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कैसे हर्ष महाजन जीत गए पर्ची से, कांग्रेस और भाजपा के बराबर ही थे वोट; क्या है नियम 102

हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट पर हुए चुनाव में बीजेपी के हर्ष महाजन की जीत हुई है, जबकि कांग्रेस के प्रत्याशी अभिषेक मनु सिंघवी की हार हुई है। दोनों ही उम्मीदवारों को 34-34 वोट मिले थे लेकिन हार-जीत का फैसला टॉस करवाकर किया गया, जिसमें हर्ष महाजन विजयी रहे। अधिकारियों ने बताया कि मुकाबला 34-34 मतों से बराबरी पर रहा था लेकिन उसके बाद महाजन को ‘ड्रॉ’ के जरिए विजेता घोषित कर दिया गया।

ऐसा संभवत: पहली बार हुआ है, जब राज्यसभा चुनाव में विजेता का फैसला ‘ड्रॉ’ के जरिए हुआ है। यह जन प्रतिनिधित्व अधिनियम (Representaion of the People Act), 1951 की धारा 102 के तहत किया गया है। इसमें यह प्रावधान किया गया है कि अगर वोटों की गिनती के बाद उम्मीदवारों के बीच बराबरी की स्थिति बन जाए तो ड्रॉ के जरिए उसका समाधान निकाला जा सकता है। इस खंड का नियम कहता है कि ऐसी परिस्थिति में विजेता वही होगा, जिसे ड्रा द्वारा ‘अतिरिक्त वोट’ प्राप्त होगा।

चुनाव आयोग के सूत्रों के हवाले से ईटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा चुनाव में ड्रॉ के जरिए नतीजे की पूरी प्रक्रिया कानून के अनुसार संपन्न की गई है। इस दौरान रिटर्निंग अफसर और दोनों उम्मीदवार वहां मौजूद थे। आयोग के सूत्रों ने बताया है कि इस फैसले पर अभी तक कांग्रेस की ओर से कोई शिकायत नहीं मिली है। इससे पहले चुनाव आयोग ने हिमाचल प्रदेश में हाई-वोल्टेज ड्रामे के बीच राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस विधायकों को सरकारी विमान से ले जाने की बीजेपी की शिकायत को भी खारिज कर दिया।

स्थानीय चुनाव में हुए हैं इस नियम के इस्तेमाल
बता दें कि ड्रॉ के जरिए उम्मीदवारों की हार-जीत का फैसला स्थानीय निकायों में पहले भी होता रहा है। इससे पहले सितंबर 2019 में राजस्थान के नगर निगम चुनावों के दौरान सूरतगढ़ और बांसवाड़ा नगर पालिकाओं में दो वार्डों में कांग्रेस और भाजपा के उम्मीदवार बराबरी पर थे। तब इसी तरह लॉटरी/ड्रॉ निकालकर नतीजे तय किए गए थे। उस वक्त चुनावी नतीजे कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में आए थे।

इससे पहले 2017 के फरवरी में भी बृहन्मुंबई नगर निगम के चुनावों में इसी तरह एक सीट पर फैसला हुआ था। उस वक्त चुनावी लड़ाई में बीजेपी और शिवसेना के बीच तीन राउंड की गिनती दोबारा हुई थी लेकिन हर बार बीजेपी और शिवसेना के उम्मीदवार बराबरी पर रहे। अंतत: ड्रॉ के जरिए चुनावी नतीजे का फैसला हुआ था, जिसमें बीजेपी उम्मीदवार अतुल शाह की जीत हुई थी। उसी साल बाद में दिसंबर 2017 में भी मथुरा निकाय चुनाव में बीजेपी कैंडिडेट मीरा अग्रवाल एक वार्ड में 874 वोटों से कांग्रेस उम्मीदवार के बराबरी पर थीं। फिर लॉटरी के अंतिम ड्रा के बाद उन्हें विजेता घोषित किया गया था।

क्या कहता है कानून
जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 102 में दो कैंडिडेट के बीच बराबर मत होने की स्थिति में नतीजे कैसे तय होंगे, इस प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है। उसमें कहा गया है कि यदि किसी चुनाव याचिका की सुनवाई के दौरान यह प्रतीत होता है कि चुनाव में किसी भी उम्मीदवार के बीच वोटों की समानता है और वोट जोड़ने से उनमें से कोई भी उम्मीदवार निर्वाचित घोषित होने का हकदार हो जाएगा, तो ड्रॉ निकालकर विजेता घोषित किया जा सकता है। इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत रिटर्निंग अफसर द्वारा लिया गया कोई भी निर्णय, जहां तक ​​यह उन उम्मीदवारों के बीच प्रश्न निर्धारित करता है, याचिका के प्रयोजनों के लिए भी प्रभावी होगा।

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