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दिल्ली-NCR में पटाखा बैन, राज्य बोले-बच्चों को दिवाली मनाने दें:दो घंटे ग्रीन पटाखे फोड़ने की परमिशन दी जाए, सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

दिल्ली-NCR में पटाखा बैन, राज्य बोले-बच्चों को दिवाली मनाने दें:दो घंटे ग्रीन पटाखे फोड़ने की परमिशन दी जाए, सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

नई दिल्ली2 घंटे पहले
ग्रीन पटाखों में हानिकारक रसायनों जैसे बेरियम, नाइट्रेट, पोटैशियम क्लोरेट, सल्फर आदि का इस्तेमाल कम या बिल्कुल नहीं होता।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली-एनसीआर में ग्रीन पटाखों को बनाने और बेचने की परमिशन देने वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रखा है। सुनवाई के दौरान दिल्ली-एनसीआर के राज्यों ने कोर्ट से गुजारिश किया कि ग्रीन पटाखों को फोड़ने की परमिशन दी जाए।

दिल्ली-एनसीआर के राज्यों की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने चीफ जस्टिस बीआर गवई की बेंच से कहा- बच्चों को कम से कम 2 दिन दिवाली का जश्न मनाने दिया जाए। रात 8 बजे से 10 बजे तक हरे पटाखे फोड़ने की परमिशन दी जाए।

इससे पहले 26 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने सर्टिफाइड ग्रीन पटाखे बनाने की मंजूरी दी थी। लेकिन बिना कोर्ट की इजाजत NCR में बिक्री न करने की शर्त रखी थी। दिल्ली-एनसीआर में दिल्ली और उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा के 16 जिले आते हैं।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 2020 में पहली बार दिल्ली में पटाखे फोड़ने पर बैन लगाया था। 2024 में दिवाली पर बैन का उल्लघंन होने के बाद कोर्ट ने दिल्ली में सभी तरह के पटाखों के निर्माण, भंडारण, बिक्री और फोड़ने पर रोक लगा दी। 19 दिसंबर 2024 को दिल्ली सरकार ने 2025 के पूरे साल पटाखों पर बैन का नोटिफिकेशन जारी किया था।

दिल्ली-NCR राज्यों की ओर से सुप्रीम कोर्ट को 8 सुझाव…

  1. दिवाली पर हरे पटाखे: रात 8 बजे से 10 बजे तक ग्रीन पटाखे फोड़ने की अनुमति दी जाए।
  2. सिर्फ हरे पटाखे: नेशनल एनवायरमेंट इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (NEERI) की ओर से प्रमाणित ग्रीन पटाखों का ही निर्माण और बिक्री हो।
  3. ज्वाइंट पटाखों पर रोक: ज्वाइंट पटाखे या लड़ी पटाखों का निर्माण, बिक्री और उपयोग न हो।
  4. लाइसेंस व्यापारी: पटाखों की बिक्री केवल लाइसेंस प्राप्त व्यापारियों के माध्यम से हो और वे केवल हरे पटाखे बेचें।
  5. ऑनलाइन बिक्री पर रोक: फ्लिपकार्ट, अमेजन जैसे ई-कॉमर्स वेबसाइट्स पर पटाखों के ऑनलाइन ऑर्डर और बिक्री पर रोक लगे।
  6. क्रिसमस और नए साल पर परमिशन: क्रिसमस और नए साल पर रात 11:55 बजे से 12:30 बजे तक ग्रीन पटाखे फोड़ने की परमिशन दी जाए।
  7. गुरपुरब पर समय: गुरपुरब पर सुबह 4 बजे से 5 बजे और रात 9 बजे से 10 बजे तक हरे पटाखे फोड़ने की अनुमति हो।
  8. शादी और अन्य अवसर: शादी और अन्य अवसरों पर हरे पटाखों की बिक्री व उपयोग की परमिशन दी जाए।

अब जानिए पिछली सुनवाई में क्या कुछ हुआ…

26 सितंबर: सुप्रीम कोर्ट ने अगले आदेश तक NCR में पटाखा बिक्री पर रोक लगाई

जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बीआर गवई, जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने मैन्युफैक्चरर्स के लिए एक शर्त भी रखी थी। बेंच ने कहा था कि वे कोर्ट के अगले आदेश तक NCR में कोई भी पटाखा नहीं बेचेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा-

