाल के हल्दिया में नेवी बेस बना रही:बंगाल की खाड़ी में चीन-बांग्लादेश की बढ़ती गतिविधियों पर नजर; छोटे वॉरशिप तैनात किए जाएंगे

नेवी पश्चिम बंगाल के हल्दिया में नेवी बेस बना रही:बंगाल की खाड़ी में चीन-बांग्लादेश की बढ़ती गतिविधियों पर नजर; छोटे वॉरशिप तैनात किए जाएंगे

नई दिल्ली8 मिनट पहले
यह कदम चीन की बढ़ती नौसैनिक गतिविधियों और बांग्लादेश-पाकिस्तान से जुड़े बदलते क्षेत्रीय सुरक्षा हालात को देखते हुए उठाया जा रहा है। (फाइल फोटो)

भारतीय नौसेना पश्चिम बंगाल के हल्दिया में एक नया नेवी बेस बनाने जा रही है। इंडिया टुडे ने रक्षा सूत्रों के हवाले से ये खबर दी है। इसके मुताबिक, यह कदम चीन की बढ़ती नौसैनिक गतिविधियों और बांग्लादेश-पाकिस्तान से जुड़े बदलते क्षेत्रीय सुरक्षा हालात को देखते हुए उठाया जा रहा है।

इसका मकसद उत्तरी बंगाल की खाड़ी में भारत की समुद्री मौजूदगी को मजबूत करना है। यह नया बेस एक पूर्ण नौसैनिक कमांड न होकर “नेवल डिटैचमेंट” के रूप में काम करेगा। यहां से छोटे वॉरशिप और हाईस्पीड बोट की तैनाती की जाएगी, ताकि समुद्री निगरानी और त्वरित कार्रवाई की क्षमता बढ़ाई जा सके।

नेवी इस बेस के लिए मौजूदा हल्दिया डॉक कॉम्प्लेक्स का उपयोग करेगी। इससे कम अतिरिक्त इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ बेस को जल्दी ऑपरेशनल किया जा सकेगा। शुरुआत में एक अलग जेट्टी (नाव या जहाज रुकने की जगह) बनाई जाएगी और वहां जरूरी सहायक सुविधाएं (शोर-सपोर्ट) तैयार की जाएंगी।

करीब 100 नौसैनिकों की तैनाती होगी

इस नए बेस पर लगभग 100 अधिकारी और नाविक तैनात किए जाएंगे। इससे साफ है कि यह एक छोटा लेकिन रणनीतिक रूप से अहम बेस होगा। हल्दिया, कोलकाता से करीब 100 किलोमीटर दूर है और यहां से सीधे बंगाल की खाड़ी तक पहुंच मिलती है। इससे हुगली नदी के रास्ते होने वाली समय-खपत से बचा जा सकेगा।

न्यू वॉटर जेट फास्ट अटैक क्राफ्ट तैनात होगी

हल्दिया बेस पर फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट (FIC) और 300 टन वजनी न्यू वाटर जेट फास्ट अटैक क्राफ्ट (NWJFAC) तैनात किए जाएंगे। ये बोट्स 40 से 45 नॉट्स यानी 80kmph तक की रफ्तार से चल सकती हैं और तुरंत समुद्री अभियानों के लिए बनाए गए हैं।

यह बोट्स 10 से 12 जवानों को ले जा सकती हैं। इनका इस्तेमाल तटीय गश्त, घुसपैठ रोकने, बंदरगाह सुरक्षा और विशेष अभियानों में किया जाएगा। इनमें CRN-91 गन लगी होंगी। इसके अलावा, इनमें नागास्त्र जैसे लोइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम लगाए जाने की संभावना है, जिससे इनकी सटीक हमला क्षमता और निगरानी भूमिका और मजबूत होगी।

यह कदम नौसेना के व्यापक विस्तार कार्यक्रम का हिस्सा है। 2024 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) की बैठक में 120 फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट और 31 NWJFAC की खरीद को मंजूरी दी गई थी।

अब जानिए हल्दिया को ही क्यों चुना गया…

  • भारत के पूर्वी तट पर पहले से विशाखापत्तनम में ईस्टर्न नेवल कमांड और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में प्रमुख नौसैनिक ठिकाने मौजूद हैं। अधिकारियों के मुताबिक, हल्दिया में जमीन पहले से चिन्हित थी, लेकिन निर्माण लंबे समय से लंबित था।
  • रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, उत्तरी बंगाल की खाड़ी में यह कदम कई वजहों से जरूरी है। इसमें पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (PLAN) की भारतीय महासागर क्षेत्र में बढ़ती मौजूदगी, समुद्री रास्तों से घुसपैठ की आशंका और बांग्लादेश से अवैध समुद्री आवाजाही के मामले शामिल हैं।
  • भारत-बांग्लादेश तट के पास उथले समुद्री इलाके और घना समुद्री यातायात है। ऐसे में तेज और फुर्तीली नौकाएं घुसपैठ रोकने और त्वरित कार्रवाई के लिए ज्यादा प्रभावी साबित होती हैं।
  • हल्दिया बेस की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि चीन भारतीय महासागर में अपनी नौसैनिक मौजूदगी लगातार बढ़ा रहा है। साथ ही, बांग्लादेश के साथ चीन के रक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर सहयोग में भी इजाफा हुआ है, जबकि पाकिस्तान के साथ उसकी सैन्य साझेदारी पहले से मौजूद है।

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