संविधान दिवस पर संविधान 9 नई भाषाओं में जारी:राष्ट्रपति बोलीं- तीन तलाक खत्म करना ऐतिहासिक कदम, GST से देश की आर्थिक एकता मजबूत हुई
संसद के सेंट्रल हॉल में बुधवार को 150 वां संविधान दिवस मनाया गया। इस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संविधान को 9 नई भाषाओं मलयालम, मराठी, नेपाली, पंजाबी, बोडो, कश्मीरी, तेलुगु, ओडिया और असमिया में जारी किया।
राष्ट्रपति ने कहा- संसद ने तीन तलाक जैसी सामाजिक बुराई को खत्म कर महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। GST आजादी के बाद सबसे बड़ा टैक्स सुधार है, जिसने देश की आर्थिक एकता को मजबूत किया है।
राष्ट्रपति ने बताया- अनुच्छेद 370 हटाने से देश की राजनीतिक एकता में आ रही बाधा दूर हुई। नारी शक्ति बंधन कानून महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास की नई शुरुआत करेगा। इस दौरान उन्होंने संविधान की प्रस्तावना भी पढ़ी।
दरअसल 26 नवंबर 1949 को भारत का संविधान बनकर तैयार हुआ था। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिडला, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और दोनों सदनों के सांसद शामिल रहे।
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राष्ट्रपति बोलीं- तीन तलाक को खत्म करना ऐतिहासिक कदम
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, “तीन तलाक से जुड़ी सामाजिक बुराई को खत्म करके संसद ने हमारी बहनों और बेटियों के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है। जीएसटी, जो आजादी के बाद सबसे बड़ा टैक्स सुधार है, देश की आर्थिक एकता मजबूत करने के लिए लागू किया गया।
उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 हटाने से एक ऐसी रुकावट दूर हुई, जो देश की राजनीतिक एकता में बाधा बन रही थी। नारी शक्ति बंधन कानून महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास का एक नया दौर शुरू करेगा।
राष्ट्रपति ने बताया कि इस साल 7 नवंबर से पूरे देश में ‘वंदे मातरम’ की रचना के 150 साल पूरे होने पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
राष्ट्रपति बोलीं- अंबेडकर संविधान के मुख्य निर्माताओं में से एक थे
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, “संविधान दिवस के इस ऐतिहासिक अवसर पर आप सभी के बीच उपस्थित होकर मुझे बहुत खुशी हो रही है। 26 नवंबर 1949 को इसी केंद्रीय कक्ष में संविधान सभा के सदस्यों ने भारत का संविधान तैयार करने का काम पूरा किया था। इसी दिन ‘हम भारत के लोग’ ने अपने संविधान को अपनाया। स्वतंत्रता मिलने के बाद संविधान सभा ने अंतरिम संसद का काम भी किया। डॉ. भीमराव अंबेडकर, जो ड्राफ्टिंग कमेटी के चेयरमैन थे, हमारे संविधान के मुख्य निर्माताओं में से एक थे।”
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संविधान को 9 नई भाषाओं में जारी किया
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संविधान के अनुवादित संस्करण को 9 भाषाओं में जारी किया। इनमें मलयालम, मराठी, नेपाली, पंजाबी, बोडो, कश्मीरी, तेलुगु, ओडिया और असमिया शामिल हैं।
इस पहल के बाद अब भारत का संविधान इन भाषाओं में भी उपलब्ध होगा, जिससे अधिक लोग अपनी भाषा में संविधान को पढ़ और समझ सकेंगे।
