22 दिन में 7 राज्यों में 25 बीएलओ की मौत:मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा 9 लोगों की जान गई, UP-गुजरात में 4-4 मौतें
देश के 12 राज्यों में 51 करोड़ से अधिक मतदाताओं के घर दस्तक दे रहे 5.32 लाख से अधिक बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) पर काम के दबाव का आरोप लग रहा है। SIR प्रोसेस के दौरान 22 दिनों में 7 राज्यों में 25 बीएलओ की मौत हो गई है।
वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने केवल पश्चिम बंगाल में 34 लोगों की मौत का दावा किया। इन मौतों पर बंगाल, एमपी, राजस्थान, यूपी में सियासत जोरों पर है। दूसरी ओर निर्वाचन आयोग जिला और राज्यों की रिपोर्ट के इंतजार में है। आयोग के सूत्रों का कहना है कि अब तक किसी काम के दबाव से किसी मौत की पुष्टि नहीं हुई है।
पश्चिम बंगाल के मंत्री अरुप बिस्वास ने कहा है कि SIR के चलते राज्य में 34 लोगों ने जान दी। सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि इसका उद्देश्य ‘पीछे के दरवाजे से एनआरसी लागू करना’ और डर पैदा करना है।
वहीं भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि TMC के दबाव में फर्जी और संदिग्ध नाम जोड़े जा रहे हैं।
एक्सपर्ट बोले- आयोग ध्यान दे तो थोड़ी आसानी हो सकती है
पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त ओपी रावत ने कहा- आयोग ध्यान दे तो थोड़ी आसानी हो सकती है। जैसे, मध्य प्रदेश में बीएलओ को एप में कैप्चा भरना समस्या दे रहा था। उसे हटाने से काम आसान हो गया। बड़ी संख्या में फॉर्म अपलोड करने से सर्वर बैठ जाता है। ऐसे में फॉर्म अपलोड करने का काम रात में करके इसे ठीक किया गया। टीचर्स पर स्कूलों में दिसंबर में कोर्स पूरा कराने का भी दबाव है। डेडलाइन सिर पर है। बीएलओ अपने स्तर पर समाधान निकाल रहे हैं, जबकि यह काम सिस्टम को करना चाहिए था।
यूपी: मरने से पहले कहा था-ओबीसी वोट काटने का दबाव
- उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में सोमवार को जहर खाकर जान देने वाले बीएलओ व शिक्षक विपिन यादव के पिता सुरेश यादव ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा- बेटे ने मरने से पहले फोन पर कहा था कि एसडीएम और बीडीओ वोटर लिस्ट से ओबीसी मतदाताओं के नाम हटाने और सामान्य वर्ग के नाम बढ़ाने का दबाव बना रहे हैं। मना करने पर उसे निलंबन और गिरफ्तारी की धमकी दी गई थी। विपिन की पत्नी सीमा ने भी बताया कि अधिकारी आधार न देने वालों का नाम भी जोड़ने को कहते थे। पति बहुत दबाव में थे।
- 26 नवंबर को यूपी के बरेली में बीएलओ सर्वेश गंगवार (47) अचानक से गिर पड़े। अस्पताल में मौत हो गई। उनके भाई योगेश ने कहा- SIR एसआईआर का दबाव है, देर रात तक काम करवाते थे। बीएलओ की मौत इसलिए भी चिंता बढ़ा रही है, क्योंकि अगले साल से देशभर में जनगणना शुरू होगी। उसमें भी सबसे बड़ा बोझ शिक्षकों के ऊपर होगा।
SIR के मुद्दे पर किसने क्या कहा
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी: SIR के नाम पर पिछड़े, दलित, वंचित, गरीब वोटरों काे हटाकर भाजपा मनमाफिक वोटर लिस्ट तैयार कर रही है।
भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी: विपक्ष ने पहले ईवीएम पर झूठे आरोप लगाए। अब मतदाता सूची पर लगाए जा रहे आरोप भी झूठे साबित होंगे।
सपा चीफ अखिलेश यादव: भाजपा-आयोग 3 करोड़ नाम काटने की तैयारी में। मृतक बीएलओ के परिजन को 1-1 करोड़ दें। सपा 2-2 लाख रु. देगी।
इधर चुनाव आयोग ने बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय पर विरोध-प्रदर्शन को गंभीर सुरक्षा उल्लंघन बताते हुए कोलकाता पुलिस आयुक्त से 48 घंटे में कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है।
सुप्रीम कोर्ट बोला- SIR पहली बार, यह चुनौती का आधार नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि SIR को यह कहकर चुनौती नहीं दी जा सकती कि यह पहले कभी नहीं हुआ। आयोग के पास फॉर्म 6 में दर्ज प्रविष्टियों की शुद्धता जांचने की संवैधानिक शक्ति है। वह कोई नामांकन सिर्फ इसलिए स्वीकारने के लिए बाध्य नहीं कि फॉर्म भर दिया गया।
CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा- आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं। सिर्फ लाभ पाने के लिए दिया गया ‘आधार’ मतदाता बनाने का स्वतः आधार नहीं हो सकता। अगर किसी मतदाता का नाम हटाया जाएगा, तो उसे पूर्व सूचना देना अनिवार्य है। गुरुवार को भी इसकी सुनवाई होगी।
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