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अब पाकिस्तान के पार तक मार करेगी ब्रह्मोस, बंगाल की खाड़ी में मिसाइल का सफल कॉम्बैट लॉन्च

भारतीय थलसेना की दक्षिणी कमांड ने बंगाल की खाड़ी में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सफल कॉम्बैट लॉन्च किया। सेना के अनुसार, यह परीक्षण सिर्फ तकनीकी मूल्यांकन नहीं बल्कि युद्ध जैसी स्थिति में मिसाइल की वास्तविक क्षमता दिखाने के उद्देश्य से किया गया था। मिसाइल ने 3457.44 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरते हुए समुद्र में स्थित लक्ष्य को एक मीटर के सर्कुलर एरर प्रॉबेबल (CEP) के भीतर सटीकता से भेदा। सेना ने इसे भारत की लंबी दूरी की प्रिसीजन स्ट्राइक क्षमता और आत्मनिर्भरता का सशक्त प्रदर्शन बताया तथा इसे ‘बैटल रेडी भारत’ की भावना को समर्पित क्षण करार दिया।

ब्रह्मोस ऑर्गनाइजेशन द्वारा विकसित यह मिसाइल भारत-रूस का संयुक्त प्रोजेक्ट है, जिसका नाम ब्रह्मपुत्र और मॉस्कवा नदियों के शुरुआती अक्षरों पर आधारित है। 1998 में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट को पहली बार 2005 में नौसेना में शामिल किया गया। आरंभिक संस्करण की रेंज 290 किमी तक थी, जिसे मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (MTCR) प्रतिबंधों के कारण सीमित रखा गया था।

2016 में भारत के MTCR में शामिल होने के बाद इसकी रेंज को क्रमिक रूप से बढ़ाया गया। पहले 450-500 किमी रेंज वाला एक्सटेंडेड वर्जन विकसित हुआ और 2017 में सफल परीक्षण किया गया। वर्ष 2025 में 800 किमी रेंज वाले कॉम्बैट लॉन्ग रेंज संस्करण ने अपनी क्षमता प्रदर्शित की, जिसका पहली बार मई 2025 में ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के दौरान वास्तविक युद्ध में उपयोग हुआ। यह मिसाइल ज़मीन, समुद्र, हवा तथा पनडुब्बी से लॉन्च की जा सकती है, यही कारण है कि थल, वायु और नौसेना तीनों सेनाओं में इसका उपयोग होता है।

ताज़ा वर्जन में कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं—

-रेंज में वृद्धि:  अब 800 किमी तक मार की क्षमता, जिससे भारत के पश्चिमी तट से पाकिस्तान के प्रमुख शहर भी इसके दायरे में आते हैं।
– वजन में कमी: पूर्व में 3000 किलोग्राम वजन वाली मिसाइल अब लगभग 1200-1500 किलोग्राम हल्की हो गई है। इससे तेजस जैसे हल्के लड़ाकू विमान भी इसे ले सकेंगे, जबकि Su-30MKI एक साथ चार मिसाइलें ले जा सकता है।
-इंजन और फ्यूल सिस्टम अपग्रेड: मॉडिफाइड रैमजेट इंजन और बड़े फ्यूल टैंक की वजह से यह 15 किमी की ऊंचाई से लेकर मात्र 10 मीटर की बेहद कम ऊंचाई पर उड़ान भर सकती है। यह रडार निगरानी से बचने में मददगार है।
– स्वदेशीकरण: टारगेटिंग सीकर, बूस्टर और एयरफ्रेम भारतीय कंपनियों द्वारा विकसित किए गए हैं।
– डुअल रोल क्षमता: यह मिसाइल समुद्री जहाज़ों तथा जमीन आधारित ठिकानों दोनों को निशाना बनाने में सक्षम है।

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