उपराष्ट्रपति बोले- बिहार में ज्यादा वोटिंग लोकतंत्र के ताज में एक और “कीमती हीरा” जोड़ने जैसा
उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि 2024 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में हुए चुनावों में लोगों ने बड़ी संख्या में वोट डालकर दुनिया को फिर दिखा दिया कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था कितनी मजबूत है।
उन्होंने कहा कि हाल ही में हुए बिहार चुनावों में भी भारी मतदान हुआ, खासकर महिलाओं ने रिकॉर्ड संख्या में वोट डाले। यह भारतीय लोकतंत्र के ताज में एक और “कीमती हीरा” जोड़ने जैसा है।
उपराष्ट्रपति ने संविधान सभा की महिलाओं के योगदान की भी सराहना की और कहा कि उनका योगदान “अतुलनीय और ऐतिहासिक” था, जिसने भारतीय लोकतंत्र को और मजबूत आधार दिया।
उपराष्ट्रपति बोले- संविधान बुद्धि, अनुभव, बलिदान और आशाओं से जन्मा
उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि हमारा संविधान देश के महान नेताओं ने संविधान सभा में तैयार किया था। यह दस्तावेज उन करोड़ों भारतीयों की सामूहिक बुद्धि, त्याग और सपनों का प्रतीक है, जिन्होंने आजादी के लिए संघर्ष किया।
उन्होंने कहा कि संविधान की ड्राफ्टिंग कमेटी और संविधान सभा के विद्वान सदस्यों ने देश की उम्मीदों और आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए गहराई से विचार किया। उनके निस्वार्थ योगदान की वजह से आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि हमारा संविधान बुद्धि, अनुभव, बलिदान और आशाओं से जन्मा है। उन्होंने कहा, “संविधान की आत्मा ने साबित कर दिया है कि भारत एक था, एक है और हमेशा एक रहेगा।”
लोकसभा अध्यक्ष ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद को श्रद्धांजलि दी
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कहा कि इस पावन अवसर पर हम भारत की संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद, संविधान के शिल्पकार डॉ. भीमराव अंबेडकर और संविधान सभा के सभी सदस्यों को श्रद्धांजलि देते हैं। उनकी दूरदर्शिता, समझ और कड़ी मेहनत ने हमें ऐसा महान संविधान दिया, जो हर नागरिक को न्याय, समानता, बंधुत्व और सम्मान का अधिकार देता है।
उन्होंने कहा कि यह केंद्रीय कक्ष वही पवित्र स्थान है, जहां लंबी बहस, चर्चा और विचार-विमर्श के बाद हमारा संविधान तैयार हुआ। यहां जनता की उम्मीदों और सपनों को संविधान में जगह दी गई।
ओम बिड़ला ने बताया कि पिछले सात दशकों में संविधान के मार्गदर्शन में देश ने सामाजिक न्याय, समावेशी विकास, सुशासन और सामाजिक-आर्थिक प्रगति की दिशा में कई नीतियां और कानून बनाए। संविधान के मार्गदर्शन में भारत तेज़ी से परिवर्तन और विकास की ओर बढ़ रहा है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू संसद पहुंची
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा एलओपी मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा एलओपी राहुल गांधी और अन्य नेता 75वें संविधान दिवस के अवसर पर संसद के संविधान सदन में संविधान दिवस कार्यक्रम में शामिल हुए।
संविधान में पहले भी था सबको समान अधिकार
देश के संविधान में तत्कालीन ग्वालियर (मध्य प्रदेश) रियासत की दरबार पॉलिसी (1923) यानी तत्कालीन समय का संविधान शामिल है। इसकी मूल भावना को केंद्र में रखकर उस समय कानून भी बनाए गए।
