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हिमाचल हाईकोर्ट में अभिषेक मनु सिंघवी केस की सुनवाई:10 मार्च मिली ता​रीख, याचिकाकर्ता के पक्ष ने जवाब दाखिल किया

हिमाचल हाईकोर्ट में आज (बुधवार को) राज्यसभा चुनाव को चुनौती देने वाली अभिषेक मनु सिंघवी की याचिका पर सुनवाई हुई। अदालत में प्रतिवादी पक्ष द्वारा जताई गई आपत्ति का याचिकाकर्ता पक्ष ने आज जवाब फाइल किया। अब यह मामला 10 मार्च को सुना जाएगा।

दरअसल, पिछली सुनवाई में प्रतिवादी बनाए गए BJP के राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन के एडवोकेट ने इस केस के गवाहों की लिस्ट अदालत को सौंपी थी। इस लिस्ट पर याचिकाकर्ता पक्ष ने आपत्ति जताई थी। लिहाजा इसका रिजाइंडर दिया गया।

इस केस में हाईकोर्ट पहले ही इश्यू फ्रेम कर चुका है। अब केस में दोनों पक्षों में बहस और गवाही होनी है। यह मामला जस्टिस विपिन चंद्र नेगी की अदालत में लगा।

बता दें कि, राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी एवं सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने मुकाबला बराबरी पर छूटने के बाद पर्ची सिस्टम से विजय घोषित करने के नियम को हिमाचल हाईकोर्ट में चुनौती दे रखी है।

हिमाचल हाईकोर्ट।

पर्ची सिस्टम से चुनाव हारे थे सिंघवी

अभिषेक मनु सिंघवी के अनुसार, नियम की एक धारणा को उन्होंने याचिका में चुनौती दे रखी है। जब मुकाबला बराबरी पर होता है, उसके बाद पर्ची निकाली जाती है। जिसकी पर्ची निकलती है, उसे विनर डिक्लेयर होना चाहिए। मगर, अभी जिसकी पर्ची निकलती है, उसे हारा हुआ डिक्लेयर किया गया है। यह धारणा कानूनी रूप से गलत है। इसे सिंघवी ने चुनौती दी है।

राज्यसभा चुनाव में सिंघवी व महाजन को मिले थे बराबर वोट

सिंघवी के अनुसार पर्ची में जिसका नाम निकलता है, उसकी जीत होनी चाहिए। नियम में जिसने भी यह धारणा दी है, वो गलत है। एक्ट में ऐसा कोई नियम नहीं है, लेकिन नियम में यह धारणा है। उसे चुनौती दी गई है।

यदि यह धारणा गलत है तो जो चुनाव हुए हैं, उसमे जो परिणाम घोषित हुआ है, वो भी गलत है। सिंघवी ने इलेक्शन को लीगल ग्राउंड पर चैलेंज किया है।

हिमाचल से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद के प्रत्याशी एवं एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी।

सिंघवी और महाजन को मिले थे 34-34 वोट

प्रदेश में 27 फरवरी 2024 को राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी और भाजपा के हर्ष महाजन को 34-34 वोट मिले थे। मुकाबला बराबर होने के बाद लॉटरी से हर्ष महाजन चुनाव जीत गए थे, क्योंकि पर्ची अभिषेक मनु सिंघवी की निकली थी।

इन चुनावों के बाद प्रदेश में सियासी उथल पुथल मची थी और कांग्रेस के 6 विधायकों समेत 3 निर्दलीय ने भी बीजेपी का दामन थामा। इसके बाद, स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया ने कांग्रेस छोड़ भाजपा में गए विधायकों को अयोग्य घोषित किया था और उनकी सीट पर उप चुनाव करवाए गए। इससे कांग्रेस की सरकार से संकट तो दूर हो गया। मगर, राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की बहुमत के बावजूद हार हो गई।

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