सबरीमाला गोल्ड विवाद, हाईकोर्ट बोला- भक्तों के साथ धोखा:बचा हुआ सोना शादी में इस्तेमाल होना था, बात मंदिर बोर्ड को पता थी; ये मिलीभगत
केरल हाईकोर्ट ने सबरीमाला मंदिर के दो द्वारपालक की मूर्तियों से गोल्ड चोरी के मामले में चिंता जताई है। हाईकोर्ट ने सोमवार को सुनवाई के दौरान कहा कि केस के मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी के त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) को भेजे ईमेल से पता चलता है कि TDB में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान गोल्ड प्लेटिंग चढ़वाने वाला पोट्टी के TDB अध्यक्ष को भेजे ईमेल का जिक्र किया। इसमें उन्होंने लिखा था कि श्रीकोविल के मुख्य द्वार और द्वारपालकों की मूर्तियों पर गोल्ड प्लेट चढ़ाने के बाद उनके पास कुछ सोना बचा है, जिसे वह एक जरूरतमंद लड़की की शादी में टीडीबी के सहयोग से इस्तेमाल करना चाहता है।
हाईकोर्ट ने SIT गठित की जस्टिस राजा विजयराघवन वी और जस्टिस केवी जयकुमार की बेंच ने इस मामले की जांच के लिए एक SIT गठित की है। यह छह हफ्ते में रिपोर्ट पेश करेगी। SIT सीधे अदालत को रिपोर्ट करेगी। साथ ही सुनिश्चित करेगी कि जांच अत्यंत गोपनीयता और ईमानदारी से की जाए।
अदालत ने कहा कि 2019 में पोट्टी को सोने की परत चढ़ाने के लिए सौंपी गई मूर्तियों पर केवल तांबे की प्लेटें नहीं थीं, बल्कि 1999 में उन पर सोने की परत चढ़ाई गई थी। अदालत ने कहा- इस खुलासे से चोरी का केस बन गया है।
अदालत ने कहा-
यह खुलासा परेशान करता है। इससे पता चलता है कि TDB के अधिकारी के भी पोट्टी के साथ मिले हुए हैं। इसके लिए सिर्फ पोट्टी और स्मार्ट क्रिएशंस नहीं, बल्कि TDB के कुछ अधिकारी भी जिम्मेदार हैं। रिकॉर्ड से साफ पता चलता है कि अधिकारियों को लेन-देन और सोने के अवैध ट्रांसफर की जानकारी थी।

TDB ने कमिश्नर बी मुरारी को निलंबित किया सबरीमाला मंदिर के TDB ने मंगलवार को हरिपाद में डिप्टी देवास्वोम कमिश्नर बी मुरारी बाबू को जांच के दौरान निलंबित कर दिया। बोर्ड के मुताबिक, बाबू ने 17 जुलाई 2019 को सबरीमाला के कार्यकारी अधिकारी को एक रिपोर्ट सौंपी थी। इसमें उन्होंने मंदिर के प्रवेश द्वार के दोनों तरफ लगी सोने की मूर्तियों को गलत तरीके से तांबे की बताया था। बोर्ड ने इसे गंभीर चूक माना।
उधर, बाबू ने आरोपों से इनकार किया। बाबू ने दावा किया कि 2019 में उन्होंने मंदिर के तांत्री की राय लेकर प्रारंभिक रिपोर्ट दी थी। रिपोर्ट में तांबे की प्लेट लिखा क्योंकि वास्तव में तांबा ही साफ दिख रहा था। इसलिए सोना चढ़ाने का निर्देश दिया गया था।
अब इस पूरे मामले को जानिए साल 2019 में उन्नीकृष्णन पोट्टी अपने खर्च पर मंदिर की मूर्तियों और कीमती वस्तुओं पर सोने की परत चढ़ाने के लिए TDB की मंजूरी प्राप्त की थी। टीडीबी ने 42.8 किग्रा वजन वाले इन सामानों को पोट्टी की कंपनी स्मार्ट क्रिएशंस, चेन्नई को सौंप दिया था।
पोट्टी ने 2020 में इन्हें टीडीबी को सौंप दिया। इसके बाद पोट्टी ने ही आरोप लगाया था कि मूर्तियों के पीडम मंदिर से गायब हैं। यह बात सामने आने के बाद केरल हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया। पीडम (या पीठम) दक्षिण भारत में उस बेस को कहते हैं जिसपर किसी देवता या देवी की मूर्ति रखी होती है। ये किसी भी धातु की हो सकती है या इसपर सोने की परत चढ़ाई जाती है।
हाईकोर्ट ने पहले भी TDB को फटकारा, अब तक 3 सुनवाई
29 सितंबर को मामले में जस्टिस राजा विजयराघवन वी और जस्टिस के वी जयकुमार की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान TDB को फटकार लगाई। कहा कि बोर्ड ने मंदिर की कीमती सामान का सही रजिस्टर नहीं रखा, जिससे गड़बड़ियां छिपाने में मदद मिली।
अदालत ने कहा कि भक्तों के चढ़ाए आभूषण और सिक्कों का रिकॉर्ड रजिस्टर में रखा जाता है, जिसमें डिस्क्रिप्शन, तारीख, प्राप्ति और क्वालिटी लिखी जाती है, लेकिन कोडीमारम, द्वारपालक मूर्तियां, पीडम जैसी अन्य चीजों का कोई रिकॉर्ड नहीं है।
अदालत ने नोट किया कि इन सामानों को किसी को देने की भी कोई एंट्री नहीं है। द्वारपालक मूर्तियों को दोबारा लगाते समय उनका वजन भी रिकॉर्ड नहीं किया गया, जो जानबूझकर हुआ जिससे 4 किलो सोने की कमी सामने न आए।
छत पर सोने की परत चढ़ाने के रजिस्टर भी गायब
कोर्ट ने कहा कि 1999 में श्रीकोविल की छत पर सोने की परत चढ़ाने के काम का रजिस्टर भी गायब है। कारीगरों के अनुसार तब 30 किलो से ज्यादा सोना इस्तेमाल हुआ था, लेकिन कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है।
अदालत ने निर्देश दिया कि एक्सपर्ट की मदद से मंदिर की सभी कीमती चीजों की पूरी इन्वेंटरी और मूल्यांकन किया जाए। देवस्वम बोर्ड के अधिकारियों की लापरवाही की भी जांच की जाए। मामले की अगली सुनवाई अब अक्तूबर के अंत में होगी।