देश आजादी से भी कई साल पहले ग्वालियर रियासत के महाराजा माधवराव सिंधिया प्रथम के मार्गदर्शन में बने संविधान की चर्चा आज संविधान दिवस (26 नवंबर) पर इसलिए की जा रही है क्योंकि दरबार पॉलिसी और उस समय के कानून दूरदर्शी सोच के साथ बने थे।
इसीलिए देश आजादी के बाद भी उनका महत्व बरकरार है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब देश का संविधान बना तो दरबार पॉलिसी के कई प्रावधानों को इसमें शामिल किया गया। ग्वालियर रियासत के समय के कानून आज भी फैले हैं। गौर करने वाली बात ये है कि जो कानून ग्वालियर रियासत में देश आजादी से पहले बन गए थे।
ये प्रावधान भी देखिए…
- पंचायत बोर्ड- इसके निर्णय के खिलाफ अपील नहीं होती थी आर्बिट्रेशन का नाम सबसे पहले 1940 में सुनने को मिला। इसमें दोनों पक्ष आर्बीट्रेटर के साथ कई दौर की बैठक करता है और फिर फैसले तक पहुंचा जाता है। ग्वालियर रियासत में पंचायत बोर्ड बनाया जाता था। इसमें स्थानीय ग्राम सभा के सम्मानित लोग पंच की भूमिका निभाते हुए प्रकरणों का निराकरण करते थे। इनके निर्णय के खिलाफ अपील नहीं होती थी।
- लैंड रिकॉर्ड में ऐसी स्पष्टता कि स्याही का रंग, फॉर्मेट सब तय भू-राजस्व संहिता में जमीन के रिकॉर्ड संधारण को लेकर सरकार आज माथापच्ची कर रही है। रिकॉर्ड में कांट-छांट, हेरफेर से बचने डिजिटलाइजेशन किया जा रहा है। ग्वालियर रियासत में फेहरिस्त लैंड रिकॉर्ड मैनुअल संवत-1972 था। इसमें खसरे का प्रारूप बेहद स्पष्ट था। जैसे की इसमें कौन सी एंट्री किस रंग की स्याही से की जाएगी? रोजनामचा-गिरदारी के संबंध में एंट्री के भी स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।
- ग्वालियर रियासत में था क्वारेंटाइन का भी कॉन्सेप्ट देश-विदेश में क्वारेंटाइन का कॉन्सेप्ट तब प्रचलन में आया, जब कोविड महामारी फैली। ग्वालियर रियासत की बात करें तो उस समय कानून निस्बत कोढ़ियान, संवत 1977 था। इसमें कोढ़ जैसी छूने से फैलने वाली बीमारी को रोकने तक के लिए कानून था। इलाज कैसे होगा,इसका भी उल्लेख था।
- पहले भी था सबको समान अधिकार- स्पेशल लॉ का प्रावधान संविधान का आर्टिकल 14,29 व 30- दरबार पॉलिसी का क्लॉज 8 में सभी जाति-धर्म के लोगों को समान अधिकार (क्लाज 8) देने की बात कही गई। हालांकि आकस्मिक स्थिति उत्पन्न होने पर समुदाय के लिए स्पेशल एक्ट बनाना भी आवश्यक बताया गया। संविधान में आर्टिकल-14 में समानता की बात है,जबकि आर्टिकल 29-30 में अल्पसंख्यकों के लिए विशेष कानून का हवाला है।
- जल्द न्याय संविधान का आर्टिकल 21 और दरबार पॉलिसी का क्लॉज 19दरबार पॉलिसी में उस समय स्पीडी जस्टिस (जल्द से जल्द न्याय) पर जोर दिया गया था।ये भी कहा गया था कि जज केवल भगवान के अधीन होगा। न्यायपालिका की स्वतंत्रता को क्लॉज 25 व 27 में समाहित किया गया है। संविधान के आर्टिकल 21 की सुप्रीम कोर्ट ने जब व्याख्या की,तब प्रकरणों के शीघ्र निराकरण की बात पर जोर दिया।
- राज्य की परिभाषा संविधान का आर्टिकल 12- दरबार पॉलिसी का क्लॉज 3इसमें राज्य को परिभाषित किया गया है । दोनों के अनुसार – जिस भी चीज पर शासन का नियंत्रण है,वह राज्य है।
26 नवंबर 1949 को लागू क्यों नहीं हुआ था संविधान?
संविधान सभा ने 2 साल 11 महीने और 17 दिन की कड़ी मेहनत के बाद 26 नवंबर 1949 को संविधान एडॉप्ट किया था। हालांकि, कानूनी रूप से इसे 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया, जिस दिन हम सब रिपब्लिक डे मनाते हैं।
भारत के संविधान की मूल अंग्रेजी कॉपी में 1 लाख 17 हजार 369 शब्द हैं। जिसमें 444 आर्टिकल, 22 भाग और 12 अनुसूचियां हैं। 26 जनवरी, 1930 को कांग्रेस ने देश की पूर्ण आजादी का नारा दिया था। इसी की याद में संविधान को लागू करने के लिए 26 जनवरी, 1950 तक इंतजार किया गया।
1929 में जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में पहली बार पूर्ण स्वराज की शपथ ली गई थी। उस अधिवेशन में अंग्रेज सरकार से मांग की गई थी कि भारत को 26 जनवरी, 1930 तक संप्रभु दर्जा दे दिया जाए। फिर 26 जनवरी, 1930 को पहली बार पूर्ण स्वराज या स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था।
इसके बाद 15 अगस्त, 1947 तक यानी अगले 17 सालों तक 26 जनवरी को ही स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता रहा। इस दिन के महत्व की वजह से 1950 में 26 जनवरी को देश का संविधान लागू किया गया और इसे गणतंत्र दिवस घोषित किया गया।
प्रेम बिहारी ने हाथ से लिखी संविधान की मूल कॉपी
डॉ. भीमराव अंबेडकर को संविधान सभा की ड्राफ्टिंग सभा का अध्यक्ष होने के नाते संविधान निर्माता होने का श्रेय दिया जाता है। मगर प्रेम बिहारी वे शख्स हैं जिन्होंने अपने हाथ से अंग्रेजी में संविधान की मूल कॉपी यानी पांडुलिपि लिखी थी।
देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने खुद कैलीग्राफर प्रेम बिहारी से संविधान की मूल कॉपी लिखने की गुजारिश की थी। प्रेम बिहारी ने न केवल इसे स्वीकार किया था बल्कि इसके बदले फीस लेने से भी इनकार किया था।
संविधान को हाथ से लिखने में प्रेम बिहारी को 6 महीने लगे थे। इस दौरान 432 निब घिस गईं थीं। प्रेम बिहारी को संविधान हाल में एक कमरा दिया गया, जो बाद में संविधान क्लब हो गया।
भारत का संविधान दुनिया में अकेला है, जिसके हर भाग में चित्रकारी
इसमें राम-सीता से लेकर अकबर और टीपू सुल्तान तक के चित्र हैं। इन्हें शांति निकेतन के नंदलाल बोस की अगुआई वाली टीम ने अपनी कला से सजाया। उनके भी नाम संविधान की मूल कॉपी में लिखे हैं।
संविधान की हिंदी कॉपी कैलीग्राफर वसंत कृष्ण वैद्य ने हाथ से लिखी है। इसका कागज अलग है। इसे हैंडमेड पेपर रिसर्च सेंटर पुणे में बनाया गया है। संविधान की हिंदी कॉपी में 264 पन्ने हैं, जिसका वजन 14 किलोग्राम है।
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भास्कर एक्सप्लेनर- संविधान लिखने में 432 निब घिस गईं: मूल कॉपी का वजन 13 किलो, नाइट्रोजन चैंबर में क्यों रखा गया है
क्या आप जानते हैं कि हमारा संविधान किसने लिखा? कुछ लोगों के मन में डॉ. भीमराव अंबेडकर का नाम आएगा, जबकि इस इस सवाल का सही जवाब प्रेम बिहारी नारायण रायजादा हैं। डॉ. अंबेडकर को संविधान सभा की ड्राफ्टिंग सभा का अध्यक्ष होने के नाते संविधान निर्माता होने का श्रेय दिया जाता है, मगर प्रेम बिहारी वे शख्स हैं जिन्होंने अपने हाथ से अंग्रेजी में संविधान की मूल कॉपी यानी पांडुलिपि लिखी थी। इस काम में उन्हें 6 महीने लगे और कुल 432 निब घिस गईं।
