हाईकोर्ट का मुर्शिदाबाद बाबरी मस्जिद विवाद पर दखल से इनकार:कल होने वाले शिलान्यास कार्यक्रम को रोकने की मांग थी; इलाके में भारी पुलिस बल तैनात
कलकत्ता हाईकोर्ट में शुक्रवार को मुर्शिदाबाद में बनने वाले बाबरी मस्जिद की आधारशिला कार्यक्रम पर दखल देने से इनकार कर दिया। साथ ही कहा- इस दौरान शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।
हाईकोर्ट उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें कल यानी 6 दिसंबर को निलंबित TMC विधायक हुमायूं कबीर के कार्यक्रम पर रोक लगाने की मांग की गई थी। हुमायूं ने कहा- कोर्ट के फैसले से याचिकाकर्ताओं को उचित जवाब मिला।
बाबरी बनाने का ऐलान करने की वजह से TMC ने गुरुवार को हुमायूं को सस्पेंड कर दिया था। इस बीच आज हुमांयू अपने समर्थकों के साथ मुर्शिदाबाद के बोल्डंगा ब्लॉक -1 पहुंचे। यहां कल मस्जिद का शिलान्यास होना है।
बाबरी मस्जिद आधारशिला कार्यक्रम से जुड़ी 3 फोटो
अब समझिए विवाद कैसे शुरू हुआ…
दरअसल, मुर्शिदाबाद में 28 नवंबर को कई जगहों पर बाबरी मस्जिद के शिलान्यास के पोस्टर लगाए गए थे। इन पर लिखा था कि 6 दिसंबर को बेलडांगा में बाबरी मस्जिद का शिलान्यास समारोह होगा। पोस्टर पर हुमायूं कबीर को आयोजनकर्ता बताया गया था। इसके बाद विवाद बढ़ गया था।
इसके बाद ही पार्टी ने एक्शन लेते हुए हुमायूं कबीर को सस्पेंड कर दिया। इसके बाद हुमायूं ने कहा था, ‘मैं अपने बयान पर कायम हूं। मैं 22 दिसंबर को अपनी नई पार्टी की घोषणा करूंगा। विधानसभा चुनाव में 135 सीटों पर उम्मीदवार उतारूंगा। मैं उन दोनों (TMC और भाजपा) के खिलाफ चुनाव लड़ूंगा।
हुमायूं ने कहा- बाबरी मस्जिद का शिलान्यास तो करूंगा
TMC से निकाले जाने के बाद हुमायूं कबीर ने कहा, ‘मैं 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद का शिलान्यास करूंगा। यह मेरा निजी मामला है। किसी पार्टी का इससे कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने मुझे पहले भी 2015 में छह साल के लिए निलंबित किया था। अब फिर, इस पर मुझे कुछ नहीं कहना। वे जो करना चाहें, करें।’
बाबरी विध्वंस की टाइमलाइन (1992-2025), 6 पॉइंट्स
1992- 6 दिसंबर को अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी विवादित ढांचे को कार सेवकों ने ध्वस्त कर दिया था।
2003- आर्कियोलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) की रिपोर्ट में बाबरी ढांचे वाली जगह पर मंदिरनुमा संरचना मिलने का दावा किया गया। मुस्लिम पक्ष ने इसे चुनौती दी।
2010- 30 सितंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला आया, जिसमें विवादित भूमि को तीन हिस्सों में बांटने का आदेश दिया गया। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
2019- 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि 2.77 एकड़ की विवादित जमीन रामलला की जन्मभूमि है। मुस्लिम पक्ष को बाबरी ढांचे के लिए 5 एकड़ जमीन देने का आदेश दिया।
2020- 5 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन किया।
2024- 22 जनवरी को रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा हुई। रामलला के गर्भगृह के दर्शन औपचारिक रूप से शुरू हुए।
6 साल बाद भी प्रस्तावित मस्जिद का निर्माण शुरू नहीं हुआ
2019 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राम मंदिर से करीब 25 किमी दूर, अयोध्या में सोहावल तहसील के धन्नीपुर गांव में मुस्लिम पक्ष को 5-एकड़ की वैकल्पिक जमीन आवंटित की गई थी। हालांकि, अब तक इसका निर्माण शुरू नहीं हुआ है।
इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन (IICF) के अनुसार, प्रस्तावित जमीन पर मस्जिद और सामुदायिक सुविधाओं का निर्माण प्रस्ताव रखा गया था। हालांकि, अयोध्या विकास प्राधिकरण (ADA) की तरफ से मस्जिद के लेआउट प्लान को मंजूरी नहीं मिली है। यानी सरकारी विभागों ने NOC नहीं दी है।
