लोकसभा में सोमवार को वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने पर चर्चा जारी है। शुरुआत पीएम मोदी ने की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने वंदे मातरम् के टुकड़े किए। वंदे मातरम् आजादी के समय से प्रेरणा का स्त्रोत था तो फिर उसके साथ पिछले दशक में अन्याय क्यों हुआ।
इस पर कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा- पीएम के भाषण के दो मकसद थे। पहला ये उनकी बातों से लगा कि उनके राजनीतिक पूर्वज खुद ब्रिटिश के खिलाफ लड़े थे। दूसरा ये कि एक चर्चा को राजनीतिक रंग देने का, जब जब मोदी किसी विषय पर बोलते हैं, नेहरू का नाम बार-बार बोलते हैं।
गोगोई ने कहा, ‘ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा में उन्होंने 50 बार कांग्रेस और 14 बार नेहरू का नाम लिया, लेकिन पीएम कितनी भी कोशिश कर लें, नेहरू के योगदान पर एक भी काला दाग नहीं लगा पाएंगे। पीएम के भाषण में इतिहास को फिर से लिखने की मंशा उनके भाषण में दिखाई थी।’ मोदी ने आज के भाषण में भी नेहरू का नाम 7 बार लिया।
इसके बाद सपा प्रमुख और सांसद अखिलेश यादव ने स्पीच दी। उन्होंने कहा, ‘जिस वंदे मातरम् ने आजादी के आंदोलन को जोड़ा, आज के दरारवादी लोग उसी से देश को तोड़ना चाहते हैं। वंदे मातरम् गाने के लिए नहीं,बल्कि निभाने के लिए है।’
बंकिम चंद्र ने 1875 में लिखा था, आनंदमठ में छपा था
भारत के राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को बंकिम चंद्र चटर्जी ने 7 नवंबर 1875 को अक्षय नवमी के पावन अवसर पर लिखा था। यह 1882 में पहली बार उनकी पत्रिका बंगदर्शन में उनके उपन्यास आनंदमठ के हिस्से के रूप में छपा था।
1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने मंच पर वंदे मातरम् गाया। यह पहला मौका था जब यह गीत सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय स्तर पर गाया गया। सभा में मौजूद हजारों लोगों की आंखें नम थीं।
