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पिता मजदूर, बेटियों ने NEET पास किया, अब फीस नहीं:सरकारी स्कूल की 12 लड़कियां क्वालिफाई, बोलीं- मदद मिले तो डॉक्टर बन जाएं

ग्राउंड रिपोर्ट

पिता मजदूर, बेटियों ने NEET पास किया, अब फीस नहीं:सरकारी स्कूल की 12 लड़कियां क्वालिफाई, बोलीं- मदद मिले तो डॉक्टर बन जाएं

मिर्जापुर, यूपी6 घंटे पहलेलेखक: देवांशु तिवारी

मिर्जापुर का मड़िहान एरिया, 3 साल पहले तक यहां नक्सलियों का खौफ था। हर दिन लूट, मर्डर और फिरौती की खबरें आती थीं। इसी मड़िहान में जंगलों से घिरे एक सरकारी स्कूल की 12 लड़कियों ने देश की सबसे बड़ी मेडिकल परीक्षा नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट यानी NEET पास की है।

स्कूल का नाम जयप्रकाश नारायण सर्वोदय बालिका विद्यालय है। यहां की 12वीं की 40 छात्राओं ने ये परीक्षा दी थी। इनमें से 12 पास हो गईं। ये सभी दलित और आदिवासी समुदाय से आती हैं। ज्यादातर के माता-पिता मजदूर हैं, सब्जी-फल का ठेला लगाते हैं, या दुकानों पर हेल्पर का काम करते हैं।

इन लड़कियों ने कामयाबी हासिल की, तो मीडिया में तारीफ में खबरें चलीं। कुछ दिन की खुशी के बाद अब उनके घरों में मायूसी है। इन लड़कियों ने NEET तो निकाल लिया, लेकिन मेडिकल कॉलेजों की महंगी फीस भरने के लिए उनके पास पैसे नहीं हैं। उन्होंने UP के CM योगी आदित्यनाथ से आगे की पढ़ाई के लिए मदद मांगी है।

मिर्जापुर के इसी स्कूल में पढ़ने वाली 12 लड़कियों ने NEET पास किया है। वहीं, 22 लड़कियों ने AIIMS, KGMU और PGI जैसे संस्थानों में नर्सिंग कोर्स में क्वालिफाई किया है।

दैनिक भास्कर इन लड़कियों की कहानी जानने मड़िहान पहुंचा।

सर्जन बनना चाहती है पूजा, लेकिन फीस कहां से भरे मड़िहान फॉरेस्ट रेंज में आने वाले पटेवर गांव की पूजा ने पहली बार में ही NEET क्लियर किया है। पूजा के 7 भाई-बहन हैं। पूजा सर्जन बनना चाहती हैं।

फोटो में पूजा अपने पिता जब्बर सोनकर के साथ हैं। जब्बर लोकल मार्केट में फल-सब्जी का ठेला लगाते हैं।

पूजा कहती हैं, ‘2023 में हमारे स्कूल में साइंस लेने वाले बच्चों का स्पेशल बैच बनाया गया। हमें NEET की तैयारी कराई गई। मैंने हॉस्टल में रहकर पढ़ाई की। उम्मीद नहीं थी कि इतना बड़ा एग्जाम क्लियर कर लूंगी।’

‘हमारे गांव में किसी को नहीं पता था कि NEET क्या होता है। पापा भी नहीं जानते थे, लेकिन मैंने बताया कि इससे बड़े मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन मिलता है। पढ़ाई के बाद डॉक्टर की डिग्री मिलेगी। तब वे बहुत खुश हुए।’

‘रिजल्ट आया तब पता चला बिटिया डॉक्टर बन सकती है’ पूजा के पिता जब्बर कहते हैं, ‘मेरे गांव में कोई सरकारी नौकरी नहीं करता, डॉक्टर बनना तो दूर की बात है। पूजा का रिजल्ट आया तो पता चला कि वो डॉक्टर बन सकती हैं। मुझे उस पर गर्व है। उसे आगे पढ़ाने के लिए पैसे जोड़ रहा हूं। सरकार कुछ मदद कर देगी, तो उसका अच्छे कॉलेज में एडमिशन करवा दूंगा।’

