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रावण का दीवाना हरियाणवी:जुनून में 12 एकड़ जमीन बेची, 7 रिकॉर्ड रचे; इस दशहरे पर राजस्थान में देश का सबसे ऊंचा पुतला बना रहे

रावण का दीवाना हरियाणवी:जुनून में 12 एकड़ जमीन बेची, 7 रिकॉर्ड रचे; इस दशहरे पर राजस्थान में देश का सबसे ऊंचा पुतला बना रहे

अंबाला2 घंटे पहलेलेखक: राम सारस्वत
रावण के विशाल पुतले को तैयार करते हुए कारीगर तजेंद्र व अन्य।

हरियाणवी अपने अजब-गजब कारनामों के लिए मशहूर होते हैं। ऐसे ही हैं अंबाला के तेजेंद्र चौहान। उन्हें रावण के ऊंचे से ऊंचे पुतले बनाने की गजब धुन सवार है। पिछले 39 साल में 7 रिकॉर्ड बना चुके हैं। जिनमें से 5 लिम्का बुक तो 2 वर्ल्ड रिकॉर्ड इंडिया में दर्ज हैं।

ऊंचे कद का रावण बनाने के फेर में अपनी साढ़े 12 एकड़ जमीन बेच चुके हैं। पिछले 10 साल में ही 4 से 5 करोड़ खर्च हो चुके हैं। हालांकि इस बार दशहरे से पहले वो देश का सबसे ऊंचा 215 फीट का रावण राजस्थान के कोटा में बना रहे हैं।

इससे पहले चौहान अंबाला, पंचकूला, चंडीगढ़, देहरादून और दिल्ली में ऊंचे रावण बनाने का रिकॉर्ड बना चुके हैं। हां, 39 साल बाद रावण के चेहरे में पहली बार बदलाव कर रहे हैं। रावण की राजस्थानी स्टाइल की घुमावदार मूछें होंगी।

यही नहीं वो पहली बार रावण के 10 सिर लगाने जा रहे हैं। अभी तक ऊंचे पुतले पर एक ही सिर होता था। कोटा में जहां चौहान पुतला तैयार रहे हैं, वहां 131 साल से राष्ट्रीय दशहरा मेला होता है। मेला प्रबंधन के आग्रह पर ही चौहान ने रावण के 10 सिर लगाने मंजूर किए हैं। प्रबंधन का कहना था कि यह उनकी परंपरा है।

रावण के पुतले के साथ खड़े तेजेंद्र।

राजस्थान में बन रहे पुतले की खासियत… 215 फीट कद, राजपूती स्टाइल की मूंछें

  • पहली बार 10 सिर, राजस्थानी शैली का चेहरा-मोहरा: अभी तक तेजेंद्र चौहान एक सिर वाला रावण ही बनाते थे, इस बार दशानन यानी 10 सिर लगा रहे हैं। बड़ा चेहरा 25 फीट ऊंचा होगा। बाकी 9 चेहरे 3 गुणा 6 फीट के होंगे। पहले 8 से 10 फीट लंबी मूंछें बाहर की तरफ जाती थी, इस बार मूंछें घनी, लंबी और ऊपर की ओर मुड़ी हुई यानी हैंडलबार स्टाइल की होंगी। ये मूंछें राजपूती शैली की हैं, जो बल-साहस और शौर्य को दर्शाती हैं।
  • जून में काम शुरू हुआ, करीब 5 माह में तैयार होगा: चौहान बताते हैं कि कोटा दशहरा कमेटी ने मई में उनसे संपर्क किया था। जून में काम शुरू हुआ। 25 कलाकार तभी से लगे हैं। 2 महीने तो पार्ट्स तैयार करने में लगे। अब चेहरे पर काम चल रहा है। फाइबर ग्लास से तैयार हो रहे चेहरे को भी थोड़ा राजस्थानी लुक देने का प्रयास है।
  • पहली बार पक्के फाउंडेशन पर खड़ा होगा रावण: इतने ऊंचे पुतले को खड़ा करने के लिए 6 फीट गहरा और 25 फीट चौड़ा पक्का फाउंडेशन तैयार किया गया है। यहां जमीन में चट्टानें होने के कारण विस्फोट से जगह तैयार की गई। पिछले साल कोटा में 70 फीट ऊंचा रावण था। इस बार करीब इतने ऊंचे तो मेघनाद व कुंभकरण के पुतले होंगे।
  • 44 लाख खर्च, 20 जगह रिमोट सेंसर, दहन में 15 मिनट लगेंगे: पुतले बनाने का टेंडर ही करीब 44 लाख रुपए का टेंडर है। इसके अलावा रावण के पुतले के अलग-अलग हिस्सों में 20 रिमोट सेंसर लगेंगे। रिमोट कंट्रोल का बटन दबाते ही पुतले में लगे पटाखे-आतिशबाजी फूटेंगे। पटाखे व आतिशबाजी फिट करने का ठेका अलग एजेंसी के पास है। आमतौर पर पुतला कुछ सेकेंड में धू-धू कर जल जाता है, लेकिन यह पुतला पूरी तरह जलने में 10 से 15 मिनट लग जाएंगे।
दिल्ली के द्वारका में रावण का यह विशाल पुतला बनाया था। इसी कारण पीएम मोदी का यहां का कार्यक्रम रद्द करना पड़ा था।

