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पहलगाम हमला-मृतक नौसेना अफसर के पिता आसिम मुनीर पर बोले:उस दिन दर्द का एहसास होगा, जब उनके बेटे-बेटी आतंकी हमले का शिकार होंगे

जम्मू कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को आतंकी हमला हुआ था। इस हमले में हरियाणा के रहने वाले नौसेना में लेफ्टिनेंट विनय नरवाल भी मारे गए थे। विनय के पिता राजेश नरवाल ने अपने बेटे को खोने के मानसिक आघात के बारे में बताया।

विनय और हिमांशी की 16 अप्रैल को मसूरी में शादी हुई। 19 तारीख को करनाल में रिसेप्शन पार्टी रखी गई थी। इसके बाद वह 21 अप्रैल को हिमांशी के साथ हनीमून मनाने के लिए पहलगाम गए थे, जहां 22 अप्रैल को एक आतंकी ने नाम पूछकर विनय पर गोली चलाई थी।

NDTV को दिए एक इंटरव्यू में राजेश ने कहा कि हमारा परिवार ऐसे दुख में जी रहा है, जो असहनीय है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर इस दर्द को तब समझेंगे, जब किसी आतंकी हमले में उनके बेटे या बेटी को नुकसान होगा।

विनय के पिता राजेश बोले- परिवार के सामने रो भी नहीं सकता

राजेश ने कहा- मैं अपने परिवार के सामने रो भी नहीं सकता। मेरी पत्नी, माता-पिता, सब टूट चुके हैं। लेकिन मुझे शांत रहना है ताकि उन्हें लगे कि मैं मजबूत हूं। मन को शांति नहीं मिल रही है। इतने दिन हो गए हैं, हम सो नहीं पा रहे हैं। हमारा दिमाग पूरी तरह से सुन्न हो गया है। कोई भी दो-तीन घंटे से ज्यादा सो नहीं पा रहा है। जब हम मनोचिकित्सक के पास जाते हैं, तो वे दवाइयां लिखते हैं। लेकिन इसका कोई इलाज नहीं है। हमें दूसरी बीमारियां हो जाती हैं। हम ऐसे ही हैं।

दरअसल, अमेरिका ने पाकिस्तान समर्थित द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) को विदेशी आतंकवादी संगठन (FTO) और विशेष रूप से नामित ग्लोबल टेररिस्ट (SDGT) की लिस्ट में डाल दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने शुक्रवार को बयान जारी कर इसकी जानकारी दी।

इस पर राजेश ने कहा, इतना कर देना काफी नहीं है। यह रातों-रात नहीं हुआ। TRF 2019 में बना, जब हमारी सरकार ने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को रद्द कर दिया था। यह पाकिस्तानी आतंकवाद का मुखौटा है।

पिता के साथ लेफ्टिनेंट विनय नरवाल की तस्वीर। विनय 3 साल पहले नेवी में कमीशंड हुए थे।

‘मेरा बेटा निडरता से जीता था, उसकी मौत भी ऐसे ही हुई’

राजेश ने बताया कि विनय को सैनिकों से बहुत लगाव था। वे मुझे सड़क किनारे काफिला देखने के लिए घसीटकर ले जाते थे। उनमें वो जोश, नेतृत्व क्षमता, साहस और अनुशासन था। हमने उन्हें सच बोलना और ईमानदारी से जीना सिखाया। वे निडरता से जीते थे। उनकी मृत्यु भी ऐसे ही हुई। वे मेरे हीरो हैं और हमेशा रहेंगे। विनय हमेशा मेरे दिमाग में रहते हैं, चौबीसों घंटे। जब मैं सुबह उठता हूं तो सबसे पहले उन्हें ही देखता हूं।

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