सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल में SIR और BLO के सुसाइड से जुड़े एक मामले पर सुनवाई की। कोर्ट ने इस चुनाव आयोग को नोटिस भेजा है।
याचिका सनातनी संसद संगठन ने दायर की थी। जिसमें SIR प्रक्रिया के बाद पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट पब्लिश होने तक बंगाल पुलिस को चुनाव आयोग के अधीन करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
कोर्ट में बताया गया कि बंगाल में BLO के खिलाफ हिंसा की घटनाएं बढ़ रही हैं। इसलिए वहां सेंट्रल फोर्स तैनात की जाए।
कोर्ट ने ममता सरकार को भी नोटिस जारी किया, जिसमें SIR के पूरा होने तक राज्य में केंद्रीय सशस्त्र बलों की तैनाती के लिए वैकल्पिक निर्देश देने की मांग की गई है।
चुनाव आयोग की दलीलें…
- राज्यों में SIR के काम में रुकावट डालने के दौरान अगर हालात बिगड़ते हैं, तो पुलिस को डेप्युटेशन पर लेने के अलावा कोई ऑप्शन नहीं होगा।
- हमारे पास BLO और SIR के काम में लगे दूसरे अधिकारियों को धमकाने से निपटने के लिए सभी संवैधानिक अधिकार हैं।
- पश्चिम बंगाल में स्ट्रेस के कारण BLOs के सुसाइड करने का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि उन्हें 30-35 वोटर्स के छह-सात घरों की गिनती का काम करना होता है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश…
- चुनाव आयोग स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के काम में अलग-अलग राज्य सरकारों से सहयोग की कमी को गंभीरता से ले। हालात से निपटें वरना अराजकता फैल जाएगी।
- BLO के काम में रुकावट हो रही है, लोगों से और राज्यों से सहयोग की कमी है। या फिर उन्हें धमकाने के मामले हैं तो इसे हमारे ध्यान में लाएं। हम आदेश देंगे।
- BLO का काम उतना आसान नहीं, जितना दिखता है। यह डेस्क जॉब नहीं है। BLO को घर-घर जाकर गिनती का फॉर्म भरना होता है। फिर उसे अपलोड करना होता है।
चुनाव आयोग बोला- पुलिस को डेपुटेशन पर लेने के सिवा ऑप्शन नहीं
चुनाव आयोग के वकील राकेश द्विवेदी ने कोर्ट को बताया कि पुलिस राज्य सरकार के हाथों में है। उन्होंने कहा- राज्य सरकार से अपेक्षा की जाती है कि वह हमारा सहयोग करे और हमें सुरक्षा प्रदान करे। अगर राज्य सरकार ऐसा करने से इनकार करती है, तो हमारे पास स्थानीय पुलिस को डेपुटेशन पर लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
हालांकि जस्टिस बागची ने कहा कि पोल पैनल इलेक्शन प्रोसेस शुरू होने तक पुलिस को अपने अधिकार क्षेत्र में नहीं ले सकता। हम यह चाहते हैं कि SIR जमीनी स्तर पर बिना किसी गड़बड़ी के हो।
द्विवेदी ने जवाब दिया कि बीएलओ पर दबाव राजनीतिक दलों के हस्तक्षेप के कारण है। इस पर बेंच ने कहा कि वह राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के खेल में नहीं पड़ना
