महात्मा गांधी की 156वीं जयंती, PM मोदी राज घाट पहुंचे:पुष्पांजलि अर्पित की; विजय घाट पर पूर्व PM शास्त्री को 121वीं जयंती पर श्रद्धांजलि दी
देशभर में गुरुवार को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 156वीं जयंती मनाई जा रही है। आज भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 121वीं जयंती भी है। PM मोदी ने दिल्ली के राज घाट पर गांधी और विजय घाट पर शास्त्री को श्रद्धांजलि अर्पित की।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी राज घाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद उन्होंने शास्त्री को विजय घाट पर पुष्पांजलि दी। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन भी पूर्व प्रधानमंत्री शास्त्री को विजय घाट पर श्रद्धांजलि देने पहुंचे।
महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 में गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। उन्हें सत्य और अहिंसा का आदर्श माना जाता है। उनकी जयंती को संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में भी मान्यता दी है।
वहीं, लाल बहादुर शास्त्री को उनके ‘जय जवान, जय किसान’ के नारे के लिए याद किया जाता है। उनका जन्म 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के दीनदयाल उपाध्याय नगर (तब मुगलसराय) मुगलसराय में हुआ था।
गांधी-शास्त्री की जयंती से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…
अपडेट्स
राष्ट्रपति मुर्मू ने राजघाट पर बापू को श्रद्धांजलि अर्पित की
गुजरात CM भूपेन्द्र पटेल गांधी जयंती पर पोरबंदर के कीर्ति मंदिर पहुंचे
गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी
PM ने कहा- शास्त्री ने देश के लोगों में देशभक्ति की भावना जगाई
PM ने लाल बहादुर शास्त्री को याद करते हुए X पर लिखा- लाल बहादुर शास्त्री एक असाधारण राजनेता थे जिनकी ईमानदारी, विनम्रता और दृढ़ संकल्प ने चुनौतीपूर्ण समय में भी भारत को सशक्त बनाया। ‘जय जवान जय किसान’ के उनके आह्वान ने देश के लोगों में देशभक्ति की भावना जगाई। वे हमें एक सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए निरंतर प्रेरित करते रहते हैं।
PM बोले- विकसित भारत के निर्माण के लिए गांधी के बताए मार्ग पर चलेंगे
PM मोदी ने गांधी जयंती पर X पर पोस्ट में लिखा- गांधी जयंती, प्रिय बापू के असाधारण जीवन को श्रद्धांजलि देने का दिन है, जिनके आदर्शों ने मानव इतिहास की दिशा बदल दी। उन्होंने दिखाया कि कैसे साहस और सादगी बड़े बदलाव के औजार बन सकते हैं। वे लोगों को सशक्त बनाने के लिए सेवा और करुणा की शक्ति को जरूरी साधन मानते थे। हम एक विकसित भारत के निर्माण के अपने अभियान में उनके बताए मार्ग पर चलते रहेंगे।
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन शास्त्री को श्रद्धांजलि देने विजय घाट पहुंचे
