Headlines

रिटेल महंगाई 14-साल में सबसे कम, अक्टूबर में 0.25% रही:खाने-पीने का सामान सस्ता होने का असर; सितंबर में 1.44% थी

अक्टूबर में रिटेल महंगाई 0.25% के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गई है। इसका कारण खाने-पीने की चीजों की कीमतों में कमी है। ये वर्तमान CPI सीरीज में अब तक की सबसे कम महंगाई है। यानी, ये करीब 14 साल का निचला स्तर है। इससे पहले सितंबर में ये 1.44% पर थी।

भारत में CPI की मौजूदा सीरीज 2012 के बेस ईयर पर बेस्ड है। मतलब, 2012 की कीमतों को 100 मानकर तुलना की जाती है। पहले 2010 या 1993-94 वाली सीरीज थीं, लेकिन समय के साथ अपडेट होती रहती है ताकि आंकड़े सही रहें। हर नई CPI सीरीज में बेस ईयर चेंज होता है।

अक्टूबर में खाने-पीने के सामानों की कीमत घटी

  • महंगाई के बास्केट में लगभग 50% योगदान खाने-पीने की चीजों का होता है। इसकी महीने-दर-महीने की महंगाई माइनस 2.28% से घटकर माइनस 5.02% हो गई है।
  • सितंबर महीने में ग्रामीण महंगाई दर 1.07% से घटकर माइनस 0.25% हो गई है। वहीं शहरी महंगाई 1.83% से घटकर 0.88% पर आ गई है।

बेस ईयर क्या होता है?

बेस ईयर वो साल होता है जिसकी कीमतों को आधार (बेस) माना जाता है। यानी, उसी साल की चीजों की औसत कीमत को 100 का मान देते हैं। फिर, दूसरे सालों की कीमतों की तुलना इसी बेस ईयर से की जाती है। इससे पता चलता है कि महंगाई कितनी बढ़ी या घटी है।

उदाहरण: मान लीजिए 2020 बेस ईयर है। उस साल एक किलो टमाटर ₹50 का था। अब 2025 में वो ₹80 का हो गया। तो महंगाई = (80 – 50) / 50 × 100 = 60% बढ़ी। यही फॉर्मूला CPI में यूज होता है, लेकिन ये पूरे बाजार की चीजों पर लागू होता है।

बेस ईयर कैसे चुना जाता है और कैसे काम करता है?

  • सरकार आमतौर पर हर 5-10 साल में नया बेस ईयर चुनती है।
  • ये ऐसा साल होता है जो सामान्य हो, न ज्यादा सूखा हो, न महामारी, न ज्यादा महंगाई।

महंगाई कैसे बढ़ती-घटती है?

महंगाई का बढ़ना और घटना प्रोडक्ट की डिमांड और सप्लाई पर निर्भर करता है। अगर लोगों के पास पैसे ज्यादा होंगे तो वे ज्यादा चीजें खरीदेंगे। ज्यादा चीजें खरीदने से चीजों की डिमांड बढ़ेगी और डिमांड के मुताबिक सप्लाई नहीं होने पर इन चीजों की कीमत बढ़ेगी। वहीं अगर डिमांड कम होगी और सप्लाई ज्यादा तो महंगाई कम होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Budget 2024