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विपक्ष के उपराष्ट्रपति कैंडिडेट बोले- चुनाव की गरिमा बनी रहे:किसी पर पर्सनल अटैक न हों; कल शाह ने रेड्डी को नक्सलवाद समर्थक बताया था

विपक्ष के उपराष्ट्रपति कैंडिडेट बोले- चुनाव की गरिमा बनी रहे:किसी पर पर्सनल अटैक न हों; कल शाह ने रेड्डी को नक्सलवाद समर्थक बताया था

नई दिल्ली3 घंटे पहले
विपक्ष के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी ने आज न्यूज एजेंसी ANI को इंटरव्यू दिया।

उपराष्ट्रपति चुनाव से पहले I.N.D.I.A ब्लॉक के उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी ने शनिवार को कहा कि वे चाहते हैं कि इस चुनाव की गरिमा बनी रहे और ये अब तक के सभ्य चुनावों में से एक हो। कोई किसी पर पर्सनल अटैक न करे।

विपक्ष उम्मीदवार ने कहा- ‘राधाकृष्णन और मेरे बीच कोई निजी लड़ाई नहीं है। हम कभी एक-दूसरे से मिले भी नहीं हैं। इसलिए मैं चाहता हूं कि मुकाबला व्यक्तियों के बीच नहीं बल्कि दो अलग-अलग विचारधाराओं के बीच हो।’

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यह चुनाव दो विचारधाराओं के बीच है। एनडीए उम्मीदवार राधाकृष्णन आरएसएस के सदस्य रहे हैं। मैं उनसे नहीं बल्कि उस विचारधारा से असहमत हूं, जिससे वे जुड़े हैं।

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दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा था कि सुदर्शन रेड्डी वही हैं, जिन्होंने वामपंथी उग्रवाद और नक्सलवाद को समर्थन देने वाला जजमेंट दिया था। अगर सलवा जुडूम के खिलाफ जजमेंट न होता तो वामपंथी उग्रवाद 2020 तक खत्म हो गया होता।

रेड्डी ने शाह के बयान पर कहा- ‘मैं उनसे बहस नहीं करना चाहता। सलवा जुडूम वाला फैसला मैंने लिखा है, ये मेरा नहीं है। ये फैसला सुप्रीम कोर्ट का है। शाह 40 पेज का फैसला पढ़ें। अगर उन्होंने फैसला पढ़ा होता तो शायद वे ये टिप्पणी नहीं करते।’

रेड्डी बोले- कभी उपराष्ट्रपति चुनाव लड़ने की उम्मीद नहीं थी

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज रेड्डी ने कहा कि उन्होंने कभी उपराष्ट्रपति चुनाव लड़ने की उम्मीद नहीं की थी। कांग्रेस ने उन्हें चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया था।

उन्होंने कहा- ‘कांग्रेस के कुछ बड़े नेताओं ने इसकी पहल की। इस पर मैंने कहा कि मेरे लिए किसी विशेष राजनीतिक दल का उम्मीदवार बनना मुश्किल हो सकता है, लेकिन अगर I.N.D.I.A ब्लॉक के दल सहमत होते हैं और मुझे उम्मीदवार बनाते हैं, तो मैं चुनाव लड़ूंगा।’

9 सितंबर को होगा चुनाव

उपराष्ट्रपति चुनाव 9 सितंबर को होंगे। इसके लिए विपक्ष ने बी सुदर्शन रेड्डी को अपना उम्मीदवार बनाया है। वे NDA उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे।

रेड्डी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की उपस्थिति में 21 अगस्त को अपना नामांकन दाखिल किया था।

इस दौरान राकांपा (एससीपी) प्रमुख शरद पवार, समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव, द्रमुक सांसद तिरुचि शिवा, शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत और गठबंधन के कई अन्य नेता भी मौजूद थे।

NDA के उम्मीदवार का जीतना तय

लोकसभा में कुल सांसदों की संख्या 542 है। एक सीट खाली है। एनडीए के 293 सांसद हैं। राज्यसभा में 245 सांसद हैं। 5 सीट खाली हैं। एनडीए के पास 129 सांसद हैं।

यह मानते हुए कि उपराष्ट्रपति के लिए नामांकित सदस्य भी एनडीए उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करेंगे।

इस तरह, सत्तारूढ़ गठबंधन को कुल 422 सदस्यों का समर्थन प्राप्त है। बहुमत के लिए 391 सांसदों के समर्थन की जरूरत है। अगस्त 2022 में एनडीए उम्मीदवार जगदीप धनखड़ को 528 वोट मिले थे। वहीं विपक्षी उम्मीदवार मार्गेट अल्वा को सिर्फ 182 वोट मिले थे। तब 56 सांसदों ने वोट नहीं डाला था।

6 स्टेप में चुना जाता है उपराष्ट्रपति, ऐसे समझें

  • उपराष्ट्रपति के चुनाव के लिए सबसे पहले निर्वाचक मंडल लिस्ट बनती है। इसमें लोकसभा और राज्यसभा के सभी निर्वाचित और नामित सदस्य (सांसद) शामिल होते हैं। राज्यसभा में 233 निर्वाचित सांसद और 12 नामांकित सांसद हैं। लोकसभा में 543 सांसद हैं। यानी कुल सांसदों की संख्या 788 है। मौजूदा समय में राज्यसभा में 5 और लोकसभा में एक सीट खाली है। इसलिए निर्वाचक मंडल में यह संख्या 782 होगी। इस तरह उपराष्ट्रपति चुनाव जीत में 391 सांसदों (50%) के समर्थन की जरूरत होगी।
  • चुनाव आयोग ने 1 अगस्त को उपराष्ट्रपति के चुनाव की तारीखों का ऐलान किया। अधिसूचना 7 अगस्त को जारी की जाएगी। अधिसूचना जारी होते ही नामांकन शुरू हो जाता है। इसकी आखिरी तारीख 21 अगस्त है। 25 अगस्त को कैंडिडेट नामांकन वापस ले सकता है।
  • उम्मीदवार को कम से कम 20 सांसदों की तरफ से प्रस्तावित होना जरूरी है। इसके अलावा 20 सांसदों का समर्थन भी चाहिए।
  • चुनाव में केवल सांसद मतदाता होते हैं। इसलिए यह प्रचार सीमित दायरे में होता है। उम्मीदवार और उनके समर्थक दल प्रचार में शामिल होते हैं।
  • हर सांसद मतपत्र पर प्रत्याशियों को प्राथमिकता के क्रम में (1, 2, 3…) टिक करता है। वोटिंग तभी होती है, जब एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में होते हैं। अन्यथा एक उम्मीदवार होने पर प्रत्याशी निर्विरोध चुनाव जीत जाता है।
  • मतदान के बाद ही रिजल्ट आ जाता है। उसकी वजह यह है कि दोनों सदनों के 782 सदस्य मतदान करते हैं। इनकी गणना कुछ घंटों में हो जाती है। जीत के लिए कुल वैध मतों का बहुमत यानी 50% से अधिक प्राप्त करना होता है। इसके बाद नतीजे घोषित किए जाते हैं। इस बार 9 सितंबर को सुबह 10 से 5 बजे के बीच वोटिंग होगी।

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