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राउत बोले- उद्धव और राज साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे:BMC, नासिक समेत 4 शहरों के नगर निगम चुनाव में मिलकर प्रत्याशी उतारेंगे

राउत बोले- उद्धव और राज साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे:BMC, नासिक समेत 4 शहरों के नगर निगम चुनाव में मिलकर प्रत्याशी उतारेंगे

मुंबई4 घंटे पहले
फोटो 27 जुलाई की है, जब उद्धव ठाकरे के जन्मदिन पर राज उन्हें बधाई देने मातोश्री पहुंचे थे।

महाराष्ट्र में मराठी भाषा के मुद्दे पर पिछले महीने एक मंच पर आए उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे गठबंधन करने जा रहे हैं। कुछ महीनों बाद होने वाले स्थानीय और नगर निकाय चुनाव में दोनों पार्टियां एक साथ चुनाव लड़ेंगी।

नासिक में शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने कहा कि मुंबई महानगरपालिका (BMC) का चुनाव तो हम साथ लड़ेंगे ही, इसके अलावा ठाणे , कल्याण-डोंबिवली, नासिक समेत कई अन्य शहरों की महापालिका चुनाव में भी गठबंधन की ताकत दिखेगी।

राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा, ‘मुंबई महानगरपालिका चुनाव दोनों भाई उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे मिलकर जीतेंगे। उद्धव और राज की ताकत मराठी लोगों की एकता की ताकत है। अब कोई भी अघोरी शक्ति मराठी मानुष की इस वज्रमूठ को तोड़ नहीं सकेगी।’

20 साल बाद ठाकरे परिवार एक साथ आया था

महाराष्ट्र में हिंदी को लेकर जारी विवाद के बीच उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने ‘मराठी एकता’ पर 5 जुलाई को मुंबई के वर्ली डोम में रैली की थी। इस मौके पर दोनों की तरफ से आगे साथ मिलकर राजनीति करने के संकेत दिए गए।

राज ठाकरे ने कहा था, ‘मैंने अपने इंटरव्यू में कहा था कि झगड़े से बड़ा महाराष्ट्र है। 20 साल बाद हम एक मंच पर आए हैं आपको दिख रहे हैं। हमारे लिए सिर्फ महाराष्ट्र और मराठी एजेंडा है, कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है।’

वहीं, उद्धव ने कहा था-​​​​​​, ‘हमारे बीच की दूरियां जो मराठी ने दूर कीं सभी को अच्छी लग रही हैं। मेरी नजर में, हमारा एक साथ आना और यह मंच साझा करना, हमारे भाषण से कहीं ज्यादा अहम है।

अब जानिए राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के बीच फूट कैसे पड़ी थी

1989 से राजनीति में सक्रिय हैं राज ठाकरे

1989 में राज ठाकरे 21 साल की उम्र में शिवसेना की स्टूडेंट विंग, भारतीय विद्यार्थी परिषद के अध्यक्ष थे। राज इतने सक्रिय थे कि 1989 से लेकर 1995 तक 6 साल के भीतर उन्होंने महाराष्ट्र के कोने-कोने के अनगिनत दौरे कर डाले। 1993 तक उन्होंने लाखों की तादाद में युवा अपने और शिवसेना के साथ जोड़ लिए। इसका नतीजा ये हुआ कि पूरे राज्य में शिवसेना का तगड़ा जमीनी नेटवर्क खड़ा हो गया।

2005 में शिवसेना पर उद्धव हावी होने लगे

2002 तक राज ठाकरे और उद्धव शिवसेना को संभाल रहे थे। 2003 में महाबलेश्वर में पार्टी का अधिवेशन हुआ। बालासाहेब ठाकरे ने राज से कहा- ‘उद्धव को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाओ। राज ने पूछा, ‘मेरा और मेरे लोगों का क्या होगा।’ 2005 तक उद्धव पार्टी पर हावी होने लगे थे। पार्टी के हर फैसले में उनका असर दिखने लगा था। ये बात राज ठाकरे को अच्छी नहीं लगी।

राज ठाकरे ने पार्टी छोड़ी, MNS का ऐलान किया

27 नवंबर 2005 को राज ठाकरे के घर के बाहर हजारों समर्थकों की भीड़ इकट्ठा हुई। यहां राज ने समर्थकों से कहा, ‘मेरा झगड़ा मेरे विट्ठल (भगवान विठोबा) के साथ नहीं है, बल्कि उसके आसपास के पुजारियों के साथ है।

कुछ लोग हैं, जो राजनीति की ABC को नहीं समझते हैं। इसलिए मैं शिवसेना के नेता के पद से इस्तीफा दे रहा हूं। बालासाहेब ठाकरे मेरे भगवान थे, हैं और रहेंगे।’

9 मार्च 2006 को शिवाजी पार्क में राज ठाकरे ने अपनी पार्टी ‘महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना’ यानी मनसे का ऐलान कर दिया। राज ने मनसे को ‘मराठी मानुस की पार्टी’ बताया और कहा- यही पार्टी महाराष्ट्र पर राज करेगी।

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