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सरकार की पहल जॉब डैशबोर्ड, ये बताएगा कहां कितनी नौकरी:एक क्लिक बताएगा किस क्षेत्र में जॉब कैसा, कौन से कोर्स की डिमांड; जॉब-रेडी टैलेंट बनाएगा

केंद्र सरकार एक ऐसा स्मार्ट डैशबोर्ड बना रही है, जिस पर यह दिखेगा कि भविष्य में किस सेक्टर में कितनी नौकरी होगी और कैसी स्किल्स की जरूरत होगी। यह डैशबोर्ड ब्रिटेन के ‘जॉब एंड स्किल डैशबोर्ड’ और अमेरिका के वॉशिंगटन स्टेट के ‘लेबर मार्केट एंड क्रिडेंशियल डेटा डैशबोर्ड’ की तर्ज पर बनेगा।

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने हाल ही में टेलीकॉम और आईटी विभाग से इस पर शुरुआती परामर्श किया। इसमें विभागों ने बताया- आगे 5जी, 6जी, क्वांटम कम्युनिकेशन, सैटेलाइट, एआई, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, मशीन लर्निंग और सेमीकंडक्टर जैसे सेक्टर में किस लेवल के कितने प्रोफेशनल चाहिए होंगे।

नए डैशबोर्ड से छात्रों व अभिभावकों को सही कोर्स चुनने में मदद मिलेगी। पढ़ाई पूरी करने के बाद आगे के अवसरों की जानकारी मिलेगी।

संस्थानों को पता चलेगा कि सिलेबस में क्या बदलाव जरूरी है, कौन से नए कोर्स शुरू करने हैं और कौन से कोर्स बंद करने हैं। डैशबोर्ड जॉब-रेडी टैलेंट तैयार करने में गेमचेंजर साबित होगा।

अभी देश में कई पोर्टल-डैशबोर्ड

  • लेबर ब्यूरो डैशबोर्ड: मजदूरी और रोजगार से जुड़े आंकड़े, लेकिन ज्यादातर पिछला डेटा।
  • पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे: राज्यों व जिलों में रोजगार-बेरोजगारी का डेटा देता है। सालाना और तिमाही अपडेट पर आधारित डेटा।
  • भारत स्किल्स पोर्टल, स्किल इंडिया डिजिटल हब: आईटीआई, स्किल ट्रेनिंग की जानकारी देता है।
  • असीम पोर्टल: स्किल्ड वर्कर्स व नियोक्ताओं को जोड़ने वाला जॉब-मैचिंग प्लेटफॉर्म। इस पर डिमांड, भविष्य की जरूरत का अनुमान लगाने की शुरुआती कोशिश है।

अमेरिका और ब्रिटेन में ऐसा है डैशबोर्ड

अमेरिका: वॉशिंगटन में डैशबोर्ड एम्प्लॉयमेंट सिक्योरिटी डिपार्टमेंट और वॉशिंगटन एसटीईएम नामक संस्था चलाते हैं। श्रम सांख्यिकी ब्यूरो और शिक्षा विभाग से आंकड़े लेते हैं। मई 2025 में यहां नौकरी खुलने की दर (जॉब ओपनिंग रेट) 3.7% दर्ज की गई।

ब्रिटेन: पोर्टल शिक्षा मंत्रालय चलाता है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के आंकड़े बताते हैं किस सेक्टर में कितनी नौकरी और औसत वेतन क्या है? जून से अगस्त 2025 के बीच यहां 7.28 लाख रिक्तियां दर्ज हुईं।

केंद्र सरकार मंथन कर रही, चुनौती: एक जगह लाना अलग-अलग मंत्रालयों और निजी क्षेत्र के डेटा को एक प्लेटफॉर्म पर लाना चुनौती है। एआई और तकनीक की मदद लेंगे। एआईसीटीई, यूजीसी और एनसीवीईटी जैसी संस्थाओं की अहम भूमिका होगी।

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