SC बोला- 3.66 लाख वोटर्स की जानकारी दे चुनाव आयोग:EC ने कहा- फाइनल लिस्ट में ज्यादातर नए मतदाता जोड़े, कुछ पुराने नाम भी
सुप्रीम कोर्ट में आज यानी मंगलवार को SIR (वोटर वेरिफिकेशन) पर सुनवाई हुई। SIR के खिलाफ वकील प्रशांत भूषण ने दलील दी कि आयोग ने मतदाता सूची को साफ करने के बजाय, समस्या को और बढ़ा दिया है।
उन्होंने कहा, इसमें पारदर्शिता का भी अभाव है। चुनाव आयोग ने दिशानिर्देशों के अनुसार जानकारी अपलोड नहीं की है। सुनवाई के दौरान 65 व्यक्तियों की एक लिस्ट पेश की और कहा कि वे हलफनामा दाखिल कर सकते हैं।
वहीं, वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, ‘आपके माननीयों ने उन्हें 65 लाख नामों की सूची देने के लिए मजबूर किया, लेकिन जिन 3.66 लाख लोगों का नाम हटाए गए हैं, उनमें से किसी को भी नोटिस नहीं मिला है।
इसपर कोर्ट ने कहा, ‘हमने निर्देश दिया था कि सभी जिलों में नामों को बोर्ड पर लगाया जाएगा। जवाब में प्रशांत भूषण ने कहा, ‘ऐसा नहीं किया गया है।’
कोर्ट ने आयोग से पूछा- क्या 3.66 लाख लोगों में से जिसे नोटिस नहीं मिला क्या वो शिकायत लेकर आगे आया है? इस चुनाव आयोग ने कहा- नहीं, किसी ने कोई शिकायत नहीं की है।
इसके बाद कोर्ट ने चुनाव आयोग को 3.66 लाख वोटर्स की जानकारी देने के निर्देश दिए। इसपर आयोग ने कहा, ‘फाइनल लिस्ट में ज्यादातर नए मतदाता जोड़े गए हैं। इनमें कुछ पुराने नाम भी शामिल हैं।’
कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा कि जो भी उपलब्ध जानकारी है, उसे गुरुवार शाम (9 अक्टूबर) तक अदालत में पेश करे। यानि मामले की अगली सुनवाई अब 9 अक्टूबर को होगी
हमने फाइनल लिस्ट के बाद एनालिसिस की है- भूषण
प्रशांत भूषण ने कोर्ट में कहा- ‘अंतिम सूची आने के बाद, हम कुछ विश्लेषण कर पाए हैं। हमने SIR के लिए चुनाव आयोग के 2003 के दिशानिर्देश देखे हैं और 2016 के एक और दिशानिर्देश, जिसमें फर्जी मतदाताओं को हटाने के तरीके वगैरह बताए गए हैं।
हमने अभी लिखित कॉपी सौंपी हैं। उस पर चर्चा करने से पहले, मैं चाहता हूं कि योगेंद्र यादव को 10 मिनट का समय दें ताकि वे SIR के कारण महिलाओं, मुसलमानों आदि के अनुपातहीन बहिष्कार की वास्तविक पृष्ठभूमि बता सकें।
जे. कांत: कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन आप आगे कैसे बढ़ना चाहते हैं? SIR की वैधता पर या…?’
बिहार SIR पर टुकड़ों में राय नहीं दे सकता- SC
इससे पहले 15 सितंबर को सुनवाई हुई थी। इस दौरान याचिकाकर्ताओं की तरफ से कहा गया कि चुनाव आयोग प्रक्रिया का पालन नहीं कर रहा है। नियमों की अनदेखी हो रही है। इस पर कोर्ट ने कहा-
हम यह मानकर चलेंगे कि चुनाव आयोग अपनी जिम्मेदारियों को जानता है। अगर कोई गड़बड़ी हो रही है, तो हम इसको देखेंगे। अगर बिहार में SIR के दौरान चुनाव आयोग द्वारा अपनाई गई कार्यप्रणाली में कोई अवैधता पाई जाती है, तो पूरी प्रक्रिया को रद्द किया जा सकता है।

पिछली सुनवाई में जस्टिस सूर्यकांत शर्मा और जस्टिस बागची की बेंच ने स्पष्ट किया कि वह बिहार SIR पर टुकड़ों में राय नहीं दे सकता। उसका अंतिम फैसला केवल बिहार में ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में SIR पर लागू होगा।
SIR पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की सारे अपडेट्स जानने के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए….
