कश्मीर में बनी दिल्ली ब्लास्ट की प्लानिंग:अल-फलाह यूनिवर्सिटी तैयारी और नूंह को छिपने के लिए चुना, मॉड्यूल ट्रेस हुआ तो उमर सुसाइड बॉम्बर बना
दिल्ली में 10 नवंबर को हुए ब्लास्ट की जांच में फरीदाबाद के व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल की साजिश अब पूरी तरह सामने आ रही है। एजेंसियों के मुताबिक इस मॉड्यूल की प्लानिंग बेहद खतरनाक थी। NIA ने कश्मीर से लेकर अल-फलाह यूनिवर्सिटी और नूंह के रास्ते दिल्ली में किए गए ब्लास्ट की पूरी साजिश क्रैक की है।
जांच टीम ने इस मॉड्यूल के संपर्क में आए 1,000 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की। इससे पता चला कि मॉड्यूल को सुसाइड बॉम्बर तैयार करने, ड्रोन अटैक कराने और लोन वुल्फ हमले तक की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। यानी एक ही नेटवर्क के जरिए कई तरह के हमले कराने की प्लानिंग चल रही थी।
NIA के मुताबिक इस मॉड्यूल की जड़ें कश्मीर में खड़ी की गईं और उसके बाद फरीदाबाद के धौज में स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी कैंपस को ऑपरेशन और प्लानिंग सेंटर बनाया गया। उसी दौरान यह फैसला भी हुआ कि इस मॉड्यूल में डॉक्टरों को शामिल किया जाएगा, ताकि ब्लास्ट और विस्फोटक तैयार करने का काम साइंटिफिक तरीके से हो सके।
10 नवंबर को लाल किला मेट्रो स्टेशन की पार्किंग के पास शाम 6:52 बजे हुए कार ब्लास्ट में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है और 20 से ज्यादा घायल हैं। इस आतंकी साजिश में अब तक 6 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।
पहले जानिए फरीदाबाद मॉड्यूल का खतरनाक प्लान क्या था…
- सीरियल IED ब्लास्ट: मॉड्यूल ने 2,900 किलो अमोनियम नाइट्रेट से 200 IED तैयार कर दिल्ली-NCR में सीरियल ब्लास्ट प्लान किए थे। यह हमला 26/11 जैसा किया जाना था, जिसमें ज्यादा से ज्यादा जान का नुकसान करने का टारगेट रखा गया था।
- सुसाइड बॉम्बिंग अटैक: डॉ. उमर उन नबी जैसे डॉक्टरों को सुसाइड बॉम्बर बनाकर फिदायीन हमला करवाया जाना था। डॉ. उमर ट्रेंड बॉम्बर था और लगातार गिरफ्तारियां होने के बाद दिल्ली के लाल किला जाकर पैनिक ब्लास्ट कर दिया।
- हमास स्टाइल ड्रोन अटैक: अपने हैंडलर के इशारे पर ड्रोन में विस्फोटक फिट करके अटैक करना था। जासीर बिलाल वानी जैसे टेक्निकल एक्सपर्ट्स को इसी तरह की ट्रेनिंग देकर मास्टर ट्रेनर तैयार किया जाना था। जो आगे दूसरे सदस्यों को ट्रेनिंग देने की जिम्मेदारी संभालता।
- 32 वाहनों में कार बम प्लान: प्लानिंग के अंतिम चरण में नई या सेकेंड हैंड 32 कारों की फ्लीट तैयार करनी थी। जिनमें IED फिट कर अटैक करना था। 4 कारें खरीद ली गई थीं। अल-फलाह यूनिवर्सिटी से मिली डॉक्टरों की डायरी को डीकोड करने पर यह जानकारी मिली।
- लोन वुल्फ अटैक: हैंडलर ने सुसाइड बॉम्बिंग के साथ लोन वोल्फ अटैक के लिए रिक्रूटमेंट किया, यानी डॉक्टरों को अकेले ऑपरेट करने की ट्रेनिंग दी गई, ताकि डिटेक्शन कम हो। साथियों के अरेस्ट होने के बाद उमर ने लोन वुल्फ मोड अपनाया। यह मॉड्यूल की बैकअप स्ट्रैटजी थी यानी अकेले ही अटैक करके बड़े प्लान को कवर करना।
अब जानिए फरीदाबाद में आतंकी मॉड्यूल कैसे पकड़ा गया…
- अक्टूबर 2023: कश्मीर के कुलगाम जिले की एक मस्जिद में पहली मीटिंग हुई। मौलवी इरफान अहमद ने डॉ. मुजम्मिल, अदील अहमद समेत कश्मीरी डॉक्टरों को जिम्मेदारियां दीं। अल-फलाह यूनिवर्सिटी को ऑपरेशन का बेस बनाने को कहा।
- जनवरी 2025: मॉड्यूल ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी के पास किराए के कमरों में अमोनियम नाइट्रेट, हथियार और अन्य विस्फोटक सामग्री का स्टॉक जमा करना शुरू किया।
