बिहार चुनाव का रिजल्ट के बाद भाजपा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह को 6 साल के लिए पार्टी से निलंबित कर दिया है। भाजपा ने निलंबन को लेकर चिट्ठी भी जारी कर दी है। इसमें पूछा है कि, आपकी गतिविधियां पार्टी के विरोध में है। ये अनुशासनहीनता के दायरे में आता है। इससे पार्टी को नुकसान हुआ है। आपको पार्टी से निलंबित करते हुए पूछा जा रहा है कि क्यों ना आपको निष्कासित कर दिया जाए। 7 दिन में जबाव दें।
आरके सिंह 2013 में भाजपा में शामिल हुए थे। वे लगातार पार्टी लाइन से अलग बयानबाजी कर रहे थे। उन्होंने चुनाव से पहले NDA के कैंडिडेट्स पर भी सवाल उठाए थे। साथ ही बिहार में 62 हजार करोड़ के बिजली घोटाले का भी नीतीश सरकार पर आरोप लगाया था।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने डिप्टी CM सम्राट चौधरी, जेडीयू के अनंत सिंह, आरजेडी के सूरजभान सिंह को हत्या का आरोपी बताया था।
साथ ही, ऐसे लोगों को वोट नहीं देने की अपील की थी। फेसबुक पर लिखा था कि, ऐसे लोगों को वोट देने से अच्छा है चुल्लू भर पानी में डूब कर मर जाना।
दिवाली पर आरके सिंह का फेसबुक पोस्ट
BJP ने कटिहार से MLC अशोक अग्रवाल और कटिहार मेयर उषा अग्रवाल पर भी कार्रवाई करते हुए, 6 साल के सस्पेंड किया है। पार्टी ने एक हफ्ते में जवाब मांगा है, नहीं तो निष्कासित करने की बात कही गई है।
आरके सिंह ने कहा था- बिजली घोटाले की CBI जांच हो
आरके सिंह ने यह दावा किया था, बिहार सरकार ने अडाणी समूह के साथ जो बिजली खरीद समझौता किया है, वह राज्य की जनता के साथ सीधा धोखा है। इसमें भारी वित्तीय अनियमितताएं की गई हैं।
पूर्व मंत्री ने कहा था, ‘NDA सरकार ने अडाणी पावर लिमिटेड के साथ 25 साल के लिए बिजली खरीदने का एक एग्रीमेंट किया है। इस समझौते के तहत बिहार सरकार अडाणी समूह से 6 रुपए 75 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदेगी, जबकि मौजूदा दर इससे काफी कम है।
इस एग्रीमेंट की शर्तों और जमीन आवंटन प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई है। इससे जनता पर भारी बोझ पड़ेगा।
जब प्लांट सरकारी कंपनी को लगाना था तो प्राइवेट को टेंडर क्यों दिया गया
आरके सिंह ने कहा था, ‘प्लांट को पहले NTPC के जरिए बनाया जाना था। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में ये कह दिया था कि ये भारत सरकार के उपक्रम द्वारा बनाया जाएगा। यानी NTPC द्वारा बनाया जाना था।’
उन्होंने ये भी घोषणा कर दी थी कि इस प्रोजेक्ट में लागत कॉस्ट 21 हजार 400 करोड़ रुपए आएगा। यानी 9 करोड़ रुपए प्रति मेगा वॉट। उसके बाद ये निर्णय कैसे बदल गया, ये बिजेंद्र यादव को बताना चाहिए।
सरकारी कंपनी इस प्रोजेक्ट को सही दाम पर बना देती, फिर क्यों इसको बदला गया। किसको फायदा देने के लिए इसे बदला गया। क्या किसी प्राइवेट कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए निर्णय बदला गया।
आरके सिंह ने कहा, प्लांट बनाने का पूरा खर्चा 9 करोड़ रुपए आ रहा है। आरके सिंह ने सोशल मीडिया X पर दो पेपर भी शेयर किया है। जिसमें उन्होंने कहा- जो मैंने कागजात शेयर किए हैं इसके हिसाब से फिक्स चार्ज प्रति यूनिट 2 रुपए 32 पैसे आएगा।
हालांकि आपने दे दिया 4 रुपए 16 पैसे। यानी 1 रुपए 84 पैसे प्रति यूनिट ज्यादा। ये बड़ा घोटाला है। चोरी और सीना जोरी एक साथ नहीं चलेगा। हम भ्रष्टाचार के मुद्दे पर चुप नहीं रह सकते।