अपडेट्स
कोर्ट ने EC से 3.66 लाख वोटर्स की जानकारी मांगी
कोर्ट ने चुनाव आयोग को चेतावनी दी कि यह प्रक्रिया इस उद्देश्य से की जा रही है कि किसके लिए यह पूरा अभियान चलाया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई अवैध प्रवासी हैं जो अपनी पहचान उजागर नहीं करना चाहते, तो उन्हें भी इस प्रक्रिया में ध्यान में रखा जाएगा।
अदालत ने चुनाव आयोग से यह भी कहा कि वह उन व्यक्तियों की सूची उपलब्ध कराए जो आवश्यक आदेश न मिलने के कारण अपील करना चाहते हैं। इस केस की सुनवाई अब गुरुवार को हेागी।
आयोग ने 20-21 लाख नए नाम जोड़े हैं, लिस्ट शेयर नहीं की- भूषण
सुनवाई के दौरान भूषण ने कहा, ‘चुनाव आयोग के पास 3.66 लाख मतदाताओं की सूची है, जिनके नाम सूची से हटा दिए गए हैं। आयोग ने 20-21 लाख नए नाम जोड़े हैं, लेकिन इन आंकड़ों को साझा नहीं किया। यह जानकारी आयोग के पास एक क्लिक पर उपलब्ध हो सकता है, लेकिन इसे अभी तक साझा नहीं किया गया।”
EC के वकील बोले- कोर्ट में जिस व्यक्ति को पेश किया गया, उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी
चुनाव आयोग के वकील मनिंदर सिंह, ने कोर्ट को बताया, ‘जिन दो व्यक्तियों को कोर्ट में पेश किया गया था, उनसे बार-बार जानकारी मांगी गई थी, लेकिन उन्होंने कोई ठोस जानकारी नहीं दी।
इस पर जस्टिस करोल ने टिप्पणी की, ‘हम इनमें से एक व्यक्ति को जानते हैं, लेकिन इसे कोर्ट में कहना ठीक नहीं होगा।’
सीनियर एडवोकेट विजय हंसारिया बोले- वोट चोरी का आरोप लगना बंद हो
वहीं, सीनियर एडवोकेट विजय हंसारिया ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘चुनाव आयोग की छवि को सार्वजनिक मीडिया में बदनाम किया जा रहा है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि मतदान चोरी हो रहा है। यह सब बंद होना चाहिए। इस अदालत का मॉनिटरिंग का काम है, और यह बिना किसी समानांतर प्रक्रिया के होना चाहिए।’
हंसारिया ने यह भी अनुरोध किया कि SIR प्रक्रिया को अन्य राज्यों में जल्द पूरा किया जाए।
इस पर जस्टिस करोल ने कहा, ‘जहां पर SIR शुरू हुआ है, वहां हम निगरानी कर रहे हैं। बाकी राज्यों के मामलों में यह चुनाव आयोग का अधिकार क्षेत्र है।’
प्रशांत भूषण ने 65 व्यक्तियों की एक लिस्ट पेश की
सुनवाई के दौरान वकील प्रशांत भूषण ने अदालत में 65 व्यक्तियों की एक लिस्ट पेश की। भूषण ने अदालत से अनुरोध किया कि मामले को कल (बुधवार) तक सुना जाए और वह आज ही हलफनामा दाखिल करेंगे।
हालांकि, जस्टिस संजय करोल ने इस हलफनामे को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा, ‘आपने जो हलफनामा दिया है, उसमें ज्यादा जानकारी नहीं है।’
भूषण ने बताया- ‘एक व्यक्ति का नाम प्रारंभिक सूची से हटाया गया था, लेकिन उसने समावेश के लिए आवेदन किया था, फिर भी उसे सूची में नहीं जोड़ा गया। इस पर चुनाव आयोग ने अदालत में दस्तावेज सीधे सौंपने पर आपत्ति जताई।’
जस्टिस करोल ने टिप्पणी करते हुए कहा, ‘यह मामला एक विस्तृत जांच की तरह नहीं दिखना चाहिए। यदि हमें प्राथमिक रूप से संतोषजनक जानकारी मिलती है, तो हम आदेश पारित कर सकते हैं।’
भूषण ने सवाल उठाया, ‘हम व्यक्तिगत रूप से कितने व्यक्तियों को लेकर अदालत में आ सकते हैं?’