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पटाखों पर पूरी तरह बैन न तो संभव है, न ही यह सही है। हम केंद्र से आग्रह करते हैं कि दिल्ली सरकार, पटाखा बनाने और बेचने वालों सहित सभी हितधारकों से बातचीत करके पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध को संशोधित करने का प्रस्ताव लेकर आएं। एक व्यावहारिक समाधान लेकर आएं, जिसे सभी स्वीकार करें।

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सुप्रीम कोर्ट ने 3 अप्रैल 2025 को दिल्ली-NCR में पटाखों पर बैन सिर्फ सर्दियों के मौसम के बजाय पूरे साल तक बढ़ाने का आदेश दिया था। इस फैसले को कोर्ट में चुनौती दी गई है, जिसपर अभी सुनवाई चल रही है।

12 सितंबर: सुप्रीम कोर्ट बोला- सिर्फ दिल्ली-NCR क्यों, देशभर में पटाखे बैन हो

सुप्रीम कोर्ट ने 12 सितंबर को प्रदूषण नियंत्रण को लेकर कहा था कि अगर दिल्ली-NCR के शहरों को साफ हवा का हक है तो दूसरे शहरों के लोगों को क्यों नहीं? CJI गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा- अगर पटाखों पर प्रतिबंध लगाना है तो पूरे देश में बैन करना चाहिए। साफ हवा का अधिकार सिर्फ दिल्ली-NCR तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि पूरे देश के नागरिकों को मिलना चाहिए।

इससे पहले दिल्ली-एनसीआर में पटाखा बैन मामले पर अप्रैल में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसे बेहद जरूरी बताया था। कोर्ट का कहना था कि प्रतिबंध को कुछ महीनों तक सीमित करने से कोई मकसद पूरा नहीं होगा। लोग पूरे साल पटाखों को इकट्ठा करेंगे और उस समय बेचेंगे, जब बैन लगा होगा।

दिल्ली में 14 अक्टूबर को GRAP-1 लागू किया गया था

दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स 200 पार होने के बाद 14 अक्टूबर को दिल्ली NCR में GRAP-1 लागू कर दिया गया था। इसके तहत होटलों और रेस्तरां में कोयला और जलाऊ लकड़ी के उपयोग पर बैन है। कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी मैनेजमेंट ने एजेंसियों को पुराने पेट्रोल और डीजल गाड़ियों (बीएस -III पेट्रोल और बीएस-IV डीजल) के संचालन पर सख्त निगरानी के आदेश दिए हैं।

आयोग ने एजेंसियों से सड़क बनाने, रेनोवेशन प्रोजेक्ट और मेंटेनेंस एक्टिविटीज में एंटी-स्मॉग गन, पानी का छिड़काव और डस्ट रेपेलेंट तकनीकों के उपयोग को बढ़ाने के लिए भी कहा है।

​​​​​​हाई लेवल से ऊपर AQI खतरा

AQI एक तरह का थर्मामीटर है। बस ये तापमान की जगह प्रदूषण मापने का काम करता है। इस पैमाने के जरिए हवा में मौजूद CO (कार्बन डाइऑक्साइड ), OZONE, (ओजोन) NO2 (नाइट्रोजन डाइऑक्साइड), PM 2.5 (पार्टिकुलेट मैटर) और PM 10 पोल्यूटेंट्स की मात्रा चेक की जाती है और उसे शून्य से लेकर 500 तक रीडिंग में दर्शाया जाता है।

हवा में पॉल्यूटेंट्स की मात्रा जितनी ज्यादा होगी, AQI का स्तर उतना ज्यादा होगा। और जितना ज्यादा AQI, उतनी खतरनाक हवा। वैसे तो 200 से 300 के बीच AQI भी खराब माना जाता है, लेकिन अभी हालात ये हैं कि राजस्थान, हरियाणा दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में ये 300 के ऊपर जा चुका है। ये बढ़ता AQI सिर्फ एक नंबर नहीं है। ये आने वाली बीमारियों के खतरे का संकेत भी है।

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