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वोटर ID में अब मकान नंबर 0 नहीं होगा:घर नहीं होने पर काल्पनिक नंबर नहीं दिए जाएंगे; राहुल ने EC पर आरोप लगाए थे

कर्नाटक में सैकड़ों मतदाता पहचान पत्रों में मकानों का एक ही पता ‘जीरो’ दर्ज होने से मचे बवाल के बीच चुनाव आयोग कुछ परिस्थितियों में नोशनल नंबर देना खत्म करने जा रहा है। इसके लिए मतदाता के पते के बारे में नए फॉर्मेट पर विचार किया जा रहा है, ताकि काल्पनिक नंबर देने की मजबूरी खत्म हो जाए।

इसके तहत वोटर आईडी में मकान नंबर डालने की अनिवार्यता समाप्त करना भी शामिल है। मकान नंबर की जगह आधार नंबर डालने को भी विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। गौरतलब है कि कांग्रेस ने बड़ी संख्या में मकानों को नंबर 00 या 77777 या 9999 देने को राजनीतिक मुद्दा बनाया हुआ है।

लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने कर्नाटक की वोटर लिस्ट में ऐसे कई पते दिखाए थे, जिनके आगे यही नंबर लिखे हुए थे। इसके बाद ऐसे वोटर्स को लेकर नई बहस छिड़ गई थी। चुनाव आयोग पर भी सवाल उठ रहे थे।

कर्नाटक के कुछ वोटर कार्ड्स पर मकान नंबर की जगह दर्ज थे जीरो।

CEC बोले थे- जिनके पास घर नहीं होता, उनका हाउस नंबर 0 होता है

चीफ इलेक्शन कमिश्नर (CEC) ज्ञानेश कुमार ने 17 अगस्त को प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह बताया था कि बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता होते हैं जो फुटपाथ पर, पुलों के नीचे या किसी लैंपपोस्ट के नीचे रात बिताते हैं। ऐसे मतदाताओं के घर के पते में मकान नंबर जीरो दर्ज किया जाता है। आधार जारी करने वाली संस्था यूआईडीएआई का अनुमान है कि 12 लाख लोगों के आधार में स्थाई पता दर्ज नहीं है। आधार अथॉरिटी ने ऐसे लोगों के लिए हेड ऑफ द फैमिली को केयर ऑफ दिखाकर पता दर्ज किया हुआ है।

राहुल गांधी ने 7 अगस्त को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके चुनाव आयोग पर वोटर लिस्ट में गड़बड़ी करने का आरोप लगाया था।

देश में 17.73 लाख लोगों के पास आवास नंबर नहीं

पिछली जनगणना में यह भी सामने आया कि देश में करीब 17 लाख 73 हजार लोग बेघर हैं। उनके पास कोई जनगणना आवास नंबर नहीं था। ऐसे करीब 9 लाख 38 हजार लोग शहरी इलाके में और 8 लाख 34 लाख लोग ग्रामीण इलाके में दर्ज किए गए। नागरिक संगठनों ने इस संख्या पर एतराज भी जताए थे और कहा था कि बेघर लोगों की संख्या इससे कहीं अधिक है। अब 2027 की जनगणना में सही तस्वीर सामने आएगी। इस जनगणना के जरिए भी मकान संख्या ठीक से दर्ज करने और उन्हें घरों सामने पते तौर पर लिखने की पुख्ता व्यवस्था होने की उम्मीद की जा रही है।

बिहार में 2.90 लाख मकानों पर 0 या 00 नंबर दर्ज

  • आयोग का कहना है कि रिकॉर्ड में हर राज्य में ऐसे लाखों मतदाता मिले हैं, जिनके मकान नंबर पर जीरो दर्ज हैं। इसका कारण है कि कई गांवों में मकानों को नंबर देने की व्यवस्था ही नहीं है।
  • अकेले बिहार में ऐसे करीब 2 लाख 90 हजार से अधिक मतदाता पाए गए हैं जिनके मकान नंबर के सामने 0 या 00 या 000 लिखा है।
  • इसमें अगर मकान संख्या के आगे का कॉलम खाली रखा जाए तो कंप्यूटर उस एंट्री को स्वीकार नहीं करता। जबकि कोई भी काल्पनिक नंबर डालने पर एंट्री दर्ज हो जाती है।
  • सैंकडों गांवों के मतदाताओं के मकान नंबर 00 क्यों हैं, भास्कर ने इसकी पड़ताल की तो पता चला कि 2011 की जनगणना के दौरान गांवों में अस्थायी आवासों को भी नंबर आवंटित किए गए थे।
  • इन नंबरों को अमूमन गांव वालों ने अपने आवास पर नहीं लिखा। बूथ लेवल कर्मचारियों को भी जनगणना के दौरान दिए गए नंबर इसी वजह से नहीं मिल पाए।

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