पिछली सुनवाई में कोर्ट रूम क्या हुआ
- प्रशांत भूषण (ADR की ओर से): चुनाव आयोग अपनी ही प्रक्रिया का पालन नहीं कर रहा, सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन हो रहा है। मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की सभी जानकारी सार्वजनिक डोमेन में होनी चाहिए।
- वृंदा ग्रोवर (वोटर ग्रुप्स की ओर से): नागरिकों को “गैरकानूनी SIR” का खामियाजा क्यों भुगतना चाहिए? नियमों और EC के मैनुअल का उल्लंघन हो रहा है, केवल 30% आपत्तियों और दावों की एंट्री अपडेट की गई है।
- अश्विनी उपाध्याय (याचिकाकर्ता): आधार न तो नागरिकता का प्रमाण है और न ही पहचान का अंतिम दस्तावेज, इसे अन्य 11 दस्तावेजों के बराबर नहीं माना जा सकता।
- वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी (EC की ओर से): आयोग सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन कर रहा है और सभी आपत्तियों पर सुनवाई हो रही है। हर नाम-जोड़ने या हटाने का विवरण सार्वजनिक करने से लोगों की प्राइवेसी प्रभावित होगी।
- वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन (EC की ओर से): चुनाव आयोग ने आधार को 12वें पहचान दस्तावेज़ के रूप में शामिल किया है। इसके लिए 10 सितंबर को बैठक भी हुई।
- जस्टिस सूर्यकांत: मतदाता सूची 1 अक्टूबर को प्रकाशित हो जाएगी, लेकिन कोर्ट की निगरानी में यह प्रक्रिया चल रही है, इसलिए किसी भी गड़बड़ी को सुधारा जाएगा
SC ने आधार को 12वें दस्तावेज के तौर पर माना
8 सितंबर को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, “आधार पहचान का प्रमाण पत्र है, नागरिकता का नहीं। कोर्ट ने चुनाव आयोग को आदेश दिया था कि वोटर की पहचान के लिए आधार को 12वें दस्तावेज के तौर पर माना जाए। बिहार SIR के लिए फिलहाल 11 निर्धारित दस्तावेज हैं, जिन्हें मतदाताओं को अपने फॉर्म के साथ जमा करना होता है।”
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने ये भी कहा था, “आधार कार्ड को लेकर अगर किसी तरह की शंका हो तो आयोग इसकी जांच कराए। कोई भी नहीं चाहता कि चुनाव आयोग अवैध प्रवासियों को मतदाता सूची में शामिल करे। केवल वास्तविक नागरिकों को ही वोट देने की अनुमति होगी। जो लोग फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दावा कर रहे हैं, उन्हें मतदाता सूची से बाहर रखा जाएगा।”
आधार मानने वाले BLO को आयोग नोटिस भेज रहा
8 सितंबर को सुनवाई शुरू होने पर कोर्ट में कांग्रेस लीडर और सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने कहा था- 10 जुलाई को कोर्ट ने चुनाव आयोग को आधार कार्ड स्वीकार करने को कहा।
अभी भी 65 लाख लोगों के लिए भी आधार स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं। बीएलओ को निर्देश दिया गया था कि 11 दस्तावेजों में से एक आवश्यक है।
चुनाव आयोग 11 के बाहर के दस्तावेज स्वीकार करने वाले अधिकारियों को दंडित कर रहा है। आधार स्वीकार करने वाले अधिकारियों को चुनाव आयोग ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
इस पर कोर्ट ने नोटिस पेश करने को कहा। जिस पर चुनाव आयोग का पक्ष रख रहे वकील राकेश द्विवेदी ने कहा- ये हमारे पास नहीं है।
जिसके जवाब में कपिल सिब्बल ने कहा- ये आपके दस्तावेज हैं, इस पर निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी का साइन है। अब इस मामले में अगले सोमवार यानी 15 सितंबर को सुनवाई होगी।
