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महबूबा मुफ्ती की बहन के अपहरण का मामला:कोर्ट ने 35 साल बाद अरेस्ट शख्स को रिहा किया, CBI की रिमांड याचिका खारिज की

महबूबा मुफ्ती की बहन के अपहरण का मामला:कोर्ट ने 35 साल बाद अरेस्ट शख्स को रिहा किया, CBI की रिमांड याचिका खारिज की

श्रीनगर4 घंटे पहलेलेखक: रउफ डार
कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जाता है कि मुफ्ती सईद ने खुद अपनी बेटी का अपहरण करवाया था। -फाइल फोटो

जम्मू की टाडा कोर्ट ने मंगलवार CBI की रुबैया सईद किडनैपिंग केस से जुड़ी याचिका खारिज की। एजेंसी ने 1 दिसंबर को श्रीनगर से गिरफ्तार व्यक्ति शफात अहमद शांगलू की रिमांड मांगी थी।

कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए CBI को निर्देश दिया किया शांगलू को छोड़ा जाए। अदालत ने कहा कि CBI की चार्जशीट में शांगलू का नाम नहीं है, इसलिए एजेंसी की कस्टडी मांग उचित नहीं मानी जा सकती।

दरअसल, किडनैपिंग का ये मामला 8 दिसंबर 1989 का है। तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद का घर से आधा किलोमीटर दूर श्रीनगर के लाल देद अस्पताल से अपहरण किया गया था। रुबैया, जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बहन भी हैं।

अपहरण के पांच दिन बाद केंद्र की तत्कालीन वीपी सिंह सरकार ने 5 आतंकवादियों को रिहा किया, तब जाकर आतंकियों ने रुबैया को छोड़ा था।

किडनैपिंग के इस केस में भगोड़ा घोषित शफात अहमद शांगलू की 35 साल बाद गिरफ्तारी हुई थी। उस पर JKLF की साजिश में शामिल होने का आरोप है।

शांगलू ने रणबीर पीनल कोड और TADA एक्ट की अलग-अलग धाराओं के तहत यासीन मलिक और दूसरों के साथ मिलकर किडनैपिंग को अंजाम दिया था।

शांगलू जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के चीफ यासीन मलिक का करीबी माना जाता है। वो JKLF में एक ऑफिसर था और ऑर्गनाइजेशन का फाइनेंस संभाल रहा था। उस पर 10 लाख रुपए का इनाम भी था।

CBI ने जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ मिलकर कानूनी प्रोसेस के बाद शांगलू को श्रीनगर के निशात इलाके में उसके घर से गिरफ्तार किया।

सरकारी गवाह बनी मुफ्ती सईद की बेटी

तमिलनाडु में रह रहीं सईद को CBI ने सरकारी गवाह के तौर पर लिस्ट किया है। जांच एजेंसी ने 1990 में यह केस अपने हाथ में लिया था। सईद ने मलिक के अलावा चार और आरोपियों की पहचान इस जुर्म में शामिल होने के तौर पर की थी।

एक स्पेशल TADA कोर्ट ने सईद के किडनैपिंग केस में मलिक और नौ अन्य के खिलाफ पहले ही चार्ज फ्रेम कर दिए हैं। वहीं, JKLF चीफ यासीन मलिक, टेरर फाइनेंसिंग केस में दिल्ली की तिहाड़ जेल में सजा काट रहा है।

पढ़िए रुबैया के किडनैपिंग की सिलसिलेवार कहानी…

  • इस हाईप्रोफाइल किडनैपिंग का मास्टरमाइंड था जेकेएलएफ नेता अशफाक माजिद वानी। वह पहले जम्मू-कश्मीर का एथलीट था।
  • बकौल अशफाक वे लोग कुछ ऐसा करना चाहते थे, जिससे सरकार हिल जाए और मुफ्ती के होम मिनिस्टर बनते ही ये मौका मिल गया।
  • पहले मुफ्ती और उनकी फैमिली की रेकी की। बेटी रुबैया श्रीनगर के लाल देद हॉस्पिटल में डॉक्टर थी और बिना सिक्योरिटी मिनी बस से घर जाती थीं।
  • 8 दिसंबर 1989 को मुफ्ती सईद की बेटी रुबैया को जेकेएलएफ (जम्मू-कश्मीर लिब्रेशन फ्रंट) ने किडनैप कर लिया, उसे एक पुलिस अफसर के घर रखा गया।
  • इसके बाद जावेद मीर ने एक अखबार को फोन कर बताया कि जेकेएलएफ ने मुफ्ती की बेटी को किडनैप कर लिया है।