जानिए तेजेंद्र चौहान की कहानी…खुद को रावण का आशिक बताते हैं, सारी पैतृक जमीन कुर्बान की

शौक में पहली बार 1986 में पुतला बनाया, फिर जुनून बना मूलरूप से बराड़ा क्षेत्र के रहने वाला तेजेंद्र चौहान की गिनती अच्छे-खासे जमीन मालिकों में होती थी। शौक-शौक में पहली बार 1986 में बराड़ा में रावण का 20 फीट ऊंचा पुतला बनाया। लोगों ने सराहना की। इस पर इठला रहे चौहान के सिर पर धुन सवार हो गई। अगले साल पुतले की ऊंचाई बढ़ाई। बोले-दुनिया में बुराइयां बढ़ रही हैं, तो बुराई का प्रतीक पुतला भी बढ़ना चाहिए।

पुतला बनाने का खर्च खुद वहन किया, सारी पूंजी खत्मजमीन बिक गई तेजेंद्र चौहान हर साल पुतले की ऊंचाई बढ़ाते रहे और बनाने का खर्च बढ़ता गया। धीरे-धीरे करके अगले 20 साल में उनकी खुद की जमा पूंजी तो खत्म हुई ही, पैतृक साढ़े 12 एकड़ जमीन भी बिक गई। लेकिन पुतले की ऊंचाई के साथ-साथ जुनून बढ़ता ही गया। एक दिन ऐसा भी आया जब उनके पुतले को देखने के लिए 50 हजार से ज्यादा लोग पहुंचने लगे। हर हाथ सराहना में ताली बजाता गया, लेकिन चौहान के हाथ खाली हो गए।

लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में 5 बार दर्ज, 2 वर्ल्ड रिकॉर्ड भी साल 2011, 2013, 2014, 2015 और 2016 में 5 बार उनके नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ। बराड़ा के जिस मैदान में पुतला जलाते थे, वहां जगह कम पड़ने लगी। लोग पुतले के साथ सेल्फी लेते तो चौहान का सीना गर्व से तन जाता। साल 2009 में बराड़ा में 175 फीट तो 2012 में 195 फीट ऊंचा रावण बना। साल 2014 में पहली बार रावण का कद 200 फीट पर पहुंचा। 2016 में यह 210 फीट हो गया।

चंडीगढ़ में 221 फीट का रावण का पुतला बनाया गया था।

जलते पुतले की अस्थियां लेने की होड़ में हुआ हादसा बात बराड़ा की ही है। पुतला जलते ही लोगों में अस्थियां यानी पुतले की लकड़ियां सहेजने की होड़ मच गई। उस हादसे को याद करते हुए चौहान बताते हैं कि पुतले को थामने वाला एक रस्सा गलती से सुरक्षा के लिए बनाए बैरिकेड के बाहर लग गया था। पुतला अभी जल ही रहा था, इसके बीच लोगों ने वो रस्सा हिलाना शुरू कर दिया, जिससे अचानक पुतला गिर गया…। उसी दिन समझ गए कि अब मैदान छोटा पड़ रहा है और आगे खतरा बड़ा है।

फिर पंचकूला की तरफ रुख किया, 2019 में सबसे ऊंचा पुतला हादसे और तंगहाली से सबक लेकर चौहान ने 2018 में पंचकूला की तरफ रुख गया। जहां कुछ संगठनों ने उन्हें पुतला बनाने के लिए आमंत्रित किया। 2018 में उन्होंने पंचकूला में 210 फीट ऊंचा रावण बनाया। फिर अगले साल चंडीगढ़ के धनास में 221 फीट ऊंचा रावण बनाया, जो दुनिया में मानव निर्मित सबसे ऊंचा पुतला बना। यह पुतला 40 कारीगरों ने 6 महीने में तैयार किया। उसमें 70 क्विंटल लोहे का स्ट्रक्चर और 3000 मीटर कपड़ा लगा। पंचकूला-चंडीगढ़ में पुतला देखने 4 से 5 लाख लोग पहुंचे।

पुतले की ऊंचाई देख पीएम मोदी का कार्यक्रम टालना पड़ा साल 2014 में तेजेंद्र चौहान ने दिल्ली में द्वारका सेक्टर-10 के ग्राउंड में 211 फीट ऊंचा रावण बनाया। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पहुंचना था। चौहान बताते हैं कि कार्यक्रम से तीन दिन पहले पीएम सुरक्षा में लगी स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) की टीम पहुंची। उन्होंने देखा की बैरिकेड की दूरी कम थी। स्टेज और पुतले के बीच दूरी सिर्फ 175 फीट थी। सुरक्षा कारणों की वजह से पीएम का कार्यक्रम रद्द कर दिया गया।

पूर्व राष्ट्रपति कोविंद पहुंचे, रिमोट का बटन दबाने से मना किया पीएम का कार्यक्रम रद्द होने के बाद दशहरा कमेटी ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को बुलाया। कोविंद परिवार समेत पहुंचे और पुतला देखकर परिवार खुश हुआ। पुतला दहन के लिए रिमोट का बटन दबाने की बारी आई तो कोविंद भी मना कर गए। चौहान बताते हैं कि उन्होंने दशहरा कमेटी के प्रधान को रिमोट दिया तो उन्होंने भी मना कर दिया। आखिर चौहान ने ही रिमोट के बटन दबाया। यह पहला मौका था जब खुद का बनाया पुतला खुद ही दहन किया।

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