केंद्र सरकार ने बुधवार को साफ किया कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से जुड़े निजी कागजात (पेपर्स) प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय (PMML) से गायब नहीं हैं, बल्कि उनका हमें पता है।
सरकार ने कहा कि वे सोनिया गांधी के पास हैं। मंत्रालय ने कहा कि इन्हें निजी संपत्ति नहीं, बल्कि देश की डॉक्यूमेंट्री धरोहर माना जाता है, इसलिए इन्हें वापस लाने के लिए लगातार कोशिशें चल रही हैं।
दरअसल, संबित पात्रा ने संसद में कहा था कि नेहरू से जुड़े कागज प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय से गायब हैं। इसके जवाब में सरकार ने ये जवाब दिया।
पात्रा के इस बयान के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि उसने झूठा दावा किया। कांग्रेस ने इसके बाद बीजेपी पर हमला बोलते हुए माफी की मांग की।
संस्कृति मंत्रालय ने कहा- हमें पता है कागज कहां हैं
संस्कृति मंत्रालय ने अपने X अकाउंट पर कहा कि नेहरू के ये कागज़ मिसिंग नहीं हैं क्योंकि हमें पता है वे कहां हैं।
मंत्रालय ने बताया कि 29 अप्रैल 2008 को सोनिया गांधी की तरफ से एम वी राजन नाम के प्रतिनिधि ने पीएमएमएल को पत्र लिखा था, जिसमें उनके द्वारा नेहरू परिवार के निजी पत्र और नोट्स वापस लेने की इच्छा जताई गई थी।
इसके बाद 51 कार्टन्स में नेहरू के पेपर्स सोनिया गांधी को भेजे गए। तब से पीएमएमएल लगातार उनके कार्यालय से इन पेपर्स की वापसी के लिए संपर्क में है। इसी साल 28 जनवरी और 3 जुलाई 2025 को भी इस बारे में दो पत्र भेजे गए थे।
मंत्रालय का कहना है कि इन दस्तावेजों का देश के ऐतिहासिक और शैक्षणिक महत्व से जुड़ा होना बेहद जरूरी है। इनका रिकॉर्ड प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय में रहना चाहिए ताकि आम नागरिक और शोधकर्ता इनका अध्ययन कर सकें।
जयराम रमेश बोले- सराकर को माफी मांगनी चाहिए
इस पूरे विवाद पर कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा कि सरकार खुद मान चुकी है कि कोई दस्तावेज गायब नहीं है, इसलिए अब उसे अपने झूठे आरोपों के लिए माफी मांगनी चाहिए।
उन्होंने X पर लिखा- सच्चाई आखिरकार लोकसभा में सामने आ गई। क्या अब माफी आएगी?