रुबैया की रिहाई के लिए जेकेएलएफ ने जेल में बंद अपने 7 साथियों शेख हामिद, शेर खान, नूर मोहम्मद कलवल, जावेद जगरार, अल्ताफ बट, मकबूल भट के भाई गुलाम नबी भट और अहद वाज की रिहाई की शर्त रखी थी, लेकिन इनमें से 5 को ही छोड़ा गया।

दिल्ली समेत पूरे देश में मच गया था हड़कंप

होम मिनिस्टर की बेटी की किडनैपिंग की खबर से दिल्ली सरकार के साथ देशभर में हड़कंप मच गया। कई बड़े अफसर दिल्ली से श्रीनगर रवाना हो गए। एक बिचौलिए के जरिए आतंकियों से बातचीत शुरू हुई। जेकेएलएफ पांच आतंकियों की रिहाई पर राजी हो गया। सुरक्षा एजेंसियां घाटी के चप्पे-चप्पे पर रुबैया को तलाश रही थीं। उसे सोपोर शिफ्ट कर दिया था और सिर्फ पांच लोगों को ही इसकी जानकारी थी।

सरकार को झुकना पड़ा और पांच आतंकियों को छोड़ दिया गया। 13 दिसंबर की शाम रुबैया सोनवर स्थित जस्टिस भट के घर सुरक्षित पहुंच गईं। इस घटना के मास्टरमाइंड अशफाक वानी को 31 मार्च 1990 में सिक्योरिटी फोर्सेस ने एक एनकाउंटर में मारा गिराया था।

तस्वीर 13 दिसंबर की है, जब रुबैया को आतंकियों ने छोड़ा तो पिता मुफ्ती से लिपटकर रोने लगीं।

अलगाववादी नेता का दावा- ड्रामा था अपहरण कांड

अलगाववादी नेता हिलाल वार ने अपनी किताब ‘ग्रेट डिस्क्लोजरः सीक्रेट अनमास्क्ड’ में बताया है कि कश्मीर को अस्थिर करने की पटकथा बहुत पहले लिखी जा चुकी थी। इसका असली काम शुरू हुआ 13 दिसंबर 1989 को। 90 के दशक में इक्का-दुक्का घटनाओं को छोड़ दिया जाए तो कश्मीर में हालात ठीक-ठाक थे। हिलाल वार के अनुसार आतंकवाद की शुरुआत करने वाला रुबैया सईद अपहरण कांड एक ड्रामा था।

इसके बाद कश्मीर के हालात बिगड़ते चले गए। आईसी 814 विमान को हाईजैक, संसद हमला और घाटी में बड़ी आतंकी घटनाएं इसी अपहरण कांड के बाद से ही शुरू हुईं। आतंकियों की रिहाई से पहले भारत सरकार ने शर्त रखी थी कि आतंकवादियों की रिहाई के बाद कोई जुलूस नहीं निकाला जाएगा, लेकिन जब ये जेल से छूटे तो लोग सड़कों पर उतर आए।

हर तरफ आजादी-आजादी के नारे लग रहे थे। उस दिन पूरी रात कश्मीर में जश्न मनाया गया। रुबैया के अपहरण की सफलता के बाद कश्मीर घाटी में अपहरण और हत्या का सिलसिला चल निकला।

एक और दावा- मुफ्ती नहीं चाहते थे बेटी जल्द रिहा हो

जुलाई 2012 में नेशनल सिक्योरिटी ग्रुप (NSG) के पूर्व मेजर जनरल ओपी कौशिक ने रुबैया सईद अपहरण मामले में सनसनीखेज दावा किया था। उन्होंने कहा था कि रुबैया के पिता और तत्कालीन गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद नहीं चाहते थे कि उनकी बेटी जल्द रिहा हो। उन्होंने बताया कि अपहरण की सूचना मिलने के पांच मिनट के भीतर ही NSG ने पता लगा लिया था कि रुबैया को कहां रखा गया है।

कौशिक ने खुद गृहमंत्री को बताया कि रुबैया को कुछ देर में ही सुरक्षित रिहा करा लिया जाएगा, लेकिन गृहमंत्री ने उनकी बात को अनसुना कर निर्देश दिए कि वे तत्काल मीटिंग से बाहर जाकर NSG को पीछे हटाएं। इसके बाद रुबैया को छुड़ाने के लिए पांच खूंखार आतंकियों को छोड़ दिया गया।

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