- 18-19 अक्टूबर 2025: श्रीनगर–नौगाम इलाके में प्रोपेगैंडा पोस्टर मिले। J&K पुलिस ने मौलवी इरफान अहमद और जमीर अहमद को गिरफ्तार किया। पूछताछ में अल-फलाह यूनिवर्सिटी और कश्मीरी डॉक्टरों की भूमिका सामने आई।
- 30 अक्टूबर 2025: अल-फलाह यूनिवर्सिटी से डॉ. मुजम्मिल शकील को हिरासत में लिया गया। इसके बाद फरीदाबाद में 12 टीमों ने बड़े पैमाने पर सर्चिंग शुरू की।
- 8-10 नवंबर 2025: डॉ. मुजम्मिल की पूछताछ से अहम लीड मिली। अल-फलाह यूनिवर्सिटी के पास धौज गांव से 360 किग्रा अमोनियम नाइट्रेट और हथियार, फतेहपुर तगा से 2,563 किग्रा अमोनियम नाइट्रेट, AK-47, डेटोनेटर और 20 टाइमर जब्त किए।
- 10 नवंबर 2025: गिरफ्तारियों के दबाव में यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. उमर-उन-नबी ने शाम 6:52 बजे दिल्ली में लाल किला मेट्रो के पास i20 कार में पैनिक ब्लास्ट किया।
- 11-16 नवंबर 2025: यूनिवर्सिटी के 3 डॉक्टर डिटेन किए गए। NIA ने आमिर राशिद अली को 10 दिन की कस्टडी में लिया। कुल मिलाकर 15+ लोगों की गिरफ्तारी हुई।
- 17–18 नवंबर 2025: ED ने 19 जगहों पर छापेमारी की और अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जावेद अहमद सिद्दीकी को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया।
- 20 नवंबर 2025: NIA ने डॉ. मुजम्मिल, डॉ. अदील, डॉ. शाहीन और मौलवी इरफान को 10 दिन की कस्टडी में लिया।
स्लीपर सपोर्ट के लिए नूंह का इस्तेमाल इन्वेस्टिगेशन से जुड़े एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक अब तक की जांच में पता चला है कि फरीदाबाद मॉड्यूल ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी के आसपास के क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स और स्टोरेज सेंटर बनाया तो नूहं जिले में विस्फोटक एसेंबलिंग और छिपने के लिए स्लीपर सपोर्ट लेने का प्लान बनाया था।
यहां से निकलने वाले दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, कुंडली मानेसर एक्सप्रेसवे, दिल्ली-आगरा हाईवे के माध्यम से दिल्ली-NCR के साथ साथ ऐतिहासिक शहरों से सीधी कनेक्टिविटी थी। यहां पर आने जाने वालों की जांच भी बहुत कम होती है। यूनिवर्सिटी की मस्जिद के मौलवी इश्तियाक को साथ लाना और फिर डॉ. उमर के नूंह में छिपना इसी स्ट्रेटजी का हिस्सा माना है।
पहला प्रोफेशनल वुमेन टेरर नेटवर्क जांच एजेंसियों के मुताबिक, फरीदाबाद मॉड्यूल के व्हाइट-कॉलर टेरर ग्रुप ने यूनिवर्सिटी को बेस बनाकर पहला प्रोफेशनल वुमेन टेरर नेटवर्क खड़ा करने की योजना बनाई। डॉ. शाहीन सईद को इसका हेड बनाया गया। इसके तहत वुमेन स्टूडेंट्स का ब्रेनवॉश कर IED असेंबली, रेकी और सुसाइड अटैक के लिए तैयार करना था।
ये भी पता चला है कि जैश-ए-मोहम्मद ने इसी साल अक्टूबर में पाकिस्तान के बहावलपुर जमात-उल-मोमिनात का गठन किया था और मसूद अजहर की भाभी सादिया अजहर को इसका हेड बनाया। जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को रिक्रूट किया। इसी तरह भारत में इस आइडिया पर काम करने के लिए डॉ. शाहीन सईद को जिम्मेदारी दी गई थी।
400 जगहों पर सर्चिंग, 1 हजार से पूछताछ, 73 गवाहों ने कन्फर्म किया जांच एजेंसियों ने 18 अक्टूबर को कश्मीर में पोस्टर मिलने के बाद से करीब 400 जगहों पर सर्च ऑपरेशन चलाकर एक हजार से ज्यादा लोगों से पूछताछ की। जांच के दौरान 73 गवाहों से फरीदाबाद के मॉड्यूल को लेकर कन्फर्म किया। यूनिवर्सिटी से जुड़े 200 लाेगाें को भी रडार पर लिया गया। जिनसे काफी अहम जानकारियां जांच एजेंसियों को मिलीं।
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