मालती के मम्मी-पापा मजदूर, जो कमाया बेटी पर खर्च किया पूजा की तरह मालती भी जयप्रकाश नारायण सर्वोदय बालिका विद्यालय से पढ़ी हैं। मालती ने भी NEET पास की है। उनके पिता मणिलाल और निर्मला देवी मजदूर हैं। अमेठी के खालिसपुर की रहने वाली मालती 4 भाई-बहनों में सबसे बड़ी हैं। हम मालती से मिलने मिर्जापुर से अमेठी पहुंचे। घर पर उनकी मां निर्मला देवी मिलीं।

ये मालती की मां निर्मला देवी हैं। बेटी की कामयाबी से खुश हैं, लेकिन उसकी आगे की पढ़ाई की चिंता भी है।

मालती के बारे में पूछने पर निर्मला देवी बताती हैं, ‘रैंक कम आने की वजह से उसे प्राइवेट कॉलेज मिल रहा था। हमारे पास इतना पैसा नहीं है कि उसे प्राइवेट कॉलेज में पढ़ा सकें। इसलिए बेटी को वाराणसी में मेडिकल की कोचिंग कराने भेजा है। वहां उसकी पढ़ाई फ्री है। अगले साल मालती फिर परीक्षा देगी। सरकारी कॉलेज मिलेगा, तो एडमिशन करवाएंगे।

‘मेरे दो बेटे और दो बेटियां हैं। हम मजदूरी करके कमाते हैं, जो मिलता है, बच्चों की पढ़ाई पर खर्च कर देते हैं। हमारे पास पैसा नहीं था, इसलिए मालती को छठवीं क्लास के बाद घर से 90 किलोमीटर दूर बछरावां भेज दिया। वहां आश्रम में पढ़ाई होती है। वे छोटे से ही वहां रहकर पढ़ रही थी।’

‘10वीं के बाद मालती ने मिर्जापुर के सर्वोदय विद्यालय में एडमिशन ले लिया। वहीं उसने मेडिकल की तैयारी की और परीक्षा पास कर ली। हमने मालती को बाहर पढ़ने भेजा, तो गांववाले ताना देते थे। कहते थे कि तुम लोग बच्चों को पाल नहीं पा रहे हो, इसलिए बाहर भेज दिया। हमने किसी की बात नहीं सुनी। आज बेटी की वजह से सब खुश हैं।’

ममता के गांव से हॉस्पिटल 5 किमी दूर, इसलिए डॉक्टर बनना है सोनभद्र-मिर्जापुर बॉर्डर के पास कन्हईपुरवा गांव की ममता कनौजिया के पिता दयाशंकर कनौजिया मुंबई में काम करते हैं। इलेक्ट्रॉनिक शोरूम में हेल्पर हैं। घर चलाने लायक ही कमा पाते हैं।

ममता कहती हैं, ‘10वीं की परीक्षा दे रही थी, तब NEET के बारे में पता चला था। स्कूल में बाहर से टीचर आते थे। नोट्स-किताबें और स्टडी मटीरियल फ्री में मिलता था। मैं आगे बायो रेडियोलॉजी स्ट्रीम से पढ़ना चाहती हूं। मुझे प्राइवेट कॉलेज मिल रहा है। उसकी फीस भरना मुश्किल है। अगर सरकार स्कॉलरशिप दे देगी, तो आगे पढ़ सकूंगी।’

ममता कन्हईपुरवा गांव में मां के साथ रहती हैं। ममता ने मेहनत करके NEET तो पास कर ली है, लेकिन आगे की पढ़ाई के लिए पैसे नहीं हैं।

ममता के गांव में हॉस्पिटल नहीं है। लोग इलाज के लिए या तो झाड़-फूंक के भरोसे हैं या फिर 5 किलोमीटर दूर हॉस्पिटल जाते हैं। ममता कहती हैं, ‘अगर मैं डॉक्टर बन गई, तो गांव के लोगों की मदद करूंगी।’

सरकारी स्कूल की बच्चियों ने कैसे पास किया NEET-JEE सर्वोदय बालिका विद्यालय मिर्जापुर शहर से 30 किमी दूर मड़िहान फॉरेस्ट रेंज से सटा है। स्कूल की वॉर्डन अनीता जायसवाल कहती हैं, ‘हमारे स्कूल को समाज कल्याण विभाग ने सेंटर आफ एक्सिलेंस घोषित किया है। UP में कुल 29 आवासीय सर्वोदय विद्यालय हैं। सभी से लड़कियों को चुनकर 40 छात्राओं का पहला बैच बनाया गया।’

‘2 साल इन बच्चियों की प्राइवेट कोचिंग की फैकल्टी के जरिए पढ़ाई करवाई गई। NEET की तैयारी के लिए खासतौर पर एक्स नवोदय फाउंडेशन और समाज कल्याण विभाग ने मदद की।’

‘यहां पढ़ रही छात्राओं को ऑनलाइन क्लास, मेडिकल फील्ड के प्रोफेसर्स की गाइडेंस भी दी गई। फीस, ड्रेस और रहना सब फ्री है। बच्चियों ने मेहनत से पढ़ाई की और पहले ही बैच में हमारी 12 बच्चियों ने NEET क्वालिफाई कर लिया।’

सर्वोदय बालिका विद्यालय में NEET के लिए 2023 में एजुकेशन प्रोग्राम शुरू किया गया था। इससे पहले यहां सिर्फ 12वीं तक पढ़ाई होती थी।

स्कूल में 40 बच्चियों का नया सेशन शुरू हो गया है। इसमें अंबेडकरनगर से आई साक्षी सिंह ने एडमिशन लिया है। वे बताती हैं, ‘स्कूल में पढ़ने का बहुत अच्छा माहौल है। बड़ी-बड़ी प्राइवेट मेडिकल कोचिंग में जो कोर्स पढ़ाया जाता है, उसे यहां के टीचर्स अच्छे से समझाते हैं। क्लासरूम की पढ़ाई के बाद अगर कोई सेल्फ स्टडी कर ले, तो आसानी से एग्जाम क्वालिफाई कर सकता है।’

सरकारी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन मिला, तो मदद स्कूल में पढ़ने वाली 12 लड़कियों ने NEET क्रैक किया है, वहीं 22 ने AIIMS, KGMU और PGI जैसे संस्थानों में नर्सिंग कोर्स में क्वालिफाई किया है। अब सवाल है कि इनकी आगे की पढ़ाई का खर्च कौन उठाएगा।

NEET पास करने वाली छात्राओं को फ्री कोचिंग देने वाली संस्था एक्स-नवोदय फाउंडेशन के ट्रेनर अंभुज तिवारी कहते हैं, ‘ट्रेनिंग के बाद अगर बच्ची का सिलेक्शन सरकारी कॉलेज में होता है, तो उसकी कॉलेज-हॉस्टल फीस से लेकर लैपटॉप तक का खर्च हमारी संस्था उठाती है।’

‘बच्चों को मिलने वाली स्कॉलरशिप इस पर निर्भर करती है कि उन्होंने सेमेस्टर में कैसा परफॉर्म किया है। इसके लिए सबसे जरूरी है कि बच्चे का सिलेक्शन सरकारी कॉलेज में हुआ हो। गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज मिलने पर हमारी पूरी कोशिश होती है कि पैसों की वजह से बच्ची की पढ़ाई न रुके।’

स्कूल में पढ़ने वाली 12 लड़कियों ने NEET क्रैक किया, 22 ने AIIMS, KGMU और PGI जैसे संस्थानों में नर्सिंग कोर्स में क्वालीफाई किया है। हालांकि, इस सफलता के बीच सबसे बड़ा सवाल ये है कि इन छात्राओं की आगे की पढ़ाई का खर्च कौन उठाएगा।

DM बोलीं- कॉलेज फीस देने का सिस्टम नहीं NEET पास करने वाली बच्चियों की आगे की पढ़ाई पर हमने मिर्जापुर की DM प्रियंका निरंजन से बात की। वे कहती हैं, ‘जिला प्रशासन ने अब तक बच्चियों की पढ़ाई से लेकर इनके रहने-खाने की हर सुविधा का ध्यान रखा है। आगे भी हमारी ये कोशिश रहेगी कि इन्हें अच्छे से अच्छा कॉलेज मिले।’

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हम बच्चियों की मदद के लिए CSR फंड जुटाने और कुछ बड़े औद्योगिक संस्थाओं से भी बात कर रहे हैं। छात्राओं की हर संभव सहायता की जाएगी।

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‘जिला प्रशासन समाज कल्याण विभाग बच्चों को 11वीं-12वीं की पढ़ाई करवा रहा है। फिलहाल कॉलेज फीस देने जैसी प्रशासन के पास कोई व्यवस्था नहीं है।’

मिर्जापुर के समाज कल्याण अधिकारी रामविलास यादव कहते हैं, ‘11वीं-12वीं की पढ़ाई करने वाली छात्राओं को NEET की तैयारी के लिए समाज कल्याण विभाग और एक्स-नवोदय फाउंडेशन ये प्रोजेक्ट चला रहा है। इसमें बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च हम उठाते हैं, लेकिन कॉलेज फीस के भुगतान को लेकर अभी तक कोई निर्देश नहीं मिले हैं।’

मंत्री बोले- काउंसलिंग से कॉलेज में एडमिशन तक सरकार बच्चियों के साथ छात्राओं के सिलेक्शन के बाद क्या यूपी सरकार उन्हें मेडिकल कोर्स में दाखिला दिलाने में मदद करेगी? इस सवाल पर समाज कल्याण विभाग के राज्यमंत्री संजीव कुमार गोंड कहते हैं, ‘छात्राओं ने कम सुविधाएं में भी NEET जैसी बड़ी परीक्षा पास की है। ये मामूली बात नहीं है।’

‘सरकार ने बच्चियों की पढ़ाई से लेकर उनकी परीक्षा तक में सहयोग दिया है। काउंसलिंग के बाद कॉलेज में दाखिले की है, तो सरकार इन होनहार बच्चियों से साथ हमेशा खड़ी है।’

सर्वोदय आवासीय विद्यालय में रहना, खाना पढ़ाई फ्री सर्वोदय आवासीय विद्यालय सरकारी स्कूल हैं, जहां लड़कियों को फ्री में रहने और पढ़ने की सुविधा मिलती है। ये स्कूल पिछड़े, दलित और आदिवासी समुदायों की लड़कियों को अच्छी शिक्षा और सुरक्षित माहौल देने के लिए बनाए गए हैं। हर राज्य में यह अलग-अलग नाम से चलाए जाते हैं, जैसे UP में इनका नाम जेपी सर्वोदय बालिका विद्यालय है।

ज्यादातर स्कूल समाज कल्याण विभाग, शिक्षा विभाग या आदिवासी कल्याण विभाग के तहत आते हैं। कुछ स्कूल राज्य बालिका शिक्षा मिशन जैसी योजनाओं से जुड़े होते हैं। इनमें, रहना, खाना, पढ़ाई, किताबें, यूनिफॉर्म सब फ्री होता है। लड़कियों को यहां NEET या JEE की कोचिंग दी जाती है।

सर्वोदय विद्यालय, नवोदय विद्यालय से अलग हैं। नवोदय विद्यालय केंद्र सरकार के तहत आते हैं, जबकि सर्वोदय राज्य सरकार के सामाजिक न्याय या शिक्षा विभाग के तहत चलते हैं।

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