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CDS बोले-जंग भाषणों से नहीं एक्शन से जीती जाती है:पाकिस्तान हमेशा जीत के झूठे दावे करता रहा है, हमें हमेशा सर्तक रहना होगा

CDS बोले-जंग भाषणों से नहीं एक्शन से जीती जाती है:पाकिस्तान हमेशा जीत के झूठे दावे करता रहा है, हमें हमेशा सर्तक रहना होगा

हैदराबाद37 मिनट पहले
CDS तेलंगाना के डुंडीगल स्थित एयर फोर्स अकादमी में ऑटम टर्म दिसंबर 2025 की कंबाइंड ग्रेजुएशन परेड में शामिल हुए थे।

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने शनिवार को कहा कि युद्ध केवल बयानबाजी से नहीं, बल्कि स्पष्ट लक्ष्य और उद्देश्यपूर्ण कार्रवाई से जीते जाते हैं।

CDS तेलंगाना के डुंडीगल स्थित एयर फोर्स अकादमी में ऑटम टर्म दिसंबर 2025 की कंबाइंड ग्रेजुएशन परेड में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने कहा-

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खाली शब्दों और प्रतीकात्मक दावों से ताकत साबित नहीं होती। अनुशासन, ठोस योजना और निर्णायक अमल ही किसी देश की असली सैन्य क्षमता दिखाते हैं।

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उन्होंने बिना नाम लिए पाकिस्तान पर तंज कसते हुए कहा कि हाल के समय में वहां झूठे जीत के दावे और सोशल मीडिया प्रचार देखने को मिले, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और रही है।

CDS की 2 बड़ी बातें…

  • नए अधिकारी ऐसे समय सेवा में आ रहे हैं, जब ऑपरेशन ‘सिंदूर’ जारी है। मौजूदा सुरक्षा माहौल में हर समय सतर्कता, फुर्ती और तैयार रहना जरूरी है। सैन्य सेवा केवल संकट के क्षणों तक सीमित नहीं होती, बल्कि लगातार तैयारी ही सफलता की कुंजी है।
  • सतर्कता, तत्परता और पेशेवर रवैया ही युद्ध के समय ही नहीं, पूरे सेवा काल में सफलता तय करेगा। भारत की मजबूती मजबूत संस्थानों, लोकतांत्रिक स्थिरता और सशस्त्र बलों की पेशेवर क्षमता पर टिकी है।

29 नवंबरः हर दिन बदल रहे युद्ध के तरीके

जनरल अनिल चौहान ने 29 नवंबर को नई दिल्ली के सैम मॉनेकशॉ सेंटर में चल रहे चाणक्य डिफेंस डायलॉग में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने कहा था कि युद्ध लगातार खुद को बदलता और बनाता रहता है। जो कॉन्सेप्ट भविष्य के लगते हैं, वे लागू होने से पहले ही पुराने भी हो सकते हैं।

यह एक ऐसा रिस्क है जो सेना को उठाना पड़ता है। इसलिए फ्यूचर वॉरफेयर के मुताबिक अंदाजा लगाना, तैयारी करना हमारे अस्तित्व से जुड़ जाता है। इसका दूसरा कोई ऑप्शन नहीं है।

25 सितंबरः 1962 जंग में एयरफोर्स को परमिशन नहीं मिली

जनरल अनिल चौहान ने 25 सितंबर को कहा था कि 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान एयरफोर्स के इस्तेमाल की परमिशन नहीं दी गई थी। अगर ऐसा होता तो चीनी आक्रमण को काफी हद तक कम किया जा सकता था।

CDS चौहान ने यह टिप्पणी पुणे में दिवंगत लेफ्टिनेंट जनरल एस पी पी थोराट की संशोधित आत्मकथा – ‘रेवेइल टू रिट्रीट’ के विमोचन कार्यक्रम में की थी। वे इस कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए थे।

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