नेपाल में प्रदर्शन का चेहरा बने सुडान गुरुंग:इवेंट मैनेजमेंट करियर छोड़कर समाज सेवक बने; जानें पूरी प्रोफाइल
सोमवार 8 सितंबर को नेपाल की राजधानी काठमांडू में हजारों युवा सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए। 4 सितंबर को हुए 26 प्लेटफॉर्म्स पर बैन के खिलाफ युवाओं ने लड़ाई छेड़ी, जिसमें अब तक 22 की जान चली गई। इस हिंसा में 300 से ज्यादा घायल हो गए।
युवाओं के इस प्रदर्शन को किसी पार्टी या नेता ने लीड नहीं किया था। हालांकि एक नाम छात्रों के आंदोलन का चेहरा बनकर सामने आया है। वो नाम है सुडान गुरुंग।
सोशल मीडिया पर कहा- स्कूल ड्रेस में करें प्रोटेस्ट
अपने एक इंस्टाग्राम पोस्ट में गुरुंग ने माना था कि उनके समूह ने औपचारिक रूप से रैली आयोजित करने के लिए आवेदन दिया था। उन्होंने छात्रों से अपील की थी कि वे स्कूल यूनिफॉर्म पहनें और किताबें साथ लाएं, ताकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण प्रतिरोध का प्रतीक बन सके।
गुरुंग ने रैलियां आयोजित करने के लिए औपचारिक परमिट के आवेदन किए। ब्लैकआउट से पहले, हामी नेपाल ने सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके प्रदर्शन मार्गों और सुरक्षा निर्देश भी शेयर किए थे।
नेपाल में ट्रेंड हुआ था ‘नेपो किड’ कैंपेन
इस पूरे विवाद की शुरुआत एक ट्रेंड से हुई थी, जिसे ‘नेपो किड’ नाम दिया गया। नेपाल में सोशल मीडिया पर आम नागरिकों के बच्चों और मिनिस्टर्स के बच्चों के वीडियो शेयर किए जाने लगे। इन वीडियोज में दोनों की लाइफस्टाइल दिखाए गए। ऐसी ही एक पोस्ट में पीएम ओली की बेटी के हाथ में करोड़ों की घड़ी भी देखी गई।
सोशल मीडिया बैन होने पर भड़के युवा
प्रदर्शनकारी युवाओं का कहना है कि सोशल मीडिया पर बढ़ रहे ‘नेपो किड’ कैंपेन को दबाने के लिए सरकार ने सोशल मीडिया पर बैन लगाया। गुरुंग ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट्स से युवाओं का ध्यान सरकारी भ्रष्टाचार की तरफ भी खींचा।
हैशटैग #स्टॉप_करप्शन, #GenZनेपाल और #वेकअप_नेपाल का इस्तेमाल करके फेसबुक और बाकी कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से आंदोलन की नींव रखी गई। इसे ज्यादा से ज्यादा यूथ तक पहुंचाने में काठमांडू के मेयर और नेपाली रैपर बालेन शाह की फेसबुक पोस्ट ने बड़ी भूमिका निभाई।
