सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को चिंता जताई कि कई कैदी अपनी सजा पूरी करने के बाद भी जेल में बंद हैं। कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि ऐसे सभी कैदियों को तुरंत रिहा किया जाए, जो अपनी सजा पूरी कर चुके हैं और किसी अन्य मामले में दोषी नहीं हैं।
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने 2002 के नीतीश कटारा हत्याकांड के दोषी सुखदेव यादव उर्फ पहलवान की रिहाई का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि यादव ने मार्च 2024 में 20 साल की सजा पूरी कर ली थी, इसलिए उन्हें उसी समय रिहा कर देना चाहिए था।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस आदेश की कॉपी सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के गृह सचिवों को भेजी जाए, ताकि पता लगाया जा सके कि कहीं कोई कैदी अपनी सजा की अवधि से ज्यादा समय से जेल में तो नहीं है।
कोर्ट ने 29 जुलाई को रिहाई का आदेश दिया था
कोर्ट ने 29 जुलाई को सुखदेव पहलवान की रिहाई का आदेश दिया था। लेकिन सजा समीक्षा बोर्ड ने उसके आचरण का हवाला देते हुए उसकी रिहाई पर रोक लगा दी थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने हैरानी जतायी और कहा कि एक अदालत द्वारा पारित आदेश को एसआरबी कैसे नजरअंदाज कर सकता है?
कोर्ट ने कहा कि यादव को 20 साल की सजा पूरी होने के बाद रिहा किया जाना चाहिए था। तब दिल्ली सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे ने दलील दी थी कि 20 साल की सजा के बाद स्वतः रिहाई नहीं हो सकती और आजीवन कारावास का अर्थ है, शेष प्राकृतिक जीवन तक जेल में रहना।
यादव के वकील ने कहा- यादव ने 9 मार्च को सजा पूरी कर ली थी
हालांकि, यादव की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ मृदुल ने दलील दी थी कि उनके मुवक्किल यादव ने 9 मार्च, 2025 को सजा पूरी कर ली है। उन्होंने यादव को 9 मार्च से आगे हिरासत में रखने के किसी भी वैध कारण से इनकार किया और कहा कि दिल्ली सरकार सजा की गलत व्याख्या कर रही है।
कोर्ट ने पहले यादव को यह देखते हुए तीन महीने की फरलो (छुट्टी) दी थी कि उसने बिना किसी छूट के 20 साल की कैद काट ली है। यादव की याचिका में दिल्ली हाईकोर्ट के नवंबर 2024 के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसने उसे तीन सप्ताह के लिए फरलो पर रिहा करने की उसकी याचिका खारिज कर दी थी।
क्या है पूरा मामला… तीन अक्टूबर, 2016 को, सुप्रीम कोर्ट ने कटारा के अपहरण और हत्या में भूमिका के लिए विकास यादव और उसके रिश्ते के भाई विशाल यादव को बिना किसी छूट के 25 साल की जेल की सजा सुनाई थी। सह-दोषी सुखदेव यादव को 20 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी।
इन लोगों को 16 और 17 फरवरी, 2002 की रात को कटारा का एक विवाह समारोह से अपहरण करने और उसके बाद उसकी हत्या करने का दोषी ठहराया गया था और सजा सुनायी गई थी। विकास और विशाल यादव अपनी बहन भारती यादव और नीतीश के कथित संबंध से नाराज